CJP Uttarakhand : सरकारी स्कूलों की बदहाली पर घिरी सरकार, शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत के इस्तीफे की मांग - Doon Horizon

Published on 21 सित॰ 2026

उत्तराखंड में 5 साल में 826 प्राइमरी स्कूलों के बंद होने पर सीजेपी ने सरकार को घेरा। 10 दिन में जिलावार रोडमैप न मिलने पर 2 अक्टूबर से देहरादून में बड़े आंदोलन की चेतावनी।

दून हॉराइज़न, देहरादून (21 सितंबर) : उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में प्राथमिक शिक्षा का बुनियादी ढांचा चरमराने का आरोप लगाते हुए सामाजिक-राजनीतिक संगठन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने पुष्कर सिंह धामी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संगठन ने राज्य में अपना ‘स्कूल ठीक करो अभियान’ शुरू करने का ऐलान किया है।

देहरादून में पत्रकारों से बात करते हुए नॉर्थ जोन कोऑर्डिनेटर श्रेष्ठ सिंह खेड़ा ने आरोप लगाया कि सूबे में बीते पांच सालों के दौरान 826 प्राथमिक स्कूल बंद (Government Schools Closed) हो चुके हैं। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि यदि शासन ने दस दिनों के भीतर ठोस कदम नहीं उठाए, तो 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती से राजधानी में व्यापक आंदोलन छेड़ा जाएगा।

संगठन ने राज्य के शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत और सरकार के समक्ष पांच प्रमुख सवाल रखे हैं। मांग की गई है कि बंद पड़े और खस्ताहाल विद्यालयों का आधिकारिक डेटा सार्वजनिक हो, शिक्षकों के रिक्त पदों का ब्योरा सामने आए और आधारभूत ढांचे को ठीक करने की स्पष्ट कार्ययोजना बने।

पहाड़ों में बुनियादी सुविधाओं का अकाल

श्रेष्ठ सिंह के मुताबिक, प्रदेश के करीब 270 सरकारी विद्यालयों में आज भी पीने का साफ पानी उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि सुदूर पर्वतीय जिलों में कई प्राथमिक पाठशालाएं केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रही हैं या फिर शिक्षकों की भारी कमी के कारण बंद होने की कगार पर पहुंच चुकी हैं।

हालात यह हैं कि कई ग्रामीण इलाकों में बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए रोजाना 4-4 किलोमीटर पैदल सफर तय करना पड़ता है। संगठन का तर्क है कि जब मंत्रियों और विधायकों के काफिले के लिए बजट की कोई कमी नहीं रहती, तो नौनिहालों के भविष्य के साथ यह अनदेखी क्यों हो रही है?

10 दिन की मोहलत, जिलेवार शिक्षा रोडमैप की मांग

सीजेपी ने मांग रखी है कि शिक्षा विभाग अगले 10 दिनों में एक ‘जिलावार शिक्षा रोडमैप’ पेश करे। इसमें शिक्षकों के खाली पदों को भरने, पेयजल, अलग बालक-बालिका शौचालय, बिजली, सुरक्षित छत और आवश्यक डेस्क आदि जुटाने की निश्चित समयसीमा तय की जाए।

इसके साथ ही दुर्गम घाटियों में रहने वाले छात्रों के लिए मिनी बस, स्कूल बस या स्थानीय परिवहन सहायता शुरू करने की मांग उठाई गई है, ताकि छात्र पैदल चलने की मजबूरी से बच सकें। चेताया गया है कि मांगें न मानने पर संगठन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर सड़कों पर उतरेगा।

सियासी समर्थन और विपक्ष का रुख

इस मुद्दे पर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस भी संगठन के समर्थन में उतर आया है। उत्तराखंड कांग्रेस के प्रवक्ता पंकज छेत्री ने कहा कि राज्य में सरकारी स्कूलों को बचाने और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग पूरी तरह जायज है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनहित और छात्रों के भविष्य से जुड़े इस मुद्दे पर दलगत राजनीति से ऊपर उठकर हर सकारात्मक पहल का समर्थन किया जाना चाहिए।

पलायन और घटती छात्रसंख्या के चलते पहले से ही उत्तराखंड के सीमांत जनपदों में क्लस्टर स्कूल मॉडल और मर्जिंग की नीति पर बहस छिड़ी हुई है, ऐसे में अब स्कूलों पर तालाबंदी के सवाल ने सियासी पारे को और गर्मा दिया है।