कौन हैं BJP मंत्री की भतीजी नीला विखे पाटिल? बनीं स्वीडन की सांसद, दादा थे केंद्रीय मंत्री,फैमिली बैकग्राउंड

Published on 20 सित॰ 2026

Time Published: Sunday, September 20, 2026, 8:47 [IST]

Nila Vikhe Patil Profile: महाराष्ट्र के बीजेपी नेता और मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल के परिवार का नाम अब स्वीडन की राजनीति से भी जुड़ गया है। उनकी भतीजी नीला विखे पाटिल स्वीडन की संसद के लिए चुनी गई हैं। ग्रीन पार्टी की नेता नीला ने स्टॉकहोम सिटी से चुनाव जीता है।

उनका परिवार महाराष्ट्र की राजनीति, शिक्षा और सहकारिता आंदोलन से लंबे समय से जुड़ा रहा है। ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर नीला कौन हैं, उनकी पढ़ाई-लिखाई कहां हुई और राजनीति में उनका सफर कैसे आगे बढ़ा?

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कौन हैं नीला विखे पाटिल?(Who Is Nila Vikhe Patil)

नीला विखे पाटिल का जन्म स्वीडन में हुआ था। हालांकि, उनके बचपन का कुछ हिस्सा महाराष्ट्र के अहमदनगर में बीता। बाद में वह स्वीडन लौट गईं और वहीं अपनी पढ़ाई पूरी करने के साथ राजनीति में सक्रिय हो गईं। अब वह 349 सदस्यों वाली स्वीडन की संसद का हिस्सा बन चुकी हैं। नीला ग्रीन पार्टी से जुड़ी हैं और स्टॉकहोम सिटी से चुनाव जीतकर उन्होंने अपनी राजनीतिक पहचान बनाई है।

नीला की पढ़ाई का क्षेत्र भी काफी व्यापक रहा है। उन्होंने गोथेनबर्ग स्कूल ऑफ बिजनेस से अर्थशास्त्र और कानून की पढ़ाई की। इसके साथ ही उन्होंने एमबीए की डिग्री भी हासिल की। वह मैड्रिड की कॉम्प्लूटेंस यूनिवर्सिटी में भी पढ़ चुकी हैं। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि में अर्थव्यवस्था, कानून और प्रबंधन जैसे विषय शामिल हैं।

चुनाव में जीत के बाद नीला ने अपने दादा और पूर्व केंद्रीय मंत्री बालासाहेब विखे पाटिल को याद किया। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि उनके दादा को उनकी इस कामयाबी पर गर्व होता। नीला ने बताया कि जब वह 15 साल की थीं, तब उनके दादा उन्हें राज्य का बजट पढ़ने के लिए दिया करते थे। इस अनुभव ने उनके भीतर सार्वजनिक नीतियों और शासन को समझने की दिलचस्पी पैदा की।

Who Is Neela Vikh Patil

महाराष्ट्र से स्वीडन तक, कैसा रहा नीला का राजनीतिक सफर?

नीला विखे पाटिल कई साल से स्वीडन की राजनीति में सक्रिय हैं। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री स्टीफन लोफवेन के कार्यकाल में प्रधानमंत्री कार्यालय में सलाहकार के तौर पर काम किया। इस दौरान वह वित्त, टैक्स और आवास से जुड़े मामलों पर काम करती थीं। यह अनुभव आगे चलकर उनकी राजनीतिक भूमिका की नींव बना।

इसके बाद नीला स्टॉकहोम सिटी काउंसिल के लिए चुनी गईं। वह ग्रीन पार्टी की चुनाव समिति का हिस्सा भी रहीं। इसके अलावा, स्वीडिश यंग ग्रीन्स और पार्टी की दूसरी इकाइयों में भी उन्होंने काम किया। इस तरह स्थानीय राजनीति से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक उनका सफर आगे बढ़ा।

कौन हैं नीला के दादा और चाचा?

नीला विखे पाटिल का परिवार महाराष्ट्र के अहमदनगर क्षेत्र से जुड़ा रहा है। उनके दादा बालासाहेब विखे पाटिल केंद्र सरकार में मंत्री रह चुके थे। उनके पिता अशोक विखे पाटिल शिक्षाविद हैं। वहीं उनके चाचा राधाकृष्ण विखे पाटिल महाराष्ट्र सरकार में मंत्री हैं।

नीला के परिवार की जड़ें राजनीति के साथ-साथ सहकारिता आंदोलन में भी हैं। उनके परदादा विठ्ठलराव विखे पाटिल ने एशिया की पहली सहकारी चीनी मिल की स्थापना की थी। इस तरह परिवार की विरासत में राजनीति, शिक्षा और ग्रामीण सहकारिता, तीनों का असर दिखाई देता है।

नीला ने अपने दादा के साथ बिताए पलों को याद करते हुए बताया कि उनके जीवन के आखिरी वर्षों में वह लगभग हर हफ्ते उन्हें फोन किया करते थे। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने दादा की बहुत याद आती है।

Who Is Neela Vikh Patil

सांसद बनने के बाद बच्चों और पर्यावरण पर रहेगा फोकस

संसद में पहुंचने के बाद नीला बच्चों के कल्याण और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर काम करना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि वह उन लोगों की आवाज बनना चाहती हैं, जो खुद वोट नहीं दे सकते। वह स्टॉकहोम और पूरे स्वीडन के लिए योगदान देना चाहती हैं।

भारत से अपने रिश्ते पर भी नीला ने खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि वह भारत से बहुत प्यार करती हैं और देश के साथ उनका गहरा जुड़ाव है। उनके कई करीबी भारतीय दोस्त भी हैं।

स्वीडन के चुनाव में विपक्ष को मिला मामूली बहुमत

स्वीडन के चुनाव में वामपंथी विचारों वाली चार विपक्षी पार्टियों को कुल 176 सीटें मिलीं। वहीं, मौजूदा रूढ़िवादी सरकार का समर्थन करने वाले दलों के खाते में 173 सीटें आईं। दोनों खेमों के बीच सिर्फ तीन सीटों का अंतर रहा।

नतीजों के बाद प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन ने इस्तीफे का ऐलान कर दिया। पूर्व प्रधानमंत्री मैग्डालेना एंडरसन की सोशल डेमोक्रेट्स पार्टी 99 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी। हालांकि, विपक्षी दलों के बीच भी कई मुद्दों पर मतभेद हैं। ऐसे में एंडरसन को सरकार बनाने के लिए अलग-अलग दलों से बातचीत करनी होगी।