नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज): भारत निर्वाचन आयोग (ECI) में आंतरिक असहमति और मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर चल रही तमाम चर्चाओं पर आयोग ने आधिकारिक तौर पर पूर्ण विराम लगा दिया है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी के बीच हुई एक उच्चस्तरीय अहम बैठक के बाद आयोग ने बिंदुवार विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया। चुनाव आयोग ने दो टूक शब्दों में कहा कि लोकतांत्रिक संस्था में विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श, आपत्तियां और सुझाव आना सामान्य व स्वस्थ प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है। वोटर लिस्ट के विशेष पुनरीक्षण (SIR) और तकनीकी व्यवस्था से जुड़े सभी अंतिम फैसले तीनों आयुक्तों की पूर्ण सहमति और सर्वसम्मति से ही लिए गए हैं।
कैबिनेट सेक्रेटरी को लिखे पत्र पर दी सफाई
आयोग ने स्पष्ट किया कि कैबिनेट सेक्रेटरी को लिखा गया पत्र निर्वाचन आयोग या उसके आईटी डिवीजन के किसी नीतिगत (पॉलिसी) मामले से संबंधित नहीं था। यह मामला केवल प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) पर आए एक अधिकारी के प्रशासनिक कामकाज और जिम्मेदारियों से जुड़ा था। संबंधित अधिकारी द्वारा जारी कार्य विभाजन के आदेश असल में दोनों चुनाव आयुक्तों के निर्देशों के बाद लागू नहीं किए गए थे। आयोग ने साफ किया कि उप चुनाव आयुक्त (DEC) से आईटी डिवीजन की निगरानी का अधिकार कभी वापस नहीं लिया गया था।
20 राज्यों में SIR का काम पूरा, छूटे मतदाताओं के लिए विशेष अभियान
निर्वाचन आयोग ने बताया कि बिहार और पश्चिम बंगाल समेत 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि पुनरीक्षण के दौरान या उसके बाद किसी पात्र नागरिक या पहली बार वोट देने वाले युवा का नाम सूची में शामिल होने से छूट गया है, तो वे निरंतर अद्यतन प्रक्रिया (Continuous Updation) के तहत संबंधित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) के पास आवेदन जमा कर सकते हैं। इसके लिए राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO), जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) और ERO को तत्काल विशेष नामांकन अभियान चलाने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। उधर गोवा में भी बीएलओ घर-घर जाकर छूटे हुए मतदाताओं से फॉर्म-6 भरवाने में जुटे हैं।
दिल्ली और महाराष्ट्र में दावे व आपत्तियों की तारीखें बढ़ीं
राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों से मिले अनुरोध पर संज्ञान लेते हुए चुनाव आयोग ने दिल्ली और महाराष्ट्र में दावे तथा आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तिथियों में विस्तार कर दिया है। दिल्ली में अब दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समय-सीमा 30 अक्टूबर 2026 तक और इनके निपटारे की तारीख 30 नवंबर 2026 तक बढ़ा दी गई है। वहीं महाराष्ट्र के लिए दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तिथि 12 अक्टूबर 2026 तय की गई है, जबकि इनके निपटारे की समय-सीमा को 10 नवंबर 2026 तक बढ़ा दिया गया है।
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