'Delhi Metro बंद-हिरासत पर 13 अक्टूबर तक जवाब दे केंद्र', अफसरों पर अवमानना की तलवार! SC में क्या-क्या हुआ?

Published on 11 अक्टू॰ 2026

Time Updated: Sunday, October 11, 2026, 13:57 [IST]

Delhi CJP Protest Supreme Court Hearing: दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान मेट्रो स्टेशन बंद करने, इंटरनेट सेवाएं बाधित करने और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने रविवार (11 अक्टूबर) को सुनवाई की। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मेट्रो सेवाएं सामान्य रूप से चलनी चाहिए, इंटरनेट पर रोक नहीं होनी चाहिए और लोगों की आवाजाही बाधित नहीं की जानी चाहिए।

जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहन की स्पेशल बेंच ने केंद्र सरकार और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर मंगलवार (13 अक्टूबर) तक जवाब मांगा है। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि 9 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद 10 अक्टूबर को प्रदर्शन के दौरान प्रतिबंध लगाए गए। इस पर कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों से पूछा कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए? इस बीच, मजिस्ट्रेट कोर्ट ने CJP नेताओं अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को रिहा करने का आदेश दिया। तीनों करीब 23 घंटे पुलिस हिरासत में रहे थे। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में क्या-क्या हुआ?

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1-मेट्रो स्टेशन बंद करने पर DMRC से मांगा नक्शा

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) को ऐसा नक्शा पेश करने का निर्देश दिया, जिसमें प्रदर्शन के दौरान बंद और चालू रहे मेट्रो स्टेशनों की जानकारी हो। कोर्ट यह जानना चाहता है कि किन स्टेशनों पर सेवाएं रोकी गई थीं। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि 10 अक्टूबर रात 10 बजे तक सभी मेट्रो स्टेशन दोबारा खोल दिए गए थे। उन्होंने यह भी कहा कि इंटरनेट सेवाएं बहाल कर दी गई थीं।

2-इंटरनेट बंद करने और आवाजाही रोकने पर सवाल

याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में दलील दी कि 9 अक्टूबर को दिए गए निर्देशों के बावजूद प्रदर्शन के दिन मेट्रो और ट्रेन सेवाओं को लेकर प्रतिबंध लगाए गए। इंटरनेट बाधित करने और लोगों की आवाजाही रोकने पर भी आपत्ति जताई गई। कोर्ट ने सेवाओं को सामान्य बनाए रखने और लोगों की आवाजाही बाधित नहीं करने पर जोर दिया। केंद्र सरकार और संबंधित अधिकारियों को मंगलवार तक अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया गया है।

3-पुलिसकर्मियों के बैज नहीं लगाने पर भी सुप्रीम कोर्ट सख्त

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत नागरिकों को मिले अधिकार सुरक्षित हैं। बेंच ने कहा कि कानूनी नियमों के उल्लंघन, खासकर पुलिस अधिकारियों के ड्यूटी के दौरान बैज नहीं लगाने जैसी शिकायतों पर संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा जाना चाहिए। कोर्ट की इस टिप्पणी से साफ है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई के साथ-साथ नियमों के पालन को लेकर उठाए गए सवालों पर भी जवाबदेही तय करने पर जोर दिया जा रहा है।

4-अवमानना की कार्रवाई पर मांगा जवाब

याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि शनिवार को हुई कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के पहले के निर्देशों के विपरीत थी। इस पर बेंच ने केंद्र और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया और पूछा कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही क्यों नहीं शुरू की जानी चाहिए। हालांकि, अवमानना के आरोपों पर अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है। संबंधित अधिकारियों का जवाब मिलने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई तय होगी।

5-शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों को हिरासत में लेने पर रोक

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत प्रतिबंधित क्षेत्रों के बाहर शांतिपूर्ण और बिना हथियार के प्रदर्शन कर रहे लोगों को हिरासत में न लिया जाए। इस निर्देश का मकसद प्रतिबंधित क्षेत्र से बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई को रोकना है।

कोर्ट परिसर के आसपास धारा 163 के नोटिस हटाने का निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों से कहा कि उसके परिसर और आसपास BNSS की धारा 163 लागू होने की जानकारी देने वाले बोर्ड या नोटिस अब भी लगे हों, तो उन्हें हटा दिया जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट और अन्य अदालतों में आने-जाने वाले लोगों के मन में आवाजाही को लेकर कोई आशंका नहीं रहनी चाहिए।

6-बैरिकेड हटाने और आवाजाही बहाल करने की मांग

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने मांग की कि लोगों की आवाजाही तत्काल बहाल की जाए, बैरिकेड हटाए जाएं और मेट्रो सेवाएं सामान्य रूप से चलाई जाएं। उन्होंने कहा कि इसके लिए नोटिस जारी होने की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार नहीं किया जाना चाहिए।

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सरकार और याचिकाकर्ताओं की ओर से किसने पैरवी की?

मामले की सुनवाई जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहन की स्पेशल बेंच ने की। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस का पक्ष रखा। वहीं, याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, गोपाल शंकरनारायणन, मेनका गुरुस्वामी, संजय हेगड़े और शादान फरासत ने दलीलें रखीं।

क्या है पूरा मामला?

दिल्ली में 10 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किया था। पार्टी ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया को लेकर विरोध जताया था। प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई, बैरिकेडिंग, प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने और मेट्रो सेवाओं पर प्रतिबंध को लेकर विवाद खड़ा हुआ। इसके बाद इन कार्रवाइयों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गईं। अब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है। मंगलवार को होने वाली आगे की कार्यवाही में यह स्पष्ट हो सकता है कि अधिकारियों का पक्ष क्या है और कथित उल्लंघन के आरोपों पर कोर्ट क्या रुख अपनाता है।