बक्सर सांसद सुधाकर सिंह ने नवादा में पुलिस हिरासत को लेकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखा है। उन्होंने लोकसभा नियमावली के नियम 222 और 223 के तहत विशेषाधिकार हनन का सवाल उठाया है।
.
उन्होंने आरोप लगाया कि हिरासत से उन्हें सदन की कार्यवाही में शामिल होने से रोका गया। सांसद ने नवादा के जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक की भूमिका की जांच की मांग की है।
DM-SP के आदेश पर कार्रवाई
पत्र के अनुसार, 26 अक्टूबर 2026 को दोपहर करीब 1 बजे नवादा टाउन में जिला पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया था। यह कार्रवाई डीएम और एसपी के आदेश पर हुई।
सुधाकर सिंह ने बताया कि उन्हें न तो एफआईआर की कॉपी मिली और न ही गिरफ्तारी मेमो या हिरासत के लिखित आधार दिए गए। किसी अपराध की जानकारी भी नहीं दी गई। उन्होंने अपनी हिरासत को संविधान के अनुच्छेद 21 और 22 के खिलाफ बताया।
सांसद ने लोकसभा नियमावली के नियम 229 का पालन न होने पर भी सवाल उठाया। इस नियम के तहत सांसद की गिरफ्तारी की सूचना तुरंत लोकसभा अध्यक्ष को देनी होती है, जो अधिकारियों ने नहीं दी।
उन्होंने बिहार सरकार के माध्यम से संबंधित अधिकारियों से निरुद्धि के आधार, लागू कानूनी प्रावधानों और हिरासत के स्थान की जानकारी मांगने का अनुरोध किया है। प्रतिशोधात्मक कार्रवाई का लगाया आरोप पत्र में सुधाकर सिंह ने यह भी आरोप लगाया है कि हिरासत में लिए जाने का समय ऐसा था, जिससे उनके दिल्ली पहुंचकर संसदीय कार्यवाही में भाग लेने पर असर पड़ा।
उन्होंने इसे अपने संसदीय दायित्वों के निर्वहन में बाधा बताते हुए कहा है कि इससे सदन में उपस्थित होने, चर्चा में भाग लेने, मतदान करने और बक्सर के मतदाताओं की समस्याएं उठाने की उनकी क्षमता प्रभावित हुई। सांसद ने बिहार पुलिस के कामकाज से जुड़े मुद्दों और नवादा के किसानों के सवालों को उठाने का भी उल्लेख किया है। उन्होंने भारत भूषण तिवारी मुठभेड़ से संबंधित पटना उच्च न्यायालय में लंबित CWJC संख्या 11789/2026 का हवाला देते हुए आशंका जताई है कि उनके खिलाफ की गई कार्रवाई प्रतिशोधात्मक हो सकती है। हालांकि, ये आरोप सांसद की ओर से प्रस्तुत पत्र में लगाए गए हैं।

विशेषाधिकार समिति को मामला भेजने की मांग सुधाकर सिंह ने लोकसभा अध्यक्ष से आग्रह किया है कि मामले का तत्काल संज्ञान लेकर नवादा के जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक से जवाब तलब किया जाए।
उन्होंने नियम 222 के तहत विशेषाधिकार प्रश्न उठाने की अनुमति देने और नियम 227 के अंतर्गत मामले को विशेषाधिकार समिति के पास भेजने की मांग की है। इसके अलावा उन्होंने बिहार सरकार को आवश्यक निर्देश जारी कर उन्हें दिल्ली जाने और संसद की कार्यवाही में शामिल होने में सक्षम बनाने का अनुरोध किया है।
सांसद के अनुसार, उनके अधिवक्ता वी लॉ एसोसिएट्स, पटना की ओर से भी नवादा के जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक को कानूनी नोटिस भेजा गया है, जिसमें हिरासत के आधार बताने और नियम 229 के अनुपालन की मांग की गई है। फिलहाल, इस मामले में नवादा जिला प्रशासन और पुलिस का पक्ष इस पत्र में शामिल नहीं है। अधिकारियों की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।