राजस्थान शिक्षक संघ (सियाराम) का दो दिवसीय जिला शैक्षिक सम्मेलन कृष्णा स्पेशल टीचर ट्रेनिंग सेंटर कुड़ी भगतासनी में प्रारंभ हुआ। संगठन के प्रदेश मंत्री एवं संभाग प्रभारी सुभाष शर्मा ने शिक्षकों को अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहते हुए शिक्षा, शिक्ष
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उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए शिक्षक को अपने दायित्वों के प्रति सजग रहते हुए विद्यार्थियों के हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
ग्रेड थर्ड टीचर्स के ट्रांसफर खोलने की मांग
संगठन के जिला अध्यक्ष जैताराम खावा ने शिक्षकों की विभिन्न लंबित मांगों एवं समस्याओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संगठन द्वारा लंबे समय से इन मुद्दों को विभागीय स्तर पर उठाया जा रहा है।
उन्होंने तृतीय वेतन श्रृंखला के शिक्षकों के स्थानांतरण की राह खोलने, बकाया सभी वर्षों की डीपीसी प्रक्रिया पूर्ण करने, शिक्षकों को बीएलओ सहित सभी प्रकार के लिपिकीय एवं गैर-शैक्षणिक कार्यों से पूर्णतः मुक्त करने तथा स्थायी एवं पारदर्शी नीति लागू करने की मांग रखी।

कार्यक्रम में मंचस्थ अतिथि।
टीईटी परीक्षा की अनिवार्यता की जाए खत्म
उन्होंने आगे कहा कि भारत के शिक्षकों को टीईटी परीक्षा की अनिवार्यता से मुक्त करने, वर्ष 2022 में क्रमोन्नत किए गए सेकेंडरी से सीनियर सेकेंडरी विद्यालयों में पद सृजित करने तथा आरपीएससी एवं शैक्षिक कैलेंडर में समानता लाने सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर भी प्रकाश डाला। कार्यक्रम में जस्सा राम सुथार एवं गोपाल दवे ने भी अपने विचार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन भगाराम बिश्नोई ने किया।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी,लूणी शमीम बानो रहीं। विशिष्ट अतिथियों के रूप में प्रो. वैद मनोज शर्मा, पूर्व विकास अधिकारी सोहनलाल डारा,प्रधानाचार्य गणेशराम लावा,पूर्व एसीबीओ ओमप्रकाश टांक, पूर्व संयुक्त निदेशक श्याम सुंदर सोलंकी उपस्थित रहे।

अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (विद्यालय शिक्षा) के सम्मेलन को जोधपुर प्रांत संगठन मंत्री मंगलाराम ने संबोधित किया।
शिक्षा के साथ सामाजिक सरोकार भी जरूरी
अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (विद्यालय शिक्षा) जोधपुर का जिला सम्मेलन राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय किसान कन्या,नागौरी बेरा में आयोजित हुआ। सम्मेलन में जिले के विभिन्न खंडों से आए सैकड़ों शिक्षकों एवं संगठन के कार्यकर्ता शामिल हुए।
सम्मेलन के मुख्य वक्ता एवं सेवा भारती के जोधपुर प्रांत संगठन मंत्री मंगलाराम ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा के साथ सामाजिक सरोकार भी जरूरी है। शिक्षक केवल विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम का ज्ञान देने तक सीमित न रहें, बल्कि उनमें संस्कार, सामाजिक संवेदनशीलता और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।
उन्होंने संत रविदास के जीवन-दर्शन के विभिन्न प्रसंगों एवं दृष्टांतों के माध्यम से उनके कृतित्व, व्यक्तित्व और सामाजिक समरसता के संदेश को शिक्षकों के समक्ष रखा और इसे शिक्षक जीवन के लिए प्रेरणादायी पाथेय बताया।
प्रदेश कोषाध्यक्ष कैलाश चंद्र कच्छवा ने संगठन की रीति-नीति एवं कार्यपद्धति पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए “हमारा विद्यालय, हमारा तीर्थ” की संकल्पना को प्रभावी बनाने के उपाय बताए। उन्होंने विद्यालय में प्रार्थना सभा को प्रभावी एवं संस्कारयुक्त बनाने के संबंध में भी शिक्षकों को विस्तृत जानकारी दी।

कार्यक्रम में जिले के विभिन्न इलाकों से आए शिक्षक शामिल हुए।
सरकार को भेजेंगे शिक्षकों की समस्याएं
जिला संगठन मंत्री आईदान राम चौधरी ने बताया कि सम्मेलन में संयुक्त निदेशक, माध्यमिक शिक्षा विभाग जोधपुर हिम्मत सिंह तंवर, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी मंजू शर्मा, प्रदेश उपाध्यक्ष संजीव व्यास, पर्यावरण प्रकोष्ठ संयोजक रूपाराम रलिया, मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी चोमू गंगाराम चौधरी और स्थानीय विद्यालय की प्रधानाचार्य डॉ. कंचन चरण ने भी शिक्षा व्यवस्था, विद्यालयी विकास एवं समसामयिक शैक्षिक विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम के अंत में जिला अध्यक्ष कुलदीप गोदारा ने सम्मेलन में उपस्थित अतिथियों, शिक्षकों एवं कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया।
सम्मेलन में जोधपुर जिले के 15 खंडों अध्यक्ष, मंत्री के साथ संगठन के कार्यकर्ताओं सहित सैकड़ों शिक्षक उपस्थित रहे। सम्मेलन में शिक्षण व्यवस्था, संगठनात्मक गतिविधियों, संस्कार युक्त शिक्षा एवं विद्यालय को समाज से जोड़ने सहित विभिन्न शैक्षिक विषयों पर सार्थक मंथन हुआ। सम्मेलन के दौरान शिक्षक समस्याओं पर चर्चा कर संगठन से प्रस्ताव बनाकर राज्य सरकार को भेजे जाएंगे।