BCI को 5 साल के लाॅ कोर्स में उम्र संबंधी सीमा पर रूख करना हाेगा साफ, SC ने दो सप्ताह का समय दिया

Published on 25 सित॰ 2026

सुप्रीम कोर्ट में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को 5 साल के लॉ काेर्स पर उम्र सीमा पर अपना रूख स्पष्ट करना होगा. सुप्रीम कोर्ट ने BCI को इसके लिए दो सप्ताह का समय दिया है. असल में इसको लेकर शुक्रवार को SC में सुनवाई हुई. इस दौरान SC ने BCI से सवाल करते हुए कहा कि क्या वह पांच साल के लॉ कोर्स में एडमिशन के लिए तय अधिकतम उम्र सीमा को हटाने को तैयार है? इस पर BCI का जवाब सुनने के बाद SC ने सुनवाई के लिए दो हफ्ते बाद का समय निर्धारित कर दिया है. इस सुनवाई में BCI को इस मामले में अपना रूख स्पष्ट करना होगा.

आइए, विस्तार से इस मामले को लेकर SC में हुई सुनवाई और BCI के पक्ष के बारे में जानते हैं. जानते हैं कि BCI ने शुक्रवार को क्या कहा है, इसके बारे में भी जानेंगे.

अधिकतम उम्र सीमा लागू हटाने को लेकर याचिका

सुप्रीम कोर्ट में इस संबंध में एक याचिका दायर की गई थी, जिसमेंयाचिकाकर्ता ने सवाल उठाया है कि क्या न्यूनतम योग्यता तय करने की शक्ति का इस्तेमाल अधिकतम उम्र सीमा लागू करने के लिए किया जा सकता है. इस पर जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि पांच साल के लॉ कोर्स का रेजिडेंशियल स्वरूप इसका आधार नहीं हो सकता.BCI ने निर्देश लेने के लिए एक हफ़्ते का समय मांगा तो वहीं SC ने दो हफ़्ते बाद अगली सुनवाई तय की है.

BCI ने क्या कहा?

BCI ने कहा कि हमने अधिकतम उम्र की सीमा इसलिए तय की है क्योंकि ज़्यादातर पांच साल के लॉ कोर्स रेजिडेंशियल होते हैं. BCI ने कहा कि इस पर कोर्ट उम्र तय कर सकता है. BCI के वकील ने कहा कि हमारे पास तीन साल का लॉ कोर्स भी है. ऐसे मेंअगर कोई एक निश्चित उम्र के बाद लॉ की पढ़ाई करना चाहता है,तो वह तीन साल का कोर्स कर सकता है. BCI के वकील ने कहा किज़्यादातर तीन साल के लॉ कोर्स रेजिडेंशियल नहीं होते हैं,लेकिन पांच साल के लॉ कोर्स ज़्यादातर रेजिडेंशियल होते हैं.

5 साल के सभी लाॅ कोर्स रेजिडेंशियल नहीं होते

सुनवाई के दौरान BCI के दलीलों को खारिज करते हुए जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि सभी पांच साल के लॉ कोर्स रेजिडेंशियल नहीं होते हैं. उन्होंने कलकत्ता यूनिवर्सिटी के 5 साल के लॉ कोर्स का उदाहरण दिया. कोर्ट ने कहा कि अधिकतम उम्र की सीमा तय करने के लिए यह कोई सही पैमाना नहीं है. इस परBCI ने कहा कि कोर्ट उचित आदेश दे सकता है. अब मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी.

पीयूष पांडे

पीयूष पांडे

प्रमुखत: सुप्रीम कोर्ट, वित्त मंत्रालय और भारतीय निर्वाचन आयोग की खबरों की जिम्मेदारी. पत्रकारिता में 22 वर्षों से ज्यादा का अनुभव. हिंदुस्तान, अमर उजाला, दैनिक भास्कर और आज में सेवाएं दीं. खबरिया चैनल और अखबार के अलावा दैनिक भास्कर के डिजिटल प्लेटफॉर्म में जिम्मेदारी निभाई, जबकि ऑल इंडिया रेडियो के आमंत्रण पर कई विशिष्ट जनों के साक्षात्कार किए.

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