दिल्ली के मंत्री प्रवेश वर्मा ने वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग पूरी पारदर्शिता से काम कर रहा है और विपक्ष बेवजह लोगों को गुमराह कर रहा है।
नई दिल्ली। दिल्ली के मंत्री प्रवेश वर्मा ने मंगलवार को स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया का बचाव किया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग पूरी तरह से पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से काम कर रहा है। जिन वोटरों के दस्तावेजों या जानकारी में कोई कमी है, उन्हें नोटिस भेजकर जवाब देने का पूरा मौका दिया जा रहा है। मीडिया से बात करते हुए वर्मा ने बताया कि कई संगठन और विपक्षी पार्टियां बार-बार SIR प्रक्रिया पर सवाल उठा रही हैं। उन्होंने साफ किया कि अगर किसी के दस्तावेजों में कोई कमी मिलती है, तो उसे नोटिस भेजना एक बेहद सामान्य प्रक्रिया है। उन्होंने कहा,
कई संगठन और विपक्षी दल बार-बार SIR प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर रहे हैं। चुनाव आयोग उन सभी लोगों को नोटिस जारी करता है जिनकी जानकारी वोटर लिस्ट या दस्तावेजों से गायब होती है। अगर कागजातों में कोई कमी है, तो उनसे इस बारे में पूछा जाता है। यह एक बहुत ही सामान्य प्रक्रिया है।
वर्मा ने आगे बताया कि SIR प्रक्रिया को चुनौती देने वाली एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई है और इस पर जल्द सुनवाई होनी है। उन्होंने कहा,
लेकिन आम आदमी पार्टी (AAP), विपक्ष और उनसे जुड़े संगठन इस पर सवाल उठा रहे हैं। इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है जिस पर सुनवाई होनी है।
उन्होंने बताया कि दिल्ली में आम लोगों से लेकर VVIPs तक को SIR नोटिस भेजे गए हैं। वर्मा ने कहा कि जिन्हें लगता है कि इस प्रक्रिया में उनका नाम छूट गया है, उन्हें जवाब देने का मौका दिया गया है। वर्मा ने कहा,
दिल्ली में आम जनता और VVIPs दोनों को SIR नोटिस जारी किए गए हैं। चुनाव आयोग पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से काम कर रहा है। अगर किसी वोटर को लगता है कि SIR प्रक्रिया से उनका नाम छूट रहा है, तो उन्हें नोटिस का जवाब देने का मौका दिया जाता है।
वर्मा के मुताबिक, जिन लोगों को नोटिस मिला है, वे 30 सितंबर तक इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) को अपना जवाब सौंप सकते हैं। इसके बाद 29 अक्टूबर तक उनके जवाबों की जांच होगी और 4 नवंबर को फाइनल वोटर लिस्ट जारी कर दी जाएगी।
वर्मा ने यह भी साफ किया कि फाइनल लिस्ट आने के बाद भी अगर किसी का नाम गायब रहता है, तो वे तय प्रक्रिया के तहत अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। दिल्ली के मंत्री ने सुप्रीम कोर्ट में दायर उस याचिका का भी जिक्र किया जिसमें SIR प्रक्रिया को चुनौती दी गई है और बताया कि इस मामले पर सुनवाई होनी है।
विपक्ष से चुनाव आयोग के खिलाफ लोगों में अविश्वास न पैदा करने की अपील करते हुए, वर्मा ने AAP नेता अरविंद केजरीवाल और सौरभ भारद्वाज के साथ-साथ कांग्रेस और उनसे जुड़े NGOs का नाम लिया। उन्होंने कहा कि वे लोगों को ऐसी स्थिति में न धकेलें जहां उनका चुनाव आयोग से भरोसा ही उठ जाए। उन्होंने कहा,
मैं विपक्ष, अरविंद केजरीवाल, सौरभ भारद्वाज, AAP, कांग्रेस और SIR पर सवाल उठाने वाले उनसे जुड़े सभी NGOs से अपील करता हूं कि वे लोगों को ऐसी स्थिति में न ले जाएं जहां वे चुनाव आयोग पर भरोसा करना बंद कर दें। चुनाव आयोग पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से काम कर रहा है। आप लोग बातों को तोड़-मरोड़ कर पेश करते हैं और जनता से झूठ बोलते हैं।
इससे पहले, दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने रविवार को साफ किया था कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान कुछ वोटरों को भेजे गए नोटिस का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि उनका नाम काट दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि किसी भी वोटर को अपना पक्ष रखने का मौका दिए बिना और उचित आदेश पारित किए बिना उसका नाम नहीं हटाया जा सकता।
यह सफाई तब आई जब प्रिंट और सोशल मीडिया पर खबरें चल रही थीं कि राजधानी में SIR प्रक्रिया के तहत VIPs और चिन्हित वोटरों को नोटिस भेजे जा रहे हैं।