CWG 2026 में रिंग के 'किंग' बने भारतीय बॉक्सर, 10 मेडल पक्के; इस बड़े रिकॉर्ड का टूटना हुआ कन्फर्म

Published on 30 जुल॰ 2026

Commonwealth Games 2026: भारतीय मुक्केबाजों का बुधवार को राष्ट्रमंडल खेलों में शानदार प्रदर्शन जारी रहा जिसमें छह और मुक्केबाजों ने सेमीफाइनल में जगह बनाकर देश के लिए 10 पदक पक्के कर दिए।

Commonwealth Games 2026: भारतीय मुक्केबाजों का बुधवार 29 जुलाई को कॉमनवेल्थ गेम्स में शानदार प्रदर्शन जारी रहा, जिसमें छह और मुक्केबाजों ने सेमीफाइनल में जगह बनाकर देश के लिए 10 पदक पक्के कर दिए। इसके साथ ही भारत ने बर्मिंघम 2022 राष्ट्रमंडल खेलों में मुक्केबाजी में जीते गए कुल पदकों के अपने पिछले रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया। मुक्केबाजों ने एक कॉमनवेल्थ गेम्स में सबसे ज्यादा 7 पदक जीते थे।

अंकुश पंघाल (80 किलो), साक्षी चौधरी (51 किलो), अरूंधति चौधरी (70 किलो), सचिन सिवाच (60 किलो), नरेंदर बेरवाल (90 किलो से अधिक) और विश्व चैंपियन जैस्मीन लंबोरिया (57 किलो) बुधवार की जीत से लवलीना बोरगोहेन (75 किलो), प्रिया घंघास (60 किलो) , प्रीति पवार (54 किलो) और जादूमणि सिंह (पुरूष 55 किलो) के साथ अंतिम चार में पहुंचने वाले मुक्केबाज रहे।

बर्मिंघम में भारत ने मुक्केबाजी में जीते थे 7 पदक

इस उपलब्धि ने बर्मिंघम 2022 में भारत के मुक्केबाजी के कुल पदकों की संख्या को भी पीछे छोड़ दिया है, जिसमें देश ने (तीन स्वर्ण, एक रजत और तीन कांस्य) सात पदक जीते थे। 26 वर्ष की साक्षी ने 51 किलोवर्ग में उत्तरी आयरलैंड की कैटलिन फ्रायर्स को 5-0 से हराया। वहीं अरूंधति ने 70 किलोवर्ग के कठिन मुकाबले में न्यूजीलैंड की मोर्गन हेंडरसन को 3-1 से मात दी। पूर्व विश्व युवा चैम्पियन सिवाच ने पुरूषों के 60 किलोवर्ग के सेमीफाइनल में पहुंचकर कम से कम कांस्य पक्का कर लिया। उन्होंने बोत्स्वाना के ट्रेजर मोरेमी को सर्वसम्मति से लिये गए फैसले में 5-0 से हराया।

पिछले साल विश्व मुक्केबाजी कप फाइनल्स के रजत पदक विजेता अंकुश ने पुरूषों के 80 किलो सेमीफाइनल में सर्वसम्मति से सेशेल्स के जेड मिकोक को 5-0 से हराया। अंकुश ने शानदार डिफेंस और चुस्त आक्रमण से पहले ही राउंड से दबदबा बना लिया। दूसरे राउंड में भी वह हावी रहे। उनके लिये एक जज ने 30-26 और बाकी ने 30-27 का स्कोर दिया। बाद में एशियाई खेलों के कांस्य पदक विजेता नरेंदर भी पुरुषों के 90 किग्रा से अधिक किलोवर्ग के क्वार्टर फाइनल में समोआ के माइकल सेको को विभाजित फैसले में 3-2 से हराने में कामयाब रहे।

इस मुकाबल में रेफरी ने बार-बार दखल दिया और भारतीय मुक्केबाज के दो अंक काटे लेकिन नरेंदर ने सेको को दो बार 'स्टैंडिंग काउंट' के लिए मजबूर किया। जजों ने आखिरकार नरेंदर के पक्ष में 3-2 से फैसला सुनाया जिससे वह दिन में अंतिम चार में पहुंचने वाले पांचवें भारतीय मुक्केबाज बन गए। दिन के अंतिम मुकाबले में बर्मिंघम खेलों की कांस्य पदक विजेता जैस्मीन ने महिलाओं के 57 किग्रा वर्ग के क्वार्टरफाइनल में इंग्लैंड की एलिसे ग्लिन को करीबी मुकाबले में 4-1 से शिकस्त दी।

इससे पहले अपने कद का पूरा इस्तेमाल करते हुए साक्षी ने फ्रायर्स को जवाबी हमलों का मौका ही नहीं दिया। उन्होंने जीत के बाद कहा ,''उसकी रणनीति करीब से आक्रमण करने की थी जबकि मैं लंबी रेंज से मुक्के लगा रही थी जो मेरी ताकत है।''

आयरिश मुक्केबाज ने लगातार आक्रामक तेवर अपनाकर और धड़ाधड़ पंच मारकर साक्षी को परेशान करने की कोशिश की, लेकिन भारतीय मुक्केबाज ने संयम बनाए रखा। उन्होंने ज्यादातर हमलों से बचते हुए बेहतर और असरदार संयोजन के साथ जवाबी हमला किया।

फ्रायर्स के लगातार दबाव के बावजूद साक्षी ने शानदार फुटवर्क और रिंग स्किल का इस्तेमाल करते हुए दूरी को बखूबी नियंत्रित किया, शुरू से आखिर तक मुकाबले की रफ्तार अपने हिसाब से तय की और आसानी से जीत हासिल की। अगर साक्षी ने आसानी से जीत दर्ज की तो अरुंधति की राह उतनी आसान नहीं रही। न्यूजीलैंड की मुक्केबाज ने बार-बार अरुंधति को धक्का दिया, पकड़कर रोका और गिराने की कोशिश की।

इसके बावजूद अरुंधति ने संयम बनाए रखा। उन्होंने सही मौकों पर सटीक और अंक दिलाने वाले मुक्के जड़े। अरुंधति ने मुस्कुराते हुए कहा, ''वह मुक्केबाज से ज्यादा पहलवान लग रही थी। उसने मुझे कई बार गिराया। भारत में मुझे मजबूत मुक्केबाज़ माना जाता है, लेकिन आज ऐसा बिल्कुल नहीं लगा। ''

भारत के स्वर्ण पदक के प्रबल दावेदार और पूर्व विश्व युवा चैंपियन सचिन सिवाच ने मोरेमी के खिलाफ आसान जीत दर्ज की। शुरुआत में मुकाबला थोड़ा मुश्किल रहा, लेकिन इसके बाद सचिन ने शानदार हुक, सटीक जवाबी मुक्कों और बेहतरीन टाइमिंग के दम पर मुकाबले पर पूरी तरह पकड़ बना ली। सचिन ने कहा, ''जब शुरुआती दौर में ही मुश्किल प्रतिद्वंद्वी बाहर हो जाते हैं, तो आगे के मुकाबलों में आप ज्यादा खुलकर खेल पाते हैं। ''

अंकुश ने भी मिकॉक के खिलाफ एकतरफा जीत हासिल की। अंकुश की फुर्ती, शानदार फुटवर्क और मजबूत रक्षण के सामने उनके प्रतिद्वंद्वी ज्यादातर समय खाली पंच ही मारते रहे। पांचों जजों ने अंकुश के पक्ष में फैसला दिया। वहीं, नरेंदर को अपना पदक पक्का करने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ी। हेवीवेट क्वार्टरफाइनल बेहद संघर्षपूर्ण रहा और मुकाबले के दौरान रेफरी को कई बार हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने कहा, ''जब तक मजबूत प्रतिद्वंद्वी को हराकर पदक नहीं जीतते, तब तक उसका असली मजा नहीं आता। चेतावनी मिलने के बाद कोचों ने मुझसे कहा, 'करो या मरो'। इसके बाद मैंने पूरी ताकत झोंक दी।''