Badlapur में IVF Racket का काला खेल! फर्जी आधार से 33 बार महिला से निकाले अंडाणु, ED का छापा, ₹29 लाख कैश जब्त

Published on 23 अक्टू॰ 2026

Time Published: Friday, October 23, 2026, 16:15 [IST]

Badlapur IVF Racket Exposed: महाराष्ट्र के बदलापुर में कथित अवैध मानव अंडाणु निकालने के रैकेट की जांच अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) तक पहुंच गई है। एजेंसी ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के तहत ठाणे, बारामती और नासिक में अस्पतालों, IVF सेंटरों समेत 10 ठिकानों पर तलाशी ली। इस दौरान ₹29 लाख नकद जब्त किए गए, जबकि कई बैंक लॉकर और म्यूचुअल फंड निवेश फ्रीज कर दिए गए। जांच एजेंसी को मामले से जुड़े दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस भी मिले हैं।

ED के मुताबिक, इस कथित नेटवर्क में आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को एग डोनेशन के लिए तैयार किया जाता था। आरोप है कि बिचौलियों के जरिए महिलाओं को अलग-अलग IVF सेंटरों और असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) बैंकों तक पहुंचाया जाता था। इसके लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया, ताकि महिलाओं की वास्तविक पहचान और पहले कराए गए एग रिट्रीवल की जानकारी छिपाई जा सके। एजेंसी अब इस बात की जांच कर रही है कि महिलाओं के अंडाणुओं से जुड़े इस कथित कारोबार में कितना पैसा आया, उसका इस्तेमाल कहां हुआ और किन संपत्तियों में निवेश किया गया?

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क्या है बदलापुर IVF रैकेट का पूरा मामला?

यह मामला महाराष्ट्र के बदलापुर में कथित तौर पर चल रहे एक अवैध एग रिट्रीवल नेटवर्क से जुड़ा है। इसकी जांच ठाणे पुलिस की ओर से दर्ज FIR और दाखिल चार्जशीट के आधार पर ED ने शुरू की। पुलिस की जांच में आरोप सामने आए कि एक संगठित नेटवर्क आर्थिक तंगी से जूझ रही महिलाओं को एग डोनेशन के लिए तैयार करता था।

महिलाओं को कथित तौर पर हर प्रक्रिया के लिए ₹25,000 से ₹30,000 तक देने का प्रस्ताव दिया जाता था। इसके बाद एजेंट इन महिलाओं को IVF सेंटरों और ART बैंकों तक पहुंचाते थे। आरोप है कि इस व्यवस्था में बिचौलियों को कमीशन मिलता था और महिलाओं से बार-बार अंडाणु निकलवाने के लिए उनकी पहचान व मेडिकल रिकॉर्ड में हेराफेरी की जाती थी। जांच एजेंसियों के सामने यह सवाल भी है कि क्या संबंधित संस्थानों ने महिलाओं के दस्तावेजों का उचित सत्यापन किया था और क्या उन्हें पहले की मेडिकल प्रक्रियाओं की जानकारी थी। इन पहलुओं की जांच जारी है।

ED की छापेमारी में क्या-क्या मिला?

ED के मुंबई क्षेत्रीय कार्यालय-II ने 16 अक्टूबर 2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत कार्रवाई की। तलाशी अभियान ठाणे, बारामती और नासिक में अस्पतालों, IVF सेंटरों और अन्य संबंधित परिसरों में चलाया गया। जांच एजेंसी के मुताबिक, तलाशी के दौरान...

  • ₹29 लाख नकद जब्त किए गए।
  • कई बैंक लॉकर फ्रीज किए गए।
  • म्यूचुअल फंड निवेश पर रोक लगाई गई।
  • मामले से जुड़े दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस बरामद किए गए।
  • कथित अपराध से जुड़ी कई अचल संपत्तियों और निवेशों की पहचान की गई।
  • एग डोनर उपलब्ध कराने वाले कुछ अन्य एजेंटों के बारे में जानकारी जुटाई गई।

हालांकि, फ्रीज किए गए लॉकरों और म्यूचुअल फंड निवेश का कुल मूल्य सार्वजनिक नहीं किया गया है। जिन संपत्तियों की पहचान हुई है, उनकी कीमत और कथित अपराध से उनका संबंध भी जांच के दायरे में है।

फर्जी आधार कार्ड और मेडिकल रिपोर्ट से कैसे होता था खेल?

ED की जांच के मुताबिक, कथित रैकेट में महिलाओं की वास्तविक पहचान छिपाने और बार-बार एग डोनेशन कराने के लिए कई तरह के दस्तावेजों में हेराफेरी की गई। इनमें आधार कार्ड, पैन कार्ड, जन्म प्रमाणपत्र, हलफनामे, सहमति पत्र, ब्लड टेस्ट रिपोर्ट और बीमा संबंधी कागजात शामिल बताए गए हैं। आरोप है कि इन दस्तावेजों के जरिए महिलाओं को अलग-अलग पहचान के साथ पेश किया जाता था। इससे उनकी पिछली मेडिकल प्रक्रियाओं का रिकॉर्ड छिप सकता था और उन्हें नए डोनर के रूप में दिखाया जा सकता था।

ED के मुताबिक, महिलाओं को अंडाणु निकालने की प्रक्रिया के लिए महाराष्ट्र के अलग-अलग इलाकों के अलावा दूसरे राज्यों में भी भेजे जाने की जानकारी मिली है। एजेंसी यह पता लगा रही है कि इस व्यवस्था में कौन-कौन से एजेंट और संस्थान शामिल थे।

एक महिला से 33 बार एग रिट्रीवल का आरोप

इस मामले में सामने आए सबसे गंभीर आरोपों में से एक महिला से कथित तौर पर 33 बार एग रिट्रीवल कराने का है। पुलिस जांच में 250 से अधिक एग डोनेशन मामलों की पड़ताल किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, इन सभी मामलों की परिस्थितियां और संबंधित महिलाओं की मेडिकल हिस्ट्री अलग-अलग हो सकती हैं। प्रत्येक मामले में वास्तविक प्रक्रियाओं की संख्या और दस्तावेजों की प्रामाणिकता की पुष्टि जांच से ही होगी।

एग रिट्रीवल में अंडाशय को दवाओं के जरिए उत्तेजित करने के बाद मेडिकल प्रक्रिया से अंडाणु निकाले जाते हैं। इस दौरान ओवेरियन हाइपरस्टिमुलेशन सिंड्रोम, रक्तस्राव, संक्रमण और एनेस्थीसिया से जुड़ी जटिलताओं जैसे जोखिम हो सकते हैं। बार-बार ऐसी प्रक्रियाएं कराए जाने का आरोप इसलिए गंभीर है, क्योंकि इससे महिलाओं की सेहत और उनकी सुरक्षा से जुड़े सवाल उठते हैं।

कानून क्या कहता है? एग डोनेशन पर क्या हैं नियम?

भारत में असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (रेगुलेशन) एक्ट, 2021 के तहत एग डोनेशन और ART सेवाओं को नियंत्रित किया जाता है। कानून में एग डोनर की पात्रता, लिखित सहमति, बीमा, रिकॉर्ड रखने और अंडाणुओं के इस्तेमाल से जुड़े नियम निर्धारित किए गए हैं। इसका उद्देश्य महिलाओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा करना और प्रजनन तकनीक के दुरुपयोग को रोकना है।

कानून के प्रावधानों के तहत एग डोनेशन पर सीमाएं भी निर्धारित हैं। ऐसे में यदि किसी महिला से बार-बार अंडाणु निकालने और उसकी पहचान छिपाने के आरोप साबित होते हैं, तो यह संबंधित कानूनी प्रावधानों के उल्लंघन का गंभीर मामला हो सकता है।

इस मामले में पुलिस ने धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़े आरोपों के साथ ART रेगुलेशन एक्ट और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के उल्लंघन की भी जांच की है।

17 आरोपियों के नाम, डॉक्टरों की भूमिका भी जांच के दायरे में

ठाणे पुलिस की चार्जशीट में मंजूषा वानखेड़े समेत 17 आरोपियों के नाम बताए गए हैं। इन पर कथित तौर पर धोखाधड़ी, जालसाजी और संबंधित नियामकीय कानूनों के उल्लंघन के आरोप हैं। जांच का एक अहम पहलू यह है कि महिलाओं को भर्ती करने वाले एजेंटों, दस्तावेज तैयार करने वालों और संबंधित IVF सेंटरों के बीच किस तरह तालमेल था।

यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या संबंधित संस्थानों को दस्तावेजों में कथित गड़बड़ियों की जानकारी थी या फिर सत्यापन की प्रक्रिया में गंभीर चूक हुई। किसी संस्थान या व्यक्ति की जिम्मेदारी तय करने के लिए जांच में सामने आने वाले साक्ष्य अहम होंगे।

₹29 लाख की जब्ती के बाद अब पैसों के नेटवर्क की जांच

ED की जांच केवल नकदी जब्त करने तक सीमित नहीं है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित नेटवर्क को IVF सेंटरों और ART बैंकों से कितना पैसा मिला, एजेंटों को कितना कमीशन दिया गया और रकम आगे किन खातों या संपत्तियों में पहुंची। बैंक लॉकर, म्यूचुअल फंड निवेश और अचल संपत्तियों की जांच इसी वित्तीय कड़ी का हिस्सा है। हालांकि, अभी तक कथित अपराध से हुई कुल कमाई का आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है।

PMLA के तहत किसी संपत्ति को अपराध से अर्जित संपत्ति मानने के लिए उसका संबंधित आपराधिक गतिविधि से जुड़ाव स्थापित करना जरूरी है। इसलिए जब्त नकदी और फ्रीज किए गए निवेश के अलावा अन्य संपत्तियों की भूमिका भी जांच के बाद स्पष्ट होगी।

अब आगे क्या होगा?

इस मामले में ED वित्तीय लेन-देन, कथित अपराध से अर्जित संपत्तियों और एजेंटों की भूमिका की जांच कर रहा है। वहीं, पुलिस की जांच में महिलाओं की पहचान, मेडिकल रिकॉर्ड, दस्तावेजों की प्रामाणिकता और संबंधित संस्थानों की भूमिका अहम होगी।

फिलहाल सबसे बड़े सवाल हैं कि कितनी महिलाओं से कथित तौर पर बार-बार अंडाणु निकलवाए गए, इस नेटवर्क में कितने संस्थान शामिल थे और इससे कुल कितनी कमाई हुई।

₹29 लाख की नकदी जब्ती और निवेश फ्रीज किए जाने की कार्रवाई जांच का एक अहम पड़ाव है। लेकिन इस कथित रैकेट का पूरा वित्तीय और चिकित्सकीय नेटवर्क सामने आने के लिए अभी आगे की जांच जरूरी है।