उत्तर प्रदेश में मानसून को लेकर मौसम विभाग का अनुमान गलत साबित हुआ है। अलनीनो के सक्रिय रहने के कारण जहां कमजोर मानसून और कम बारिश की आशंका जताई गई थी, वहीं अगस्त में बने मानसूनी सिस्टम ने पासा पलट दिया। प्रदेश में अब तक सामान्य के मुकाबले 100.3% बारिश दर्ज की जा चुकी है।
मौसम विभाग ने अलनीनो की सक्रियता को देखते हुए जून से सितंबर के दौरान केवल 90 प्रतिशत बारिश का अनुमान लगाया था।
- Published: 11 Sep 2026, 12:45 PM IST
- Last Updated: 11 Sep 2026, 12:45 PM IST
उत्तर प्रदेश में इस साल मानसून की शुरुआत भले ही सुस्त और चिंताजनक रही हो, लेकिन अगस्त आते-आते मौसम के बदले मिजाज ने मौसम वैज्ञानिकों के सारे अनुमानों को ध्वस्त कर दिया। जून और जुलाई में अलनीनो के असर के कारण सूखे जैसे हालात की आशंका जताई जा रही थी, लेकिन एक के बाद एक सक्रिय हुए कम दबाव के क्षेत्रों ने बारिश का कोटा पूरा कर दिया। 1 जून से 8 सितंबर तक के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की जा चुकी है और सितंबर का आधा महीना अभी बाकी है।
अगस्त की बारिश ने पलटा पूरा खेल
मौसम विभाग ने अलनीनो की सक्रियता को देखते हुए जून से सितंबर के दौरान दीर्घकालिक औसत की केवल 90 प्रतिशत बारिश का अनुमान लगाया था। शुरुआत में जून-जुलाई में बारिश कम रही भी, लेकिन अगस्त महीने में बने मजबूत मानसूनी सिस्टम ने तस्वीर बदल दी। अगस्त में 291.3 मिलीमीटर बारिश हुई, जो सामान्य से 24 प्रतिशत अधिक है। यह वर्ष 2018 (293.1 मिमी) के बाद अगस्त महीने में दर्ज हुई सबसे अधिक बारिश है।
100.3 प्रतिशत तक पहुंचा मानसूनी कोटा
आंकड़ों के मुताबिक, 1 जून से 8 सितंबर के बीच उत्तर प्रदेश में औसतन 649.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश का आंकड़ा 647.3 मिलीमीटर होता है। यानी प्रदेश में अब तक 100.3 प्रतिशत बारिश हो चुकी है, जिससे कृषि क्षेत्र और जल निकायों को बड़ी राहत मिली है।
एक प्रदेश, दो तस्वीरें: चित्रकूट में सर्वाधिक तो कुशीनगर में सूखा
हालांकि पूरे प्रदेश का कुल औसत आंकड़ा सामान्य पार कर गया है, लेकिन जिलों के स्तर पर बारिश का वितरण काफी असमान रहा है। चित्रकूट जिला 1201.1 मिलीमीटर बारिश के साथ प्रदेश में सबसे ऊपर रहा।
वहीं, इसके उलट कुशीनगर में मात्र 204.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से करीब 67 प्रतिशत कम है। इसके अलावा मऊ जिले में भी बारिश में 53 प्रतिशत की भारी कमी दर्ज की गई है।