DUSU चुनाव में NSUI की हार... बवाल, कन्हैया कुमार पर क्यों सवाल? दीपांशु शौकीन को 2025 में नहीं मिला था NSUI का टिकट

Published on 21 सित॰ 2026

DUSU चुनाव में NSUI की हार… बवाल, कन्हैया कुमार पर क्यों सवाल? दीपांशु शौकीन को 2025 में नहीं मिला था NSUI का टिकट

NSUI के राष्ट्रीय प्रभारी हैं कन्हैया कुमार

DUSU Election 2026: दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन (DUSU) इलेक्शन 2026 शांतिपूर्ण संपन्न हो गया है. इस चुनाव में डूसू सेंट्रल पैनल की तीन सीटों पर ABVP ने जीत दर्ज की थी, तो वहीं उपाध्यक्ष सीट पर निर्दलीय (NSUI के बागी) दीपांशु शौकीन ने जीत दर्ज की है. कुल जमा नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) को डूसू चुनाव 2026 में करारी हार मिली है. इस हार के बाद NSUI और कांग्रेस में नया बवाल शुरू हाे गया है. जानकारी के मुताबिक राहुल गांधी ने इस संबंध में बैठक कर रिपोर्ट तलब की है, तो वहीं इस हार के लिए NSUI और कांग्रेस में ही कन्हैया कुमार को जिम्मेदार बताया जा रहा है.

आइए, जानते हैं कि ऐसा क्या है कि डूसू चुनाव 2026 में NSUI को मिली करारी हार के लिए कन्हैया कुमार को दोषी बताया जा रहा है. जानेंगे कि डूसू चुनाव कैसे NSUI के लिए पहले भी बिखराव का सेंटर रहा है. पूरे मामले को विस्तार से जानेंगे.

2023 से NSUI के प्रभारी हैं कन्हैया कुमार

डूसू चुनाव 2026 में NSUI को मिली करारी हार के लिए कन्हैया कुमार को क्यों जिम्मेदार ठहराया जा रहा है? इस पर आगे से विस्तार से बात करते हैं. इससे पहले NSUI में कन्हैया कुमार के कद और पद के बारे में जानते हैं. असल में कन्हैया कुमार कांग्रेस के सक्रिय मेंबर हैं, लेकिन वह 2023 से NSUI के राष्ट्रीय प्रभारी के तौर पर सक्रिय हैं. असल में जुलाई 2023 में कन्हैया कुमार को NSUI का राष्ट्रीय प्रभारी बनाया गया था.

डूसू चुनाव 2024 में NSUI की हुई थी वापसी, रौनक खत्री बने थे अध्यक्ष

NSUI का राष्ट्रीय प्रभारी बनाए जाने के बाद डूसू चुनाव 2024 में NSUI ने 7 साल बाद वापसी की थी. डूसू सेंट्रल पैनल में NSUI ने अध्यक्ष और संयुक्त सचिव पद पर जीत दर्ज की थी. NSUI के अध्यक्ष पद के प्रत्याशी रौनक खत्री ने जीत दर्ज की थी. तो वहीं NSUI के लोकेश संयुक्त सचिव बने थे.

DUSU इलेक्शन 2025 में भी दीपांशु शौकीन कोNSUI ने नहीं दिया था टिकट

DUSU इलेक्शन 2024 में NSUI ने 7 साल बाद वापस की, लेकिन डूसू इलेक्शन 2025 में NSUI में बिखराव देखने को मिला. मसलन, डूसू इलेक्शन 2026 में निर्दलीय उपाध्यक्ष पद जीतने वाले दीपांशु शौकीन डूसू इलेक्शन 2025 में NSUI से टिकट के दावेदार थे, लेकिन उन्हें टिकट नहीं दिया गया. कन्हैया कुमार पर ही उन्हें टिकट नहीं देने का आरोप लगा था.

डूसू चुनाव 2025 से NSUI में जारी राजनीतिक की इनसाइड स्टोरी

असल में NSUI के दिग्गजो के लिए डूसू चुनाव 2025 से राजनीति का रणक्षेत्र बना हुआ है. डूसू चुनाव 2025 में NSUI प्रभारी कन्हैया कुमार और NSUI राष्ट्रीय अध्यक्ष वरुण चौधरी के बीच टकराव का मामला सामने आया था. डूसू चुनाव 2025 में NSUI की तरफ से 8 कैंडिडेट्स ने सेंट्रल पैनल के लिए नामांकन कराया था, जिसके बाद नियामानुसार 4 नामों को अंतिम रूप दिया गया, जिसके बाद NSUI ने अध्यक्ष पद पर जोश्लिन नंदिता चौधरी को अपना अधिकृत कैंडिडेट बनाया.

जबकि उस समय डूसू के निवर्तमान अध्यक्ष रौनक खत्री और NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष वरुण चौधरी ने NSUI की तरफ से डूसू अध्यक्ष पद के लिए उमांशी लांबा और दीपांशु शौकीन का नाम आगे बढ़ाया था, लेकिन NSUI के राष्ट्रीय प्रभारी कन्हैया कुमार के नेतृत्व में NSUI ने जोश्लिन नंदिता चौधरी को अध्यक्ष पद के लिए कैंडिडेट बनाया. बताया जा रहा है कि इसके बाद से डूसू के निवर्तमान अध्यक्ष रौनक खत्री ने चुनाव से थोड़ी दूरी बना ली है. वहीं उमांशी लांबा ने INSO के बैनर तले उपाध्यक्ष पद का चुनाव लड़ा.

दीपांशु शाैकीन को इस बार भी नहीं मिला टिकट, उनके समर्थकों ने निर्दलीय लड़ाया

जानकारी के मुताबिक दीपांशु शौकीन इस बार NSUI से सेंट्रल पैनल के लिए टिकट मांग रहे थे, लेकिन प्रभारी कन्हैया कुमार और राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ की टीम ने उनके नाम पर विचार नहीं किया. इसके बाद पूर्व डूसू अध्यक्ष रोनक खत्री समेत उनकी टीम ने दीपांशु शौकीन को निर्दलीय चुनाव लड़ाया, जिसमें दीपांशु को जीत मिली और NSUI की करारी हार. इसके बाद NSUI में कन्हैया कुमार को लेकर नया बवाल शुरू हो गया है.

DUSU नहीं PUSU चुनाव से NSUI में कन्हैया की राजनीति हावी

DUSU चुनाव 2026 में करारी हार के बाद NSUI और कांग्रेस में बवाल शुरू हो गया है. कन्हैया कुमार सवालों के कटघरे में है. इस हार को DUSU चुनाव को लेकर NSUI के अंदर हावी गुटीय राजनीति के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन इसकी शुरुआत PUSU यानी पंजाब यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव से ही हो गई थी. PUSU चुनाव 2025 से ही NSUI में वरुण चौधरी बनाम कन्हैया कुमार के बीच अधिकारों का टकराव शुरू हुआ था. जानकारी के मुताबिक NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष वरुण चौधरी ने जिसे अधिकृत कैंडिडेट बनाया था, उसे PUSU चुनाव में हार मिली थी और ABVP पहली बार PUSU में खाता खोलने में सफल रहा. बताया जा रहा है कि पहले ही NSUI प्रभारी कन्हैया कुमार इस कैंडिडेट पर ऐतरात जता चुके थे. हार के बाद ये टकराव और बढ़ गया. इसके बाद NSUI ने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए कैंडिडेट्स की खोज शुरू कर दी थी, जिसे डूसू चुनाव 2025 तक के लिए स्थगित किया गया था.

मनोज भट्ट

मनोज भट्ट

पत्रकारिता में एक दशक से अध‍िक समय से सक्रिय. नवोदय टाइम्स, दैनिक जागरण, हिंदुस्तान में लंबे समय तक फील्ड रिपोर्टिंग. कई मुद्दों व खबरों को लीड किया, जो चर्चा में रही. अभी तक पंचायत, कृषि, प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा, राजनीति, पर्यावरण, स्वास्थ्य, चुनाव, बिजनेस से जुड़े विषयों पर काम किया है और इनमें लेखन की दिलचस्पी है.

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