मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी समूहों का विरोध प्रदर्शन अब देश के कई हिस्सों तक पहुंच गया है। 25 सितंबर 2026 को कांग्रेस ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर देशभर में प्रदर्शन किया। पार्टी की ओर से राज्य इकाइयों को चुनाव आयोग के कार्यालयों तक मार्च निकालने का निर्देश दिया गया था। प्रदर्शनकारियों ने CEC के इस्तीफे और हटाए जाने की मांग की।
दिल्ली में भारी बैरिकेडिंग, प्रदर्शनकारियों को रोकने की तैयारी
दिल्ली में प्रदर्शन को देखते हुए चुनाव आयोग के कार्यालय और जंतर-मंतर के आसपास सुरक्षा बढ़ाई गई। जंतर-मंतर के प्रवेश मार्गों पर कई स्तर की बैरिकेडिंग की गई और पुलिस की तैनाती बढ़ाई गई। भारतीय युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने भी प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन के दौरान कुछ जगहों पर कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की खबर है।
असम में गौरव गोगोई समेत कई नेता हिरासत में
असम में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई और पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। प्रदर्शनकारी आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें रोक दिया।
पटना और चंडीगढ़ में भी पानी की बौछार
प्रदर्शन का असर बिहार और पंजाब-चंडीगढ़ में भी दिखाई दिया। पटना में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मार्च निकालकर CEC के खिलाफ नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने पानी की बौछार का इस्तेमाल किया। चंडीगढ़ में भी प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।
कांग्रेस की क्या मांग है?
कांग्रेस ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और पद से हटाने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि SIR और मतदाता सूची से जुड़े मामलों में पारदर्शिता होनी चाहिए और संबंधित फैसलों की स्वतंत्र समीक्षा की जानी चाहिए। कांग्रेस ने राज्य स्तर पर 25 सितंबर को प्रदर्शन के अलावा जिला कांग्रेस कमेटियों को 28 सितंबर को जिला कलेक्टर कार्यालयों तक मार्च निकालने का भी निर्देश दिया है।
CJP ने भी दिया था 48 घंटे का अल्टीमेटम
इस पूरे विवाद के बीच CJP (Cockroach Janta Party) ने भी CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की थी। संगठन ने 24 सितंबर को 48 घंटे का समय देते हुए कहा था कि मांग पूरी नहीं होने पर देशव्यापी आंदोलन किया जाएगा। CJP ने SIR को लेकर भी अपनी आपत्तियां उठाई हैं।
इसके बाद CJP ने देशव्यापी “Election Commission Thik Karo” अभियान शुरू करने का ऐलान किया।
विवाद की जड़ में क्या है SIR?
SIR यानी Special Intensive Revision मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण की प्रक्रिया है। इसे लेकर विपक्षी दलों की ओर से मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े कई सवाल उठाए जा रहे हैं।
कांग्रेस का आरोप है कि इस प्रक्रिया से मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं और उसने चुनाव आयोग के फैसलों की स्वतंत्र जांच की मांग की है। वहीं चुनाव आयोग की ओर से कहा गया है कि आयोग के भीतर अलग-अलग राय होना उसकी विचार-विमर्श प्रक्रिया का हिस्सा है।
अब आगे क्या?
25 सितंबर के प्रदर्शनों के बाद यह विवाद और तेज हो गया है। कांग्रेस ने राज्य और जिला स्तर पर आंदोलन का कार्यक्रम रखा है, जबकि CJP भी अपने अलग अभियान की घोषणा कर चुका है।
फिलहाल मुख्य मुद्दे SIR, मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्ष की आपत्तियां हैं। इन आरोपों और मांगों पर चुनाव आयोग तथा अन्य राजनीतिक पक्षों की प्रतिक्रियाएं भी इस विवाद का अहम हिस्सा बनी हुई हैं।