Delhi High Court Jantar Mantar Hearing: जंतर-मंतर प्रदर्शन पर दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र और पुलिस से मांगा जवाब, CCTV फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश

Published on 22 जुल॰ 2026

Delhi High Court Jantar Mantar Hearing: दिल्ली उच्च न्यायालय ने जंतर-मंतर प्रदर्शन में पुलिस बल प्रयोग पर केंद्र तथा दिल्ली पुलिस से उत्तर याचना की है. न्यायालय ने घटना से जुड़ी समस्त सीसीटीवी एवं डिजिटल रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने का निर्देश दिया. अगली सुनवाई हेतु सितंबर तिथि निर्धारित है.

Delhi High Court Jantar Mantar Hearing: दिल्ली उच्च न्यायालय ने जंतर-मंतर प्रदर्शन में पुलिस बल प्रयोग पर केंद्र तथा दिल्ली पुलिस से उत्तर याचना की है. न्यायालय ने घटना से जुड़ी समस्त सीसीटीवी एवं डिजिटल रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने का निर्देश दिया. अगली सुनवाई हेतु सितंबर तिथि निर्धारित है.

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Photo: (ANI)

Delhi High Court Jantar Mantar Hearing: जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में दायर याचिकाओं पर सुनवाई हुई. मामले में प्रदर्शनकारियों की ओर से पुलिस पर जरूरत से ज्यादा बल इस्तेमाल करने और उनके साथ कथित तौर पर मारपीट करने के आरोप लगाए गए हैं. इस मामले को लेकर अदालत ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि प्रदर्शन के दौरान कई प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस ने कथित तौर पर सख्ती की. आरोप है कि पुलिस कार्रवाई में कई लोग घायल हुए. याचिकाकर्ताओं ने अदालत के सामने इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग भी रखी है.

डिजिटल साक्ष्यों एवं वीडियो रिकॉर्डिंग के संरक्षण का निर्देश

मामले में अदालत ने घटना से जुड़े CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग, बॉडी कैमरा फुटेज और दूसरे डिजिटल रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं. कोर्ट का यह निर्देश इसलिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि जांच के दौरान इन रिकॉर्डिंग से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि प्रदर्शन के दौरान वास्तव में क्या हुआ था और पुलिस की कार्रवाई किन परिस्थितियों में की गई.

अवर्दीधारियों की उपस्थिति एवं स्वतंत्र जाँच की अपेक्षा

याचिकाकर्ताओं की तरफ से यह भी आरोप लगाया गया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ पुलिसकर्मी बिना वर्दी और पहचान पत्र के मौजूद थे. याचिकाकर्ताओं ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या विशेष जांच दल से कराने की मांग की है.

प्रशासन तथा पुलिस तंत्र का पक्ष

वहीं, केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की ओर से इन आरोपों का विरोध किया गया. सरकार की तरफ से अदालत को बताया गया कि प्रदर्शन के दौरान स्थिति बिगड़ गई थी और भीड़ की तरफ से भी पुलिस पर हमला किया गया था. ऐसे में पुलिस को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई करनी पड़ी.

विधिक प्रक्रिया का अनुपालन एवं न्यायालय की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी साफ किया कि अगर कोई प्रदर्शन कानून के मुताबिक नहीं था या वहां स्थिति बिगड़ रही थी, तब भी पुलिस को कार्रवाई करते समय तय कानूनी प्रक्रिया और नियमों का पालन करना जरूरी है. अदालत ने फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों या सामने आए वीडियो की सत्यता पर कोई अंतिम राय नहीं दी है.

उत्तर प्रस्तुतिकरण एवं न्यायिक समीक्षा की प्रक्रिया

इस मामले में अब केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को अपना पक्ष अदालत के सामने रखना होगा. इसके बाद अदालत यह देखेगी कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई कानून के दायरे में थी या नहीं और क्या प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए आरोपों में प्रथम दृष्टया कोई आधार है.

नागरिक अधिकारों एवं विधि-व्यवस्था का संतुलन

जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शनों को लेकर यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राजधानी में प्रदर्शन के लिए तय जगहों पर पुलिस की भूमिका और प्रदर्शनकारियों के अधिकार दोनों ही अहम मुद्दे हैं. एक तरफ पुलिस की जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था बनाए रखने की है, तो दूसरी तरफ शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने वाले लोगों के अधिकारों की रक्षा करना भी जरूरी है.

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आगामी सुनवाई एवं भावी न्यायिक कार्यवाही

अदालत ने मामले से जुड़े सभी महत्वपूर्ण डिजिटल रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है. अब इस मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी. उस दौरान केंद्र और दिल्ली पुलिस की ओर से दाखिल किए जाने वाले जवाब और उपलब्ध कराए जाने वाले रिकॉर्ड के आधार पर आगे की सुनवाई होगी. फिलहाल अदालत ने सभी पक्षों को अपना पक्ष रखने का मौका दिया है और मामले में किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पूरी जानकारी सामने आने का इंतजार किया जा रहा है.