E20 पेट्रोल का नया संकट, क्या ईंधन के चक्कर में महंगी हो जाएगी आपकी थाली?

Published on 24 अक्टू॰ 2026

E20 पेट्रोल के लिए नई इथेनॉल नीति में गन्ने से उत्पादन पर रोक लगाई गई है, ताकि चीनी की उपलब्धता बनी रहे. हालांकि, मक्का की मांग बढ़ने से अंडे और चिकन महंगे हो सकते हैं.

Written By : अरिजीता सेन |  Updated at : 24 Oct 2026 06:11 PM (IST)

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क्या ईंधन के चक्कर में महंगी हो जाएगी आपकी थाली?

Source : ABPLive

भारत में अब E20 पेट्रोल की जरूरत पूरी करने के लिए इथेनॉल खरीदने की नई नीति का असर खेती, पशुओं के चारे और खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर भी पड़ सकता है. क्योंकि पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने का असर सिर्फ गाड़ियों के माइलेज या ईंधन की कीमत तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका संबंध खेती और रोजमर्रा के चीजों के दाम से भी है. खासकर मक्का का इस्तेमाल इथेनॉल बनाने में बढ़ने से चिकन और अंडे जैसी चीजों के महंगे होने का खतरा पैदा हो सकता है.

यही वजह है कि सरकार के नए इथेनॉल खरीद नियमों को ऊर्जा जरूरतों और खाद्य महंगाई के बीच संतुलन बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. आइए जानते हैं कि इस फैसले का आपकी जेब और खाने की थाली पर क्या असर पड़ सकता है.

क्या है सरकार की नई इथेनॉल पॉलिसी?

तेल कंपनियों ने 2026-27 के सप्लाई वर्ष के लिए करीब 1,100 करोड़ लीटर इथेनॉल खरीदने के लिए बोलियां आमंत्रित की हैं. हालांकि, नए टेंडर में गन्ने का रस, सिरप और B-हैवी मोलासेस से बनने वाले इथेनॉल को शामिल नहीं किया गया है. इस फैसले का खास मकसद चीनी के इस्तेमाल को इथेनॉल बनाने की तरफ मोड़ने से रोकना और खाद्य महंगाई पर नियंत्रण बनाए रखना है.

मक्का से इथेनॉल बनाना क्यों पड़ सकता है महंगा?

गन्ने से बनने वाले इथेनॉल के कुछ ऑप्शनों पर रोक लगने से तेल कंपनियों की खरीद लागत बढ़ने की आशंका है. ऐसे में तेल कंपनियों को इथेनॉल की जरूरत पूरी करने के लिए मक्का और C-हैवी मोलासेस जैसे दूसरे ऑप्शनों पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ सकता है.

आंकड़ों के मुताबिक, मक्का आधारित इथेनॉल की खरीद कीमत 68.86 रुपए प्रति लीटर है, जबकि B-हैवी मोलासेस से बनने वाले इथेनॉल की कीमत 60.73 रुपए प्रति लीटर बताई गई है. यानी मक्का आधारित इथेनॉल की कीमत B-हैवी मोलासेस वाले इथेनॉल से करीब 13.4% महंगा है. इससे तेल कंपनियों का खर्च बढ़ सकता है. 

क्या महंगे हो सकते हैं अंडे और चिकन?

इथेनॉल बनाने में मक्का का इस्तेमाल बढ़ने से पोल्ट्री उद्योग की लागत पर असर देखने को मिल सकता है. इसकी वजह यह है कि मक्का मुर्गियों के चारे का एक अहम हिस्सा है. देश में पैदा होने वाले घरेलू मक्के का करीब 55-60% हिस्सा पोल्ट्री उद्योग इस्तेमाल करता है.

ऐसे में अगर मक्के की ज्यादा मात्र इथेनॉल बनाने में जाने लगी, तो पशु-पक्षियों के चारे की लागत बढ़ सकती हैं. इसका असर अंडे और चिकन की कीमतों पर पड़ने की आशंका है. हालांकि, कीमतें कितनी बढ़ेंगी, यह मक्के की उपलब्धता और बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा.

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About the author अरिजीता सेन

अरिजीता सेन एबीपी लाइव के बिजनेस डेस्क पर बतौर सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर काम कर रही हैं. पत्रकारिता जगत में करीब आठ साल का अनुभव है. फाइनेंस के क्षेत्र में इनकी अच्छी पकड़ है. अरिजीता पहले भी कई संस्थानों में अपनी सेवा दे चुकी हैं.

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Published at : 24 Oct 2026 06:11 PM (IST)

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