Published: Thursday, September 24, 2026, 11:57 [IST]
Abhijit Dipke Targets CEC Gyanesh Kumar: मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर चुनाव आयोग पर चल रही बहस अब और तेज हो गई है। 23 सितंबर को सामने आई द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अगुवाई वाले तीन सदस्यीय चुनाव आयोग में पिछले करीब 10 महीनों के दौरान कई फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर दो चुनाव आयुक्तों ने लिखित आपत्तियां दर्ज कराईं।
रिपोर्ट के मुताबिक, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कम से कम 14 बार अलग-अलग मुद्दों पर अपनी आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट सामने आने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए 24 सितंबर को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस करने का ऐलान किया है।
अभिजीत दीपके ने क्या कहा?
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर चुनाव आयोग को लेकर पोस्ट किया। उन्होंने "Election Commission Thik Karo" अभियान की बात कही और बताया कि 24 सितंबर को दिल्ली में जरूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस की जाएगी। अपने पोस्ट के आखिर में उन्होंने ज्ञानेश कुमार को संबोधित करते हुए "Gyanesh, it's done bro" लिखा। CJP ने बताया है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस दोपहर 12 बजे दिल्ली में होगी।
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महुआ मोइत्रा ने भी किया पोस्ट
अभिजीत दीपके से पहले TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने भी एक्स पर चुनाव आयोग और ज्ञानेश कुमार को लेकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि विपक्ष की राजनीतिक पार्टियों और CJP के सामने अब ज्ञानेश कुमार को हटाने का एजेंडा है। उन्होंने अपने पोस्ट में कहा कि उन्हें अदालतों पर भरोसा नहीं है और वह खुद तथा भारत के युवाओं पर भरोसा करेंगी। यह उनका राजनीतिक बयान है।
आशुतोष रांका और सौरव दास भी दिल्ली जाएंगे
CJP से जुड़े आशुतोष रांका ने भी सोशल मीडिया पर बताया कि उन्होंने और सौरव दास ने 24 सितंबर के लिए पहले से तय कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं। उनके मुताबिक, दोनों तुरंत दिल्ली जाएंगे और दोपहर 12 बजे होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल होंगे।
CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि संगठन अब चुनाव आयोग के कामकाज और लोगों के वोट देने के अधिकार से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देगा।
रिपोर्ट में 14 आपत्तियों का दावा
द इंडियन एक्सप्रेस की 23 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों पर आपत्ति दर्ज की। इनमें नए मतदाताओं को जोड़ने, मतदाता सूची से नाम हटाने और हटाए गए नामों को फिर से जोड़ने से जुड़े मामले शामिल बताए गए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, एक लिखित आपत्ति में संधू ने एक कार्रवाई को "अनधिकृत और गैरकानूनी" बताया था। दोनों आयुक्तों ने नए मतदाताओं के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 में किए गए बदलाव पर भी सवाल उठाए।
वोटर डेटा को लेकर भी सवाल
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने मतदाता डेटा और उसे संभालने वाली डिजिटल व्यवस्था को लेकर चिंता जताई। उनका सवाल था कि वोटर डेटाबेस को दिल्ली में केंद्रीकृत करने से राज्यों में काम करने वाले अधिकारियों की भूमिका प्रभावित हो सकती है। इस मुद्दे को लेकर दोनों आयुक्तों ने कैबिनेट सचिव को भी अलग-अलग पत्र लिखे थे।
चुनाव आयोग का पक्ष भी सामने आया
इस पूरे विवाद पर चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों ने रिपोर्ट में बताए गए मतभेद को कम करके बताया है। द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, आयोग ने 14 नोट्स के अस्तित्व, तारीख या सामग्री से इनकार नहीं किया, लेकिन उन्हें "सुझाव" बताया और कहा कि पिछले एक साल में आयोग के सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
ऐसे में अब 24 सितंबर को दिल्ली में होने वाली CJP की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर नजर रहेगी, जहां संगठन चुनाव आयोग से जुड़े इन मुद्दों पर अपनी बात रखेगा।
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