नई दिल्ली12 मिनट पहले
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) की थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।
यह पॉलिसी मौजूदा 2026-27 सत्र से लागू कर दी गई है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच अब इस मामले में बुधवार को सुनवाई करेगी।
याचिकाकर्ताओं ने अपनी अपील में कहा कि नई पॉलिसी के अनुसार, छात्रों को दो भारतीय भाषाएं पढ़नी होंगी। उन्हें वे भाषाएं छोड़नी पड़ेंगी, जिन्हें वे क्लास 5 से लगातार पढ़ रहे हैं।
इसके अलावा इसमें अंग्रेजी को 'गैर-मूल' भाषा माना गया। साथ ही मूल भाषाओं के लिए शिक्षकों और पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता पर चिंता जताई।
CBSE ने 15 मई को एकेडमिक सेशन 2026-27 से थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू करने का सर्कुलर जारी किया था।

कोर्ट रूम LIVE; न तो किताबें हैं और न ही टीचर
याचिकाकर्ताओं की तरफ से सीनियर एडवोकेट आनंद ग्रोवर, सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी और गोपाल शंकरनारायणन ने पैरवी की।
- सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी: कक्षा 9 के एक छात्र, जो अब तक फ्रेंच पढ़ रहा है, कहा जाता है कि वह तीसरी भाषा चुने और अप्रैल में परीक्षा दे। जब तक आप इंटरनल असेसमेंट पास नहीं करते, आप कक्षा 9 के किसी छात्र से यह कैसे कह सकते हैं कि तमिल सीखना शुरू करे।
- गोपाल शंकरनारायणन: थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू करने पर रोक लगनी चाहिए, क्योंकि स्कूलों के पास न तो किताबें हैं और न ही टीचर। कई भारतीय भाषाओं को पढ़ाने की जरूरत होने के बावजूद NCERT की वेबसाइट पर सिर्फ तीन किताबें उपलब्ध थीं।
- गोपाल शंकरनारायणन: अगर स्कूलों को अचानक भाषा के विकल्प बदलने के लिए मजबूर किया गया तो टीचर अपनी नौकरी खो सकते हैं।
- CJI सूर्य कांत: भाषा सीखना कभी बेकार नहीं जाता।
- शंकरनारायणन: इसे लागू करने की वजह से टीचरों को नौकरी से निकाला जा सकता है।
- CJI सूर्य कांत: अगर उन्हें निकाला जाता है, तो हम उन्हें वापस नौकरी पर रखवा सकते हैं।

थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी पर सरकार का यूटर्न
CBSE ने थ्री लैंग्वेज पॉलिसी पर 6 जून को यूटर्न लिया और नई गाइडलाइन जारी की थी। इसके मुताबिक, इस साल 10वीं में पढ़ रहे छात्रों को तीसरी भाषा की परीक्षा नहीं देनी होगी।
7वीं, 8वीं और 9वीं के वे छात्र, जिन्होंने पहले से दो विदेशी भाषाएं चुनी हैं, वे अपनी वही भाषाएं जारी रख सकेंगे। हालांकि, उन्हें इसके साथ एक भारतीय भाषा भी पढ़नी होगी।
इन छात्रों को 10वीं में आने पर तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी। CBSE के इस फैसले से 50 लाख छात्र-छात्राओं को राहत मिली है।
CBSE की नई गाइडलाइन का सब कुछ जो आपका जानना जरूरी-
- वर्तमान कक्षा 10: सत्र 2026-27 के लिए कोई बदलाव नहीं किया गया है। छात्र पहले की तरह केवल दो भाषाओं के साथ ही बोर्ड परीक्षा देंगे। तीसरी भाषा न पढ़नी होगी और न ही उसकी बोर्ड परीक्षा देनी होगी।
- वर्तमान कक्षा 9 : इस बैच के छात्रों को 3 भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें कम से कम 2 भारतीय भाषाएं जरूरी होंगी। हालांकि, जब ये छात्र अगले साल क्लास 10 में पहुंचेंगे, तब तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं होगी। तीसरी भाषा का मूल्यांकन स्कूल स्तर पर किया जाएगा।
- वर्तमान कक्षा 7 और 8: इन छात्रों के लिए भी यही व्यवस्था रहेगी। तीसरी भाषा पढ़नी होगी, लेकिन 10वीं बोर्ड में उसकी परीक्षा नहीं होगी। मूल्यांकन स्कूल करेगा।
- वर्तमान कक्षा 6: यही पहला बैच होगा, जिस पर थ्री लैंग्वेज पॉलिसी पूरी तरह लागू होगी। इन छात्रों को कक्षा छह से 3 भाषाएं पढ़नी होंगी और जब ये कक्षा 10 में पहुंचेंगे, तब तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा भी देनी होगी।

34 साल बाद नई शिक्षा नीति 2020 लाई गई
नई शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) को भारत सरकार ने 29 जुलाई, 2020 को मंजूरी दी थी। यह 34 साल बाद भारत की शिक्षा नीति में एक बड़ा बदलाव है। इससे पिछली नीति 1986 में बनाई गई थी, जिसे 1992 में अपडेट किया गया था। इसका उद्देश्य भारत की शिक्षा प्रणाली को 21वीं सदी की जरूरतों के अनुसार ढालना है, ताकि छात्र व्यावहारिक ज्ञान मिले और वे स्किल सीखें।
नई शिक्षा नीति लागू करने के लिए केंद्र ने 2030 तक का लक्ष्य रखा है। शिक्षा संविधान में समवर्ती सूची का विषय है, जिसमें राज्य और केंद्र सरकार दोनों का अधिकार होता है। इसलिए यह जरूरी नहीं कि राज्य सरकारें इसे पूरी तरह अप्लाई करें। टकराव होने पर दोनों पक्षों को आम सहमति से विवाद सुलझाने का सुझाव दिया गया है।

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CBSE की थ्री लैंग्वेज पॉलिसी को शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में 19 लोगों के एक ग्रुप ने चुनौती दी। इनमें स्टूडेंट्स, पेरेंट्स और टीचर्स शामिल हैं।
ये याचिका क्लास 9वीं में थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू किए जाने के विरोध दायर की गई। इसके खिलाफ SC अगले हफ्ते सुनवाई करेगा। CBSE ने 15 मई को एकेडमिक सेशन 2026-27 से थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू करने का सर्कुलर जारी किया था। पूरी खबर पढ़ें…
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