पूर्व DIG भुल्लर केस, बिचौलिए की आज कोर्ट में पेशी: मनी लॉन्ड्रिंग केस में ED प्रोडक्शन वारंट लेगी, बुड़ैल जेल में है बंद - Chandigarh News

Published on 18 सित॰ 2026

पंजाब पुलिस के निलंबित पूर्व DIG हरचरण सिंह भुल्लर से जुड़े रिश्वत और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED की जांच बिचौलिए कृष्णानु शारदा तक पहुंच गई है। करीब 5 महीने पहले भुल्लर से जुड़े पंजाब और चंडीगढ़ के ठिकानों पर छापेमारी करने के बाद ED अब कृष्णानु से प

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इसके लिए एजेंसी ने चंडीगढ़ की विशेष PMLA कोर्ट में प्रोडक्शन वारंट की अर्जी दाखिल की है। कृष्णानु इस समय बुड़ैल जेल में न्यायिक हिरासत में है। कोर्ट ने जेल सुपरिंटेंडेंट के जरिए कृष्णानु को नोटिस भेजकर जवाब मांगा था। इस मामले में आज सुनवाई होगी।

ED की कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब इसी मामले में भुल्लर की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में भी हाल में सुनवाई हुई थी। 15 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई चार सप्ताह के लिए टाल दी थी और कहा था कि महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद मामले पर आगे विचार किया जाएगा।

पंजाब पुलिस के पूर्व DIG हरचरण सिंह भुल्लर और कृष्णानु।

पंजाब पुलिस के पूर्व DIG हरचरण सिंह भुल्लर और कृष्णानु।

कृष्णानु तक कैसे पहुंची ED…

  • भुल्लर से जुड़े 11 ठिकानों पर छापेमारी: ईडी ने इसी साल अप्रैल में भुल्लर से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत पंजाब-चंडीगढ़ में कई ठिकानों पर कार्रवाई की थी। चंडीगढ़ के सेक्टर-40 स्थित भुल्लर के घर के अलावा लुधियाना, पटियाला, नाभा और जालंधर के ठिकाने शामिल थे। इस दौरान जांच एजेंसी ने कई दस्तावेज अपने कब्जे में लिए थे। अब ईडी की जांच का अगला फोकस कृष्णानु शारदा है। एजेंसी यह जानना चाहती है कि रिश्वत की रकम से जुड़े कथित लेनदेन और उससे जुड़े पैसों का आगे क्या इस्तेमाल हुआ।
  • 18 सितंबर को कोर्ट में पेश किया जाएगा कृष्णानु: ईडी के विशेष लोक अभियोजक ने PMLA कोर्ट में कृष्णानु का प्रोडक्शन वारंट जारी करने की मांग की है। कोर्ट ने आवेदन पर कृष्णानु को नोटिस जारी किया है। साथ ही उसे 18 सितंबर को कोर्ट के सामने पेश करने के निर्देश दिए हैं। कृष्णानु को बुड़ैल जेल से अदालत में लाया जाएगा।
  • सीबीआई ने 5 लाख लेते पकड़ा था: यह पूरा मामला मंडी गोबिंदगढ़ के कारोबारी आकाश बट्टा की शिकायत से शुरू हुआ था। CBI के अनुसार, उस समय रोपड़ रेंज के डीआईजी रहे हरचरण सिंह भुल्लर पर आरोप था कि उन्होंने कारोबारी से जुड़े एक मामले में राहत देने और पुलिस की ओर से कड़ी कार्रवाई नहीं करने के लिए कथित तौर पर कृष्णानु के जरिए 8 लाख रुपए की रिश्वत मांगी थी। सीबीआई ने शिकायत की गोपनीय जांच के दौरान कृष्णानु और भुल्लर के बीच बातचीत रिकॉर्ड की थी।
  • शिकायतकर्ता से 8 लाख रुपए लेने के लिए कहा: एजेंसी का दावा है कि एक बातचीत में भुल्लर ने कृष्णानु से शिकायतकर्ता से 8 लाख रुपए लेने के लिए कहा था। इसके बाद सीबीआई ने ट्रैप लगाया। 16 अक्टूबर 2025 को चंडीगढ़ में कृष्णानु को शिकायतकर्ता से कथित तौर पर 5 लाख रुपए लेते हुए पकड़ा गया। इसी कार्रवाई के बाद भुल्लर को भी गिरफ्तार किया गया था। CBI ने बाद में मामले में चार्जशीट भी दाखिल कर दी।

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ, जानिए…

  • जमानत देने के मामले में सख्त टिप्पणी: भुल्लर की नियमित जमानत याचिका पर 15 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय बेंच ने सुनवाई के दौरान जमानत देने के मामले में सख्त टिप्पणी की थी। बेंच में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे।
  • सुनवाई चार सप्ताह के लिए टाल दी: सुनवाई के दौरान CJI ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा था, “100% केस ऑफ डिसमिसल! आप इसे अभी खारिज करवाना चाहते हैं या बाद में?” हालांकि कोर्ट ने उसी समय जमानत याचिका खारिज नहीं की और सुनवाई चार सप्ताह के लिए टाल दी। कोर्ट ने संकेत दिया कि महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद जमानत याचिका पर आगे विचार किया जाएगा।
  • हाईकोर्ट से जमानत खारिज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचे: भुल्लर की ओर से पेश वकील ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि मामले में शिकायतकर्ता आकाश बट्टा और एक महत्वपूर्ण गवाह के बयान अभी दर्ज नहीं हुए हैं। बचाव पक्ष ने दो शैडो विटनेस के बयान दर्ज कराने की अनुमति भी मांगी थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद जमानत याचिका पर विचार करने का संकेत दिया और मामले को चार सप्ताह के लिए टाल दिया।
  • पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में नियमित जमानत मांगी: भुल्लर ने पहले पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में नियमित जमानत मांगी थी। हाईकोर्ट ने 10 अगस्त को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सुप्रीम कोर्ट में यह उनकी दूसरी जमानत याचिका थी। इससे पहले 10 अप्रैल को शीर्ष अदालत ने उनकी जमानत याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार किया था और कुछ परिस्थितियों में हाईकोर्ट जाने की छूट दी थी।