Aug 30, 2026 06:45 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान

विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि यह टीम नेपाल के स्थानीय फोरेंसिक विशेषज्ञों के साथ मिलकर शवों के डीएनए सैंपल के मिलान और विश्लेषण में सहयोग करेगी।

नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने भारत से आए फोरेंसिक टीम के सदस्यों के साथ मुलाकात की। ये सदस्य बाढ़ के शवों की पहचान के लिए DNA सैंपल के विश्लेषण में अधिकारियों की सहायता करने के लिए काठमांडू पहुंचे हैं।
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ (Flash Flood) के बाद मृतकों के शवों की पहचान के लिए भारत ने अपनी फोरेंसिक और डीएनए विशेषज्ञों की विशेष टीम काठमांडू भेजी है। नेपाल में भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने रविवार को भारतीय फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम से मुलाकात की और द्विपक्षीय राहत अभियानों की समीक्षा की।
विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि यह टीम नेपाल के स्थानीय फोरेंसिक विशेषज्ञों के साथ मिलकर शवों के डीएनए सैंपल के मिलान और विश्लेषण में सहयोग करेगी।
भारत ने क्यों भेजी फोरेंसिक टीम?
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बताया कि अब तक 600 से ज्यादा शव बरामद किए जा चुके हैं, जिनमें से कई शव बहुत ज्यादा खराब हालत में हैं और उनकी सामान्य रूप से पहचान करना असंभव हो गया है।
नेपाल सरकार ने मृतकों को उनके परिजनों को सौंपने के लिए भारत से त्वरित डीएनए विश्लेषण और फोरेंसिक लैब सहायता का अनुरोध किया था।
भारत के राष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (गांधीनगर) की 10-सदस्यीय टीम भी अस्थायी लैब स्थापित करने और बायोलॉजिकल सैंपल तैयार करने के लिए काठमांडू पहुंची है।
537 हाइड्रोपावर वर्कर्स सुरंगों में फंसे, रेस्क्यू तेज
नेपाल के रसुवा और नुवाकोट जिलों में स्थित 9 हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट के कम से कम 537 कर्मचारी और मजदूर अभी भी लापता हैं।
कीचड़ और मलबे से बंद पड़ी सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के लिए भारत ने अपनी चौथी राहत उड़ान के माध्यम से विशेषज्ञ टनल रेस्क्यू टीम और भारी तकनीकी उपकरण भी भेजे हैं।
अभी कैसे हैं नेपाल के हालात?
इस भीषण आपदा में मृतकों की संख्या बढ़कर 768 हो गई है। 2,500 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं। सबसे ज्यादा प्रभावित जिले चितवन में 264 शव, नवलपरासी पूर्व में 194 शव, नवलपरासी पश्चिम में 100 शव बरामद हुए।
भारत अब तक 4 रिलीफ फ्लाइट के जरिए 68.5 टन राहत सामग्री, बेली ब्रिज , टनल रेस्क्यू टीम और फोरेंसिक एक्सपर्ट्स भेज चुका है।
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि भारत इस कठिन समय में नेपाल को राहत, बचाव और पुनर्निर्माण के हर चरण में पूर्ण सहायता प्रदान करता रहेगा।