Delhi News: तेंदुआ तस्करी में दिल्ली का NGO भी शक के घेरे में, क्रूर तरीके से मारकर निकाली खाल

Published on 18 अग॰ 2026

मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान तक फैले तेंदुआ तस्करी के एक बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है। इस मामले में अब तक 9 तस्करों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए काम करने वाले दिल्ली के एक बड़े एनजीओ की भूमिका भी शक के घेरे में आ गई है।



संयुक्त कार्रवाई


यह खुलासा उत्तर प्रदेश वन विभाग, मध्य प्रदेश स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (एसटीएसएफ) और वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो के साझा ऑपरेशन में हुआ है। अब तक की कार्रवाई में कुल 10 तेंदुओं की खालें, कटे हुए सिर और अन्य वन्यजीव अवशेष बरामद किए गए हैं। गिरोह ने मुख्य रूप से मध्य प्रदेश के जंगलों को निशाना बनाया, जिनमें कूनो वाइल्डलाइफ डिवीजन (6), श्योपुर (2) और मुरैना के चंबल अभयारण्य (2) शामिल हैं।

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शिकार का बेहद क्रूर तरीका


पूछताछ में तस्करों ने शिकार के जिस तरीके का खुलासा किया है, वह बेहद अमानवीय और क्रूर है। तेंदुओं को पकड़ने के लिए पहले नायलॉन के जाल बिछाए जाते थे। जाल में फंसने के बाद उन्हें लाठियों से पीट-पीटकर मार डाला जाता था। मौत के बाद उनकी खाल उतार ली जाती थी। इसके अलावा सिर, हड्डियां, नाखून, दांत और मूंछें अलग कर ली जाती थीं। शिकार के बाद शव के बचे हुए हिस्सों को जंगल में ही गड्ढा खोदकर दफना दिया जाता था।

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दिल्ली का NGO शक के घेरे में


जांच के दौरान गिरोह के तार वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी संस्थाओं तक पहुंच गए हैं। गिरफ्तार मुख्य आरोपी भगवान सिंह उर्फ सलीम और उसका साथी वसीम कथित तौर पर पिछले 5 साल से दिल्ली के एक प्रतिष्ठित वन्यजीव संरक्षण एनजीओ से जुड़े हुए थे। आगरा से पकड़े गए इन आरोपियों के तार एनजीओ से जुड़ने के बाद, एसटीएसएफ ने सख्त कदम उठाते हुए संस्था के सीईओ को 17 अगस्त को शिवपुरी में जांच अधिकारी के समक्ष पेश होने का नोटिस जारी किया है।



कैसे हुआ खुलासा और आगे की जांच


इस पूरे नेटवर्क की भनक 23 जुलाई को तब लगी, जब आगरा-ग्वालियर हाईवे पर सैंया क्षेत्र के राजपूताना होटल में 4 संदिग्ध तस्करों को पकड़ा गया। उनकी निशानदेही पर ही खालें और अन्य अवशेष बरामद हुए। फिलहाल, एसटीएसएफ इस मामले की गहराई से जांच कर रही है ताकि शिकारियों से लेकर खाल के खरीदारों और अंतिम सप्लायर तक की पूरी चेन को जोड़ा जा सके। इसके साथ ही, जांच पूरी होने के बाद ही एनजीओ पर लगे आरोपों की भी अंतिम रूप से पुष्टि हो सकेगी।