CBI कोर्ट का बड़ा फैसला: रेलवे के गुड्स क्लर्क को रिश्वतखोरी मामले में 4 साल की सजा, रंगे हाथों पकड़ा

Published on 31 जुल॰ 2026

रिश्वतखोरी के एक मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने उत्तर प्रदेश के रायबरेली स्थित दरियापुर जंक्शन रेलवे स्टेशन के तत्कालीन गुड्स क्लर्क दुर्गेश बहादुर सिंह को दोषी ठहराते हुए चार वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है.

रिश्वतखोरी के एक मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने उत्तर प्रदेश के रायबरेली स्थित दरियापुर जंक्शन रेलवे स्टेशन के तत्कालीन गुड्स क्लर्क दुर्गेश बहादुर सिंह को दोषी ठहराते हुए चार वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है.

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रिश्वतखोरी के एक मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने उत्तर प्रदेश के रायबरेली स्थित दरियापुर जंक्शन रेलवे स्टेशन के तत्कालीन गुड्स क्लर्क दुर्गेश बहादुर सिंह को दोषी ठहराते हुए चार वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है. अदालत ने आरोपी पर 10,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है. यह फैसला 30 जुलाई 2026 को सीबीआई की विशेष अदालत, लखनऊ ने सुनाया.

रेलवे ने 1.26 लाख रुपये का डिमरेज शुल्क लगाया

सीबीआई के अनुसार, इस मामले की शुरुआत 13 अक्टूबर 2017 को दर्ज की गई शिकायत से हुई थी. शिकायत एम/एस आर. डी. सीमेंट इंडस्ट्रीज़ प्राइवेट लिमिटेड, लखनऊ के निदेशक ने की थी. शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कंपनी द्वारा निर्धारित समय के भीतर रेलवे रैक से कच्चा माल नहीं उतार पाने के कारण रेलवे ने 1.26 लाख रुपये का डिमरेज शुल्क लगाया था.

7,200 रुपये अवैध रिश्वत लेने पर सहमति

आरोप है कि इस डिमरेज शुल्क को काफी कम करने के बदले तत्कालीन गुड्स क्लर्क दुर्गेश बहादुर सिंह ने 60 हजार रुपये रिश्वत की मांग की. बाद में बातचीत के दौरान आरोपी ने डिमरेज शुल्क घटाकर 37,800 रुपये करने और इसके बदले 7,200 रुपये अवैध रिश्वत लेने पर सहमति जताई. शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने जाल बिछाया और आरोपी को 7,200 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया. ट्रैप कार्रवाई के दौरान सीबीआई ने रिश्वत की राशि भी बरामद की.

10 हजार रुपये के जुर्माने की सजा

जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने 30 नवंबर 2017 को आरोपी लोक सेवक के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया. मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पर्याप्त साक्ष्य और गवाह पेश किए, जिसके आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए चार वर्ष के कारावास और 10 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई. सीबीआई ने कहा कि यह फैसला सरकारी सेवाओं में भ्रष्टाचार के खिलाफ एजेंसी की कार्रवाई को मजबूत करता है और रिश्वतखोरी के मामलों में दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई का संदेश देता है.

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