भोपाल में नगर निगम द्वारा कार्यालय तोड़े जाने के बाद भाजपा पार्षद राजेश चौकसे ने सड़क किनारे खुले आसमान के नीचे अपना जनसंपर्क कार्यालय शुरू कर दिया है। पार्षद का आरोप है कि उन्हें मौखिक अनुमति मिली थी और कार्रवाई राजनीतिक दबाव में हुई
ऑफिस टूटने के बाद सड़क किनारे बैठने लगे BJP पार्षद
- Published: 14 Jul 2026, 10:09 AM IST
- Last Updated: 14 Jul 2026, 10:11 AM IST
भोपाल: नगर निगम द्वारा अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई के बाद भाजपा पार्षद राजेश चौकसे ने अनोखा कदम उठाया है। वार्ड-62 के पार्षद चौकसे ने अब खुले आसमान के नीचे ही अपना जनसंपर्क कार्यालय शुरू कर दिया है। सोमवार शाम से उन्होंने आनंद नगर चौराहे के पास मंदिर के समीप सड़क किनारे बैठकर लोगों की समस्याएं सुनना शुरू कर दिया। इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं।
अवैध निर्माण बताते हुए कार्रवाई
दरअसल, 10 जुलाई को नगर निगम ने आनंद नगर चौराहे के पास निगम की दुकानों के ऊपर बन रहे एक निजी कार्यालय को तोड़ दिया था। यह निर्माण भाजपा पार्षद राजेश चौकसे द्वारा कराया जा रहा था। नगर निगम ने इसे अवैध निर्माण बताते हुए कार्रवाई की थी।
नगर निगम के अनुसार करीब 450 वर्गफुट क्षेत्र में शासकीय संपत्ति पर अतिक्रमण कर निर्माण किया जा रहा था। कार्रवाई के दौरान पूरे निर्माण को ध्वस्त कर दिया गया। निगम का दावा है कि इससे लगभग 30 लाख रुपये मूल्य की शासकीय भूमि और संपत्ति को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया। निगम ने साफ कहा कि सरकारी संपत्तियों पर किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण या कब्जा स्वीकार नहीं किया जाएगा।
मौखिक सहमति भी मिली थी
कार्रवाई के बाद पार्षद राजेश चौकसे ने नगर निगम की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उनका दावा है कि उन्होंने निर्माण शुरू करने से पहले नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन को पत्र देकर जानकारी दी थी और उन्हें मौखिक सहमति भी मिली थी। इसी आधार पर निर्माण कार्य शुरू कराया गया था।
पार्षद ने आरोप लगाया कि उनका कार्यालय राज्य मंत्री कृष्णा गौर के कहने पर गिराया गया। उनका कहना है कि शहर में कई अन्य पार्षदों के कार्यालय भी सरकारी जमीन पर बने हुए हैं, लेकिन कार्रवाई केवल उनके खिलाफ की गई है। इसे उन्होंने पक्षपातपूर्ण कार्रवाई बताया।
नगर निगम ने पार्षद के आरोपों को खारिज किया
वहीं नगर निगम ने पार्षद के आरोपों को खारिज किया है। चीफ सिटी प्लानर नीरज आनंद लिखार ने कहा कि निर्माण के लिए कोई लिखित अनुमति नहीं ली गई थी। इसलिए राजस्व विभाग और पुलिस की मौजूदगी में नियमानुसार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई पूरी तरह नियमों के तहत हुई है और इसमें किसी प्रकार का राजनीतिक दबाव नहीं था।
अब सड़क किनारे खुले आसमान के नीचे शुरू हुआ पार्षद का यह कार्यालय शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोग भी इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं, जबकि सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें और वीडियो लगातार साझा किए जा रहे हैं।