BRICS की बढ़ती ताकत से घबराया अमेरिका! रूस पर बैन-टैरिफ बढ़ाने को लेकर संसद में प्रस्ताव, भारत का भी जिक्र

Published on 15 सित॰ 2026

BRICS की बढ़ती ताकत से घबराया अमेरिका! रूस पर बैन-टैरिफ बढ़ाने को लेकर संसद में प्रस्ताव, भारत का भी जिक्र

क्या रूस पर भारी टैक्स लगाने जा रहा अमेरिका?

अमेरिकी सांसदों ने रूस पर प्रतिबंध लगाने से जुड़े बिल में बदलाव के लिए संशोधन प्रस्ताव पेश किया है. इसमें से एक प्रस्ताव में भारत समेत रूस के सबसे बड़े तेल व्यापारिक साझेदारों पर 100% ड्यूटी लगाने की बात कही गई है, जबकि दूसरे प्रस्ताव में टैरिफ के प्रावधान को पूरी तरह हटाने की मांग की गई है.

पिछले महीने अमेरिकी सीनेट में 86 और 11 वोटों के अंतर से पास हुआ ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट’ अब हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के पास है. इस पर अगले कुछ दिनों में फैसला लेना है. 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले अमेरिकी सदन के जल्दी अवकाश पर जाने से पहले इसके पास काम करने के लिए महज 4 दिन बचे हैं. विधेयक में एक संशोधन पेश किया है जिसमें भारत समेत रूस के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के नाम कानून में शामिल करने की मांग की गई है.

100% टैरिफ लगाने का अधिकार देने का प्रस्ताव

इस बिल का मकसद रूस की अगुवाई और ऊर्जा क्षेत्र के साथ-साथ उन जहाजों के शैडो फ्लीट यानी सीक्रेट बेड़े पर पाबंदी लगानी है, जिनके बारे में अमेरिका का दावा है कि वे मॉस्को को तेल की डिलीवरी पर लगे पाबंदियों से बचने में मदद करते हैं.

वाशिंगटन का मानना ​​है कि रूस का कच्चा तेल व्यापार यूक्रेन के खिलाफ जंग के लिए फंड जुटाने में मदद कर रहा है. इस बिल के जरिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चीन और भारत समेत रूस के शीर्ष तेल व्यापारिक साझेदारों पर फुल 100% टैरिफ लगाने का अधिकार देने का भी प्रस्ताव रखा गया है.

भारत और चीन ही नहीं कई और देशों के भी नाम

डेमोक्रेटिक कांग्रेसी स्टेनी होयर की ओर से पेश किए गए एक संशोधन में चीन और भारत के अलावा तुर्की, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाक गणराज्य, यूएई, सिंगापुर, कजाकिस्तान और किर्गिज गणराज्य का नाम स्पष्ट तौर पर लिया गया है, इन देशों पर 100 फीसदी ड्यूटी लगाई जा सकती है. पिछले महीने 7 अगस्त को सीनेट से पास किए गए बिल में रूस के व्यापारिक साझेदारों का नाम नहीं लिया गया, लेकिन मात्रा के हिसाब से तेल और गैस के 5 सबसे बड़े आयातकों का जिक्र किया गया था.

डेमोक्रेटिक कांग्रेसी ग्रेगरी मीक्स, जो राष्ट्रपति ट्रंप को टैरिफ लगाने के व्यापक अधिकार देने का विरोध करते हैं, ने सेक्शन 113 को पूरी तरह खत्म करने के लिए एक संशोधन पेश किया है. इस सेक्शन से राष्ट्रपति को रूस के व्यापारिक साझेदारों पर व्यापक सेकेंडरी टैरिफ लगाने का अधिकार मिल जाएगा. ग्रेगरा मीक्स के संशोधन के 3 सह-प्रायोजक भी हैं.

राष्ट्रपति के पास भेजने से पहले पास होना जरूरी

मीक्स ने सदन में एक और संशोधन भी पेश किया है ताकि राष्ट्रपति किसी विदेशी व्यक्ति पर लगे प्रतिबंधों को 90 दिनों के लिए हटा सकें (साथ ही इसे आगे 90-दिनों के लिए आगे बढ़ाया जा सके), अगर यह “अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अहम” हो. इसके अलावा, उन्होंने रक्षा सामग्री और सेवाओं की खरीद के लिए यूक्रेन को 15 अरब डॉलर का सीधा कर्ज देने का अधिकार देने वाला एक संशोधन भी प्रस्तावित किया है.

हाउस रूल्स कमेटी ने सोमवार को रूस प्रतिबंध कानून (Russia sanctions act public) में किए गए संशोधनों को सार्वजनिक कर दिया. अब राष्ट्रपति ट्रंप के हस्ताक्षर के लिए बिल भेजे जाने से पहले हाउस में इसे पास किया जाना बाकी है. ऐसे में, हालिया संशोधनों ने इस बात पर बहस छेड़ दी है कि क्या भारत समेत उन देशों पर संभावित टैरिफ लग सकते हैं, या फिर इस अधिकार को पूरी तरह खत्म कर दिया जाए, और साथ ही यूक्रेन के लिए छूट के प्रावधान तथा सीधे लोन देने की व्यवस्था जोड़ी जाए.

सुरेन्द्र कुमार वर्मा

सुरेन्द्र कुमार वर्मा

पत्रकारिता जगत में पिछले डेढ़ दशक से भी लंबे समय से सक्रिय हूं. अखबारों की दुनिया से होते हुए मैं डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आया. अभी टीवी9 भारतवर्ष के साथ जुड़ा हुआ हूं. शुरुआत हरिभूमि के साथ की. फिर दैनिक जागरण गया और इसके बाद जागरण.कॉम के जरिए डिजिटल की दुनिया में आया. यहां से मैं अमर उजाला की डिजिटल टीम के साथ जुड़ा रहा. फिर इंडिया टुडे ग्रुप से नाता जुड़ा. न्यूजफ्लिक्स में रहने के बाद आजतक डॉट इन में आया. इंडिया टुडे ग्रुप में 5 साल तक  रहने के बाद इसे अलविदा कहा. फिर अपना कारवां टीवी9 के साथ जुड़ गया. अभी टीवी9 के साथ पत्रकारिता के लिए अपनी सेवाएं दे रहा हूं. मैं राजनीति, खेल और मनोरंजन समेत लगभग हर विधा में लिखता हूं. सोशल मीडिया पर 50-50 का नाता है. फेसबुक पर ज्यादा जाना नहीं हो पाता है, लेकिन पहले ट्विटर और अब X पर सक्रिय रहता हूं. परवरिश गोरखपुर में हुई, लेकिन कर्मस्थली अभी नोएडा बना हुआ है.

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