Bhadrapad Second Pradosh Vrat 2026: भाद्रपद मास का दूसरा प्रदोष व्रत कब है? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजन विधि

Published on 19 सित॰ 2026

Bhadrapad Second Pradosh Vrat 2026: भाद्रपद मास के महीने में भगवान शिव और विष्णु जी साधना की जाती है. वहीं, हर महीने में प्रदोष व्रत भी रखा जाता है. भाद्रपद मास का प्रदोष व्रत किस दिन रखा जाएगा, जानें सही तारीख.

Published byNamrata Mohanty

Bhadrapad Second Pradosh Vrat 2026: भाद्रपद मास के महीने में भगवान शिव और विष्णु जी साधना की जाती है. वहीं, हर महीने में प्रदोष व्रत भी रखा जाता है. भाद्रपद मास का प्रदोष व्रत किस दिन रखा जाएगा, जानें सही तारीख.

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Bhadrapad Second Pradosh Vrat 2026

Bhadrapad Second Pradosh Vrat 2026 Photograph: (ai-generated)

Bhadrapad Second Pradosh Vrat 2026: सनातन धर्म में भाद्रपद मास की खासियत बहुत अधिक होती है. इस महीने में प्रदोष व्रत किया जाता है. प्रदोष व्रत भगावन शिव को समर्पित होता है. इस खास तिथि पर शिव जी की पूजा-अर्चना की जाती है. धार्मिक मान्यता है कि प्रदोष काल में शिव जी की पूजा करने से भक्तों को उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है. भाद्रपद महीने में भी 2 प्रदोष व्रत पड़ते हैं. पहला प्रदोष व्रत कृष्ण पक्ष में रखा गया था जबकि दूसरा प्रदोष व्रत शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर रखा जाने वाला है. इस बार भाद्रपद मास का दूसरा प्रदोष व्रत गुरुवार के दिन पड़ रहा है. आइए जानते हैं इस व्रत की सही तिथि, पूजा का शुभ समय और भगवान शिव की पूजा करने की विधि.

कब है भाद्रपद मास का दूसरा प्रदोष व्रत?

द्रिक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 23 सितंबर 2026 की रात 10:50 से शुरू होगी. त्रयोदशी तिथि का समापन 24 सितंबर 2026 की रात 11:18 पर होगा. इस प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा करने के लिए प्रदोष काल का समय सबसे शुभ माना जाता है. प्रदोष काल इस बार 24 सितंबर को है. इसलिए, 24 सितंबर को ही प्रदोष व्रत रखा जाएगा. इस दिन गुरुवार है. इसलिए, इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाता है.

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गुरु प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त

प्रदोष व्रत में शाम के समय भगवान शिव की पूजा की जाती है. इस दिन पूजा करने से प्रदोष का समय शुभ होता है. इसलिए, इस दिन को प्रदोष पूजा का समय शाम 6 बजकर 16 मिनट से शुरू होगा और रात 8:39 मिनट तक रहेगा. 

गुरु प्रदोष व्रत पूजन विधि

प्रदोष व्रत रखने वाले लोगों को सुबह उठकर सबसे पहले भगवान शिव का ध्यान कर व्रत का संकल्प लेना चाहिए. इस दिन आपको दिनभर श्रद्धा के साथ व्रत रखना होता है. प्रदोष के दिन शाम के समय यानी की प्रदोष काल में पूजा की तैयारी करनी चाहिए. सबसे पहले भगवान शिव जी का जल से अभिषेक करना चाहिए. इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल आदि से अभिषेक कर सकते हैं. इसके बाद शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा और फूल अर्पित करें. इसके बाद भगवान शिव को चंदन, अक्षत और नैवेद्य चढ़ाएं. माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा कर सकते हैं. आखिर में भगवान शिव की आरती करें और शिव जी के मंत्रों का जाप करना चाहिए.

प्रदोष व्रत में किन बातों का ख्याल रखें?

गुरु प्रदोष व्रत में पूजा के दौरान साफ-सफाई और सात्विकता का ख्याल रखें. इसके बाद शिवलिंग पर पूजा सामग्रियां अर्पित करें और सभी नियमों का पालन करें. शिवलिंग पर बेलपत्र का चिकना भाग रखने की परंपरा है. इस व्रत का निर्जला या फलाहार, दोनों तरीकों से रखा जा सकता है. इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से विशेष फलों की प्राप्ति होती है. 

शिव जी के इन 5 मंत्रों का जाप करें

शिव जी का सरल मंत्र- ऊं नमः शिवाय

महामृत्युंजय मंत्र- ऊं त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

शिव गायत्री मंत्र- ऊं तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि।
तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥

रुद्र मंत्र- ऊं नमो भगवते रुद्राय॥

शिव ध्यान मंत्र- करचरण कृतं वाक्कायजं कर्मजं वा।
श्रवणनयनजं वा मानसं वापराधम्।
विहितमविहितं वा सर्वमेतत्क्षमस्व।
जय जय करुणाब्धे श्रीमहादेव शम्भो॥

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)