Chatra: महिला थाना प्रभारी के घर बाल-मजदूरी का मामला गरमाया, SP से मां ने की बेटी वापस दिलाने की गुहार

Published on 26 अग॰ 2026

Chatra: नाबालिग बच्ची को महिला थाना प्रभारी के घर से कथित रूप से रेस्क्यू कर बालिका गृह में रखे जाने का मामला अब तूल पकड़ने लगा है. बच्ची की मां ने चतरा के पुलिस अधीक्षक को आवेदन देकर अपनी बेटी को वापस दिलाने तथा पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है.

 
आवेदन के मुताबिक, महिला थाना प्रभारी फिरदोस नाज के घर में बच्ची के रहने तथा बाद में वहां से निकाले जाने से संबंधित घटनाक्रम का उल्लेख किया गया है. शिकायतकर्ता महिला के अनुसार वह महिला थाना प्रभारी के घर में घरेलू काम करती थी. इसी दौरान उसकी नाबालिग बेटी भी उसके साथ रहने लगी थी. आवेदन में कहा गया है कि बच्ची वहां घरेलू काम नहीं करती थी और उसे मां के साथ रहने की अनुमति थी. 

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आवेदन के अनुसार 23 अगस्त की शाम करीब सात बजे शिकायतकर्ता को फोन पर अपनी बेटी के संबंध में जानकारी मिली. इसके बाद उसने मामले की जानकारी लेने का प्रयास किया. शिकायत में बताया गया है कि बाद में बच्ची के किसी अन्य स्थान पर होने की जानकारी मिलने पर उसे वहां से लाकर महिला थाना प्रभारी के घर पर छोड़े जाने की बात सामने आई. 


शिकायतकर्ता के आवेदन में आरोप लगाया गया है कि इसके बाद कुछ लोग महिला थाना प्रभारी के घर पहुंचे और बच्ची को वहां देखकर उसे अपने साथ ले जाने लगे. इसी घटनाक्रम में बच्ची को कथित रूप से घर से बाहर निकाले जाने की बात कही गई है. 


शिकायतकर्ता का आरोप है कि बाद में बाल कल्याण समिति के दो सदस्यों द्वारा बच्ची को कथित रूप से रेस्क्यू कर संरक्षण में लिया गया और उसे बालिका गृह में रखा गया. हालांकि उपलब्ध आवेदन में रेस्क्यू करने वाले सदस्यों के नाम अथवा कार्रवाई की विस्तृत प्रक्रिया का स्पष्ट उल्लेख नहीं है. आवेदन के अनुसार 24 अगस्त को शिकायतकर्ता अपनी बेटी से मिलने संबंधित बाल संरक्षण संस्था पहुंची.


शिकायत में कहा गया है कि शुरुआत में उसे बच्ची से मिलने में परेशानी हुई और बाद में शाम करीब पांच बजे उसे अपनी बेटी से मिलने का अवसर मिला. महिला का आरोप है कि वह अपनी बेटी को अपने साथ घर ले जाना चाहती थी, लेकिन उसे बच्ची को साथ ले जाने की अनुमति नहीं दी गई.

आवेदन में यह भी कहा गया है कि बच्ची इस पूरे घटनाक्रम से काफी भयभीत है. शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि उसकी बेटी को उसकी इच्छा के विरुद्ध उससे अलग किया गया है. उसने पुलिस अधीक्षक से पूरे मामले की जांच कराने, बच्ची की स्थिति एवं उसके संरक्षण में लिए जाने की प्रक्रिया की जांच करने तथा बच्ची को उसके सुपुर्द करने की मांग की है. 


मामले में महिला थाना प्रभारी फिरदोस नाज का नाम शिकायत में आया है. शिकायतकर्ता ने उनके घर में बच्ची के रहने और बाद की घटनाओं को लेकर जांच की मांग की है. वहीं बच्ची को सीडब्ल्यूसी के माध्यम से संरक्षण में लिए जाने की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में रखने की मांग की गई है.

 
मामले में लगाए गए आरोप शिकायतकर्ता के आवेदन पर आधारित हैं. आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. संबंधित महिला थाना प्रभारी, सीडब्ल्यूसी अथवा रेस्क्यू में शामिल सदस्यों का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी. नाबालिग बच्ची और उसकी मां की पहचान सार्वजनिक नहीं की जा रही है. जेजे एक्ट की धारा 74 के अनुसार बच्चे की पहचान उजागर नहीं किया जा सकता.

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