हरियाणा बिजली नियामक आयोग (HERC) द्वारा गुरुग्राम और नूंह जिलों के लिए निजी कंपनी इलेवन पावर को 25 वर्षों के लिए समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने के फैसले के खिलाफ भिवानी में बिजली कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन किया।
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बिजली के निजीकरण के फैसले के विरोध में और प्रदेश के सभी बिजली कर्मचारियों, किसानों व आम उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा के तत्वावधान में आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है।
मंगलवार को दशहरे के दिन भिवानी सर्कल के हर कैटेगरी के कर्मचारियों और इंजीनियरों ने सर्कल कार्यालय पर एकत्र होकर रोष प्रदर्शन किया तथा प्रदेश स्तरीय आह्वान पर सर्कल स्तर पर सरकार का पुतला फूंका। प्रदर्शन की शुरूआत स्थानीय बीटीएम रोड़ स्थित सर्कल ऑफिस से शुरू हुआ तथा बीटीएम चौक तक पहुंचा।

नेताओं के पुतले की शवयात्रा निकालते बिजली कर्मचारी।
सुरेंद्र यादव रहे मुख्य वक्ता
इसका नेतृत्व एचपीईए के जोन प्रधान कार्यकारी अभियंता संजय रंगा, एससी, एसटी व बीसी यूनियन से बिजेंद्र बराड़, एएचपीसी वर्कर यूनियन के राज्य उपाध्यक्ष राजेश झरवाई, एचएसईबी वर्कर्स यूनियन के राज्य सह सचिव राकेश बलौदा ने किया।
वहीं अध्यक्षता एचएसईबी वर्कर्ज यूनियन के सर्कल सचिव मनोज बल्लू बामला, ऑल हरियाणा पॉवर कारपोरेशन वर्कर्ज यूनियन के सर्कल सचिव अशोक गोयत, हरियाणा पॉवर इंजीनियर एसोसिएशन के प्रवक्ता नाारायण प्रकाश एसडीओ ने की। मुख्य वक्ता सांझा मोर्चा के राज्य नेता सुरेंद्र यादव रहे।

भिवानी में प्रदर्शन नारेबाजी करते बिजली कर्मचारी।
सीएम व केंद्रीय मंत्री का पुतला फूंका
इस दौरान प्रदर्शन करते हुए संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर कर्मचारियों ने भिवानी में हरियाणा के पूर्व सीएम और केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और एचईआरसी अध्यक्ष मुकेश गर्ग के पुतले फूंके। कर्मचारी नेताओं ने आरोप लगाया कि मुनाफा कमाने वाले उच्च-राजस्व वाले क्षेत्रों को निजी हाथों में सौंपकर सरकारी बिजली निगमों की कमर तोड़ने की गहरी साजिश रची जा रही है। दशहरे से ठीक एक दिन पहले लिया गया यह फैसला पूरी तरह से काला और जन-विरोधी है।

भिवानी में परदर्शन करते हुए बिजली कर्मचारी।
कल जलाएंगे एचईआरसी के आदेशों की प्रतियां
कर्मचारी नेताओं ने कहा कि आज नहीं लड़े तो कभी भी लड़ने लायक नहीं रहेंगे। यह लड़ाई केवल कर्मचारियों की पेंशन या सुविधाओं की नहीं, बल्कि आम जनता और किसानों को मिलने वाली सस्ती बिजली को बचाने की लड़ाई है। बिजली विभाग का निजीकरण समाज के गरीब और पिछड़े वर्गों के अधिकारों पर सीधा डाका है। मुनाफाखोरी के चक्कर में सरकारी तंत्र को खत्म करने की यह नीति किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
कर्मचारी नेताओं ने आगामी आंदोलनों की रूपरेखा स्पष्ट करते हुए बताया कि 21 अक्टूबर का हरियाणा बिजली नियामक आयोग (एचईआरसी) के आदेश की प्रतियां पूरे प्रदेश में जलाई जाएंगी। इसके उपरांत 22, 23 एवं 24 अक्टूबर को प्रदेश भर में लगातार 3 दिनों की पूर्ण हड़ताल रहेगी, जिससे बिजली सेवाएं ठप हो सकती हैं। वहीं 24 अक्टूबर को हड़ताल के तीसरे दिन आगे के आंदोलन और भावी रणनीति का बड़ा ऐलान किया जाएगा।