वाराणसी20 मिनट पहले
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बीएचयू समेत राष्ट्रीय महत्व के उच्च शिक्षण संस्थानों में आतंकी हमले के खतरे को लेकर जारी अलर्ट के बीच सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। गुरुवार को राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड की चार सदस्यीय टीम काशी हिंदू विश्वविद्यालय पहुंची।
एनएसजी टीम ने करीब आठ घंटे तक पूरे परिसर का सुरक्षा सर्वे किया। इस दौरान टीम ने प्रमुख भवनों, प्रवेश-निकास मार्गों, विश्वनाथ मंदिर, हेलीपैड और आवासीय क्षेत्रों की सुरक्षा व्यवस्था को बारीकी से परखा। आपात स्थिति में कमांडो टीम को एयर ड्रॉप करने और मोर्चेबंदी के लिए कई संभावित स्थान भी चिह्नित किए गए।
सुबह बीएचयू परिसर पहुंची एनएसजी टीम ने प्रॉक्टोरियल बोर्ड के अधिकारियों और पुलिस टीम के साथ विभिन्न संवेदनशील स्थानों का निरीक्षण किया। टीम का फोकस यह जानने पर रहा कि किसी आपात स्थिति में सुरक्षा बल परिसर में किस तरह तेजी से पहुंच सकते हैं और किन स्थानों से ऑपरेशन को अंजाम दिया जा सकता है।
प्रवेश-निकास के सभी रास्तों को परखा
सर्वे के दौरान एनएसजी टीम ने बीएचयू परिसर में आने-जाने वाले सभी प्रमुख रास्तों की जानकारी ली। प्रवेश और निकास के स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी और बाहरी लोगों की आवाजाही का भी आकलन किया गया। टीम ने यह भी देखा कि परिसर में रोजाना कितने लोगों का फुटफॉल रहता है और भीड़भाड़ वाले स्थान कौन-कौन से हैं।
इसके अलावा विश्वविद्यालय के ऊंचे भवनों और उनकी छतों का निरीक्षण किया गया। ऐसी छतों को चिह्नित किया गया, जहां आवश्यकता पड़ने पर हेलीकॉप्टर या अन्य माध्यम से कमांडो टीम को उतारा जा सके। भवनों और रास्तों के आसपास ऐसे संभावित स्थान भी देखे गए, जहां आपात स्थिति में सुरक्षा बल मोर्चा संभाल सकें।

NSG ने देखी सुरक्षा व्यवस्था।
विश्वनाथ मंदिर और आवासीय क्षेत्रों का भी निरीक्षण
एनएसजी टीम ने बीएचयू परिसर स्थित विश्वनाथ मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था का भी जायजा लिया। मंदिर में प्रवेश और निकास के रास्ते, श्रद्धालुओं और अन्य लोगों की आवाजाही तथा आसपास की निगरानी व्यवस्था को देखा गया। इसके साथ ही विश्वविद्यालय के विभागों और छात्रों-कर्मचारियों के आवासीय क्षेत्रों का भी सर्वे किया गया।
टीम ने यह आकलन किया कि किसी अप्रिय स्थिति में इन क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की तैनाती और आवाजाही किस तरह की जा सकती है। संभावित ऑपरेशन के लिए मंदिर, विभागों और आवासीय क्षेत्रों में जरूरी स्थानों की पहचान भी की गई।
एंबुश और मोर्चेबंदी के संभावित स्थान चिह्नित
सुरक्षा सर्वे के दौरान एनएसजी कमांडो ने भवनों, रास्तों और संकायों की स्थिति को बारीकी से देखा। जरूरत पड़ने पर सुरक्षा बल कहां से कार्रवाई शुरू कर सकते हैं और किन स्थानों पर मोर्चेबंदी की जा सकती है, इसका आकलन किया गया।
टीम ने संभावित एंबुश प्वाइंट (घात लगाने के लिए चुनी गई जगह) और मोर्चेबंदी के स्थानों को भी चिह्नित किया। इसके पीछे उद्देश्य आपात स्थिति में सुरक्षा बलों की त्वरित कार्रवाई के लिए पहले से रणनीति तैयार रखना है।
बाहरी लोगों और वेंडरों की निगरानी पर जोर
एनएसजी टीम के निरीक्षण के बाद उच्चाधिकारियों के साथ लंबी बैठक भी हुई। इसमें विश्वविद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित सूचना साझा करने पर जोर दिया गया।
बैठक में परिसर में आने वाले बाहरी लोगों की निगरानी, साइबर सिक्योरिटी और संवेदनशील स्थानों की सुरक्षा को लेकर भी जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए। इसके अलावा विश्वविद्यालय में काम करने वाले वेंडरों, मजदूरों और अन्य बाहरी कर्मचारियों के सत्यापन पर विशेष ध्यान देने की हिदायत दी गई।

आठ घंटे तक चला सुरक्षा ऑडिट
एनएसजी मुख्यालय से आई चार सदस्यीय टीम सुबह से लेकर देर शाम तक बीएचयू परिसर में रही। करीब आठ घंटे तक चले इस सुरक्षा सर्वे में टीम ने परिसर के प्रमुख और संवेदनशील स्थानों का निरीक्षण किया। सर्वे के दौरान प्रॉक्टोरियल बोर्ड और पुलिस अधिकारियों की टीम भी एनएसजी के साथ मौजूद रही।
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