Devshayani Ekadashi Vrat Katha In Hindi: आज की एकादशी की कथा, देवशयनी एकादशी की कहानी, आषाढ़ शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि व्रत कथा

Published on 25 जुल॰ 2026

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आज की एकादशी देवशयनी व्रत की कथा क्या है?

Devshayani Ekadashi Vrat Katha In Hindi: भगवान विष्णु को खुश करने के लिए हर साल बड़ी संख्या में भक्तजन आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवशयनी एकादशी का व्रत रखते हैं। द्रिक पंचांग की गणना के अनुसार, आज 25 जुलाई 2026 को ही देवशयनी एकादशी है। मान्यता है कि देवशयनी एकादशी व्रत के प्रभाव से बड़े से बड़े पाप नष्ट हो जाते हैं। साथ ही जीवन की तमाम समस्याएं दूर होने लगती हैं। हालांकि, कुछ लोग अपनी विशेष मनोकामना की पूर्ति के लिए भी देवशयनी एकादशी का व्रत रखते हैं और विष्णु जी की पूजा करते हैं।

गौरतलब है कि देवशयनी एकादशी व्रत की पूजा राजा मांधाता से जुड़ी कथा पढ़े बिना पूरी नहीं होती है। चलिए अब जानें देवशयनी एकादशी व्रत की कथा यानी कहानी के बारे में।

देवशयनी एकादशी व्रत की कथा

तीन साल से नहीं हुई बारिश

पौराणिक कथाओं के अनुसार, सतयुग में एक समय था, जब मांधाता नामक चक्रवर्ती सम्राट का राज था। एक बार उनके राज्य में तीन वर्ष तक बारिश नहीं हुई, जिसके कारण भयंकर अकाल पड़ गया। राज्य में धीरे-धीरे हर चीज की कमी होने लगी। इस कष्ट से मुक्ति पाने के लिए राजा मांधाता ने जंगल में कठिन तपस्या करने का फैसला किया।

ब्रह्माजी के पुत्र के पास पहुंचे राजा

वन में घूमते-घूमते राजा मांधाता एक दिन ब्रह्माजी के पुत्र अंगिरा ऋषि के आश्रम में पहुंचे और उनसे कहा 'मैं सभी प्रकार से धर्म का पालन करता हूं, लेकिन मेरे राज्य में अकाल खत्म ही नहीं हो रहा है। ऐसा क्यों हो रहा है, कृपया मुझे इस परेशानी का समाधान बताएं।' इस पर महर्षि अंगिरा ने बोला 'इस समय तुम सतयुग में हो, जिसे सब युगों में उत्तम माना जाता है। यहां पर एक छोटे से पाप का भी बड़ा भयंकर दंड मिलता है। इस युग में धर्म अपने चारों चरणों में फैला है। सतयुग में ब्राह्मण के अलावा किसी अन्य जाति के लोगों को तप करने का अधिकार नहीं है, लेकिन तुम्हारे राज्य में एक शूद्र तपस्या कर रहा है। उसी की वजह से राज्य में बारिश नहीं हो रही है। जब तक उस शूद्र को काल की प्राप्तिनहीं होगी, तब तक तुम्हारे राज्य में स्थिति ठीक नहीं होगी।'

एकादशी व्रत रखने की दी सलाह

इसके बाद मांधाता राजा बोले 'वो तो अपराधी नहीं है। ऐसे में मैं उसे कैसे मार सकता हूं। ये मुझसे नहीं होगा, इसलिए मुझे कोई और उपाय बताएं।' फिर महर्षि अंगिरा ने राजा को आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी का व्रत रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा इस व्रत के प्रभाव से बारिश अवश्य हो जाएगी।

राजा ने विधिपूर्वक रखा एकादशी का व्रत

महर्षि की बात का पालन करने के लिए राजा अपने राज्य में वापस लौटे और विधिपूर्वक इस एकादशी का व्रत रखा, जिसके कुछ समय बाद ही राज्य में मूसलधार बारिश हो गई। कहा जाता है कि इसी के बाद से आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी देवशयनी एकादशी व्रत को रखने की परंपरा शुरू हो गई।

डिस्क्लेमर: यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्‍स नाउ नवभारत इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है।

Nidhi Jain

निधि जैनauthor

निधि जैन Times Now नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के तौर पर जुड़ी हैं। इन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 4 साल से ज्यादा का अनुभव है। पढ़ने और लिखने के प्रति इनकी रुचि ही इन्हें जर्नलिज्म की ओर लेकर आई। निधि अब तक हेल्थ, लाइफस्टाइल, धर्म और आध्यात्मिक विषयों पर 4,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुकी हैं।

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