Published: Saturday, July 25, 2026, 18:35 [IST]
Dharmendra Pradhan Resignation: देश भर में NEET परीक्षा धांधली को लेकर भड़के आक्रोश और जंतर मंतर पर लगातार जारी प्रदर्शन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपना इस्तीफा सौंपना पड़ा। जंतर-मंतर पर हफ्ते भर से डटे 'कॉकरोच जनता पार्टी' के प्रदर्शनकारियों और लाखों छात्रों के भारी दबाव ने सरकार को बैकफुट पर ला दिया।
वहीं केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद एक बार फिर उन मंत्रियों की चर्चा शुरू हो गई है, जिन्हें विवाद के चलते मोदी सरकार से पद छोड़ना पड़ा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में धर्मेंद्र प्रधान से पहले पूर्व केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री एमजे अकबर ऐसे मंत्री थे, जिन्होंने गंभीर आरोपों के बाद अपने पद से इस्तीफा दिया था।
'मी टू' अभियान में लगे गंभीर आरोप
साल 2018 में देश में 'मी टू' अभियान तेज हुआ तो एमजे अकबर (MJ Akbar MeToo allegation) पर 16 से अधिक महिलाओं ने यौन उत्पीड़न और अनुचित व्यवहार के आरोप लगाए। आरोप लगाने वालों में कई महिला पत्रकार भी शामिल थीं। विपक्ष ने इस मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरा और अकबर से इस्तीफे की मांग तेज हो गई। हालांकि एमजे अकबर ने सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया और कहा कि वह अदालत में अपनी बेगुनाही साबित करेंगे।
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विवाद बढ़ने पर देना पड़ा इस्तीफा
लगातार बढ़ते राजनीतिक दबाव और विवाद के बीच एमजे अकबर (MJ Akbar Resignation) ने 17 अक्टूबर 2018 को विदेश राज्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे के बाद उन्होंने आरोप लगाने वाली एक पत्रकार के खिलाफ मानहानि का मुकदमा भी दायर किया था। उनके इस्तीफे को मोदी सरकार के पहले बड़े राजनीतिक विवादों में से एक माना गया। अब धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद एक बार फिर एमजे अकबर का नाम चर्चा में है, क्योंकि वह मोदी सरकार में विवाद के बाद पद छोड़ने वाले पहले केंद्रीय मंत्री थे।
पत्रकारिता से बनाई अलग पहचान
एमजे अकबर देश के जाने-माने वरिष्ठ पत्रकारों में गिने जाते रहे हैं। राजनीति में आने से पहले उन्होंने कई प्रतिष्ठित अखबारों और पत्रिकाओं का संपादन किया और मीडिया जगत में अपनी अलग पहचान बनाई। अपनी लेखनी और संपादकीय नेतृत्व के कारण वह लंबे समय तक राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित रहे। पत्रकारिता में उनकी पहचान एक प्रभावशाली संपादक और लेखक के रूप में रही, जिसके बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति की ओर कदम बढ़ाया।
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कांग्रेस से शुरू हुआ राजनीतिक सफर
एमजे अकबर ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस से की थी। वर्ष 1989 में वह पहली बार राजनीति में सक्रिय हुए और लोकसभा चुनाव भी लड़ा। हालांकि बाद के वर्षों में उनका कांग्रेस से मोहभंग हो गया। 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। बीजेपी में शामिल होने के बाद पार्टी नेतृत्व ने उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दीं और राष्ट्रीय राजनीति में उनकी भूमिका लगातार बढ़ती गई।
राज्यसभा पहुंचे और मोदी सरकार में बने मंत्री
बीजेपी में शामिल होने के बाद एमजे अकबर को मध्य प्रदेश से राज्यसभा भेजा गया। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले कार्यकाल में 5 जुलाई 2016 को उन्हें विदेश राज्यमंत्री बनाया गया। विदेश मंत्रालय में रहते हुए उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व किया। एक वरिष्ठ पत्रकार से केंद्रीय मंत्री बनने तक का उनका सफर काफी चर्चा में रहा और उन्हें सरकार का प्रमुख चेहरा माना जाता था।