Bihar News : कौन हैं देवेश कुमार? जिनके इस्तीफे से बचा दीपक प्रकाश का मंत्री पद, जानिए पूरा राजनीतिक सफर

Published on 1 अग॰ 2026

पटना: बिहार की राजनीति में इन दिनों भाजपा नेता और विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) देवेश कुमार सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। वजह है उनका अचानक एमएलसी पद से इस्तीफा देना। राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को सिर्फ एक इस्तीफा नहीं, बल्कि एनडीए की बड़ी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि देवेश कुमार के इस्तीफे से बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश के लिए विधान परिषद पहुंचने का रास्ता लगभग साफ हो गया है।

दीपक प्रकाश, राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे हैं। वह फिलहाल मंत्री तो हैं, लेकिन विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं होने के कारण उनके मंत्री पद को लेकर संवैधानिक समय-सीमा का दबाव था। ऐसे में देवेश कुमार के इस्तीफे ने इस संकट को काफी हद तक समाप्त कर दिया है। हालांकि, अंतिम फैसला चुनाव आयोग और संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।

कौन हैं देवेश कुमार?

62 वर्षीय देवेश कुमार मूल रूप से बिहार के समस्तीपुर जिले के पूसा प्रखंड स्थित महमदपुर देवपार गांव के रहने वाले हैं। उनका परिवार लंबे समय से राजनीति और सामाजिक जीवन से जुड़ा रहा है। उनके दादा यमुना कार्जी स्वतंत्रता सेनानी थे और बाद में कांग्रेस के विधायक भी बने। राजनीतिक माहौल में पले-बढ़े देवेश कुमार ने भी कम उम्र से ही सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू कर दी थी।

उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त करते हुए एमए और एमफिल की पढ़ाई पूरी की। छात्र जीवन के दौरान वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े और यहीं से उनके राजनीतिक जीवन की औपचारिक शुरुआत हुई। छात्र राजनीति में सक्रिय रहने के बाद उन्होंने पत्रकारिता को अपना पेशा बनाया। पत्रकारिता के अनुभव ने उन्हें राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों की गहरी समझ दी, जिसका फायदा उन्हें बाद में संगठनात्मक राजनीति में मिला।

भाजपा संगठन में तेजी से बढ़ा कद

पत्रकारिता छोड़ने के बाद देवेश कुमार भारतीय जनता पार्टी की सक्रिय राजनीति में शामिल हुए। संगठन में लगातार काम करने की वजह से उन्होंने प्रदेश स्तर पर कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। भाजपा नेतृत्व ने उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें मिजोरम का प्रभारी भी बनाया।

संगठन में उनकी सक्रिय भूमिका और लंबे अनुभव को देखते हुए वर्ष 2021 में उन्हें राज्यपाल मनोनीत कोटे से बिहार विधान परिषद का सदस्य बनाया गया। उनका कार्यकाल 16 मार्च 2027 तक था, लेकिन उससे पहले ही उन्होंने अपने पद से इस्तीफा देकर राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी।

इस्तीफे के पीछे क्या है राजनीतिक रणनीति?

देवेश कुमार के इस्तीफे को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि भाजपा ने यह कदम एनडीए के सहयोगी दल राष्ट्रीय लोक मोर्चा को राजनीतिक रूप से मजबूत करने और मंत्री दीपक प्रकाश के संवैधानिक संकट को दूर करने के लिए उठाया है।

संविधान के अनुसार, कोई भी व्यक्ति मंत्री बनने के बाद छह महीने के भीतर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना जरूरी होता है। यदि ऐसा नहीं होता है तो मंत्री पद छोड़ना पड़ता है। ऐसे में माना जा रहा है कि खाली हुई सीट पर दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेजकर इस संकट का समाधान किया जाएगा। हालांकि भाजपा या एनडीए की ओर से इस रणनीति को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन राजनीतिक जानकार इसे गठबंधन धर्म निभाने और सहयोगी दल को मजबूत संदेश देने वाला फैसला मान रहे हैं।

विवादों से भी रहा है नाता

देवेश कुमार का राजनीतिक सफर पूरी तरह विवादों से मुक्त नहीं रहा है।

शराब पीने के आरोप से मचा था बवाल

जुलाई 2022 में उनका नाम उस समय चर्चा में आया था जब पटना के पाटलिपुत्र थाना क्षेत्र में एक सड़क दुर्घटना के मामले के दौरान पुलिस ने उन पर शराब पीने का संदेह जताया था। आरोप था कि उन्होंने ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट कराने से इनकार कर दिया, जिसके बाद उनका ब्लड सैंपल लिया गया। बाद में फॉरेंसिक जांच में शराब सेवन की पुष्टि होने की बात सामने आई थी। हालांकि देवेश कुमार ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीतिक साजिश बताया था। उन्होंने कहा था कि उन्हें जानबूझकर बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।

राबड़ी देवी से सदन में हुई थी तीखी बहस

फरवरी 2026 में बिहार विधान परिषद के बजट सत्र के दौरान देवेश कुमार एक बार फिर सुर्खियों में आए। एक बच्ची से दुष्कर्म के मामले पर सदन में चर्चा के दौरान उनकी नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी से तीखी नोकझोंक हो गई थी।बहस इतनी बढ़ गई कि सदन का माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया। राबड़ी देवी ने आरोप लगाया था कि देवेश कुमार ने उनके खिलाफ अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया, जबकि देवेश कुमार ने पलटवार करते हुए कहा कि राजद सदस्यों का व्यवहार उनके प्रति आक्रामक था और उन्होंने कोई अनुचित टिप्पणी नहीं की।

अब सबकी नजर अगले कदम पर

एमएलसी पद से इस्तीफा देने के बाद देवेश कुमार एक बार फिर बिहार की राजनीति के केंद्र में आ गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या उन्हें भाजपा संगठन में कोई बड़ी जिम्मेदारी मिलेगी या फिर सरकार में नई भूमिका दी जाएगी।दूसरी ओर, यदि खाली हुई सीट पर दीपक प्रकाश विधान परिषद पहुंचते हैं तो उनका मंत्री पद सुरक्षित हो जाएगा और एनडीए सरकार एक संभावित संवैधानिक संकट से बच जाएगी।

फिलहाल इतना तय है कि देवेश कुमार का इस्तीफा केवल एक व्यक्तिगत फैसला नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे बिहार की सत्ता और गठबंधन की राजनीति में दूरगामी असर डालने वाले कदम के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में चुनाव आयोग की प्रक्रिया, एनडीए की रणनीति और भाजपा नेतृत्व के अगले फैसले पर पूरे बिहार की राजनीतिक नजर टिकी रहेगी।