
Ayush Officer Recruitment को लेकर जारी विवाद अब राजस्थान हाईकोर्ट पहुंच गया है। डॉ. ज्योति जांगिड़ व अन्य अभ्यर्थियों ने आरएसएसबी की संयुक्त मेरिट लिस्ट को चुनौती देते हुए याचिका दाखिल की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने संविदा के आधार पर हो रही इस भर्ती प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगा दी है। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश एडवोकेट अश्विनी जैमन ने बताया कि आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी तीनों पद्धतियों के पेपर अलग-अलग होते हैं और उनकी कठिनाई का स्तर भी भिन्न होता है, इसलिए तीनों की एक साथ मेरिट लिस्ट बनाना उचित नहीं है।
Table of Contents
- 1,340 पदों पर संयुक्त विज्ञापन से तीन पद्धतियों में उलझी भर्ती
- तीनों पद्धतियों की अलग-अलग मेरिट लिस्ट बनाने की मांग की गई याचिका में
- एक्सपर्ट रिपोर्ट को दरकिनार कर जारी की गई संयुक्त मेरिट लिस्ट
- न्यायाधीश अनूप कुमार ढंढ की एकलपीठ ने दिया अंतरिम रोक का आदेश
- 19 नवंबर को होगी मामले की अगली सुनवाई
- जयपुर का वर्ल्ड हेरिटेज टैग खतरे में, दुनिया में पहले भी 4 जगहों से छिन चुका दर्जा, हाईकोर्ट ने पूछा- संरक्षण पर क्या किया?
1,340 पदों पर संयुक्त विज्ञापन से तीन पद्धतियों में उलझी भर्ती
राजस्थान स्टाफ सिलेक्शन बोर्ड ने आयुष विभाग में 1,340 पदों पर संविदा के आधार पर Ayush Officer की भर्ती के लिए संयुक्त विज्ञापन जारी किया था। इस भर्ती में आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी, तीनों पद्धतियों के डॉक्टरों को शामिल किया गया, लेकिन बोर्ड ने तीनों के लिए अलग-अलग मेरिट लिस्ट बनाने के बजाय एक ही संयुक्त मेरिट लिस्ट तैयार कर दी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इससे यह भी स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि हर पद्धति में कुल कितने पद थे और उनमें से कितने आवेदन आए।
तीनों पद्धतियों की अलग-अलग मेरिट लिस्ट बनाने की मांग की गई याचिका में
याचिका में कहा गया है कि संयुक्त विज्ञापन जारी करने के बावजूद आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी, तीनों पद्धतियों की एक ही मेरिट लिस्ट बनाना न्यायोचित नहीं है। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से मांग की है कि तीनों पद्धतियों की अलग-अलग मेरिट लिस्ट बनाकर ही नियुक्तियां दी जाएं, ताकि हर पद्धति के योग्य अभ्यर्थियों को उनके अपने पेपर और कठिनाई स्तर के आधार पर सही मौका मिल सके।
एक्सपर्ट रिपोर्ट को दरकिनार कर जारी की गई संयुक्त मेरिट लिस्ट
याचिका में यह भी बताया गया कि संयुक्त मेरिट लिस्ट बनाने के विरोध में पहले ही एक एक्सपर्ट रिपोर्ट पेश की गई थी, जिसमें तीनों पद्धतियों की एक साथ मेरिट लिस्ट बनाने को गलत बताया गया था। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि इस रिपोर्ट को दरकिनार करते हुए आरएसएसबी ने संयुक्त मेरिट लिस्ट जारी कर दी, जिसके बाद अभ्यर्थियों को कोर्ट का रुख करना पड़ा।
न्यायाधीश अनूप कुमार ढंढ की एकलपीठ ने दिया अंतरिम रोक का आदेश
न्यायाधीश अनूप कुमार ढंढ की एकलपीठ ने डॉ. ज्योति जांगिड़ व अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए Ayush Officer भर्ती पर अंतरिम रोक का आदेश दिया। कोर्ट ने राजस्थान स्टाफ सिलेक्शन बोर्ड सहित अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है। बोर्ड द्वारा पहले भी RSSB की भर्ती परीक्षाओं के शेड्यूल में बदलाव किए जा चुके हैं, और अब इस भर्ती में भी कानूनी पेच फंसने से हजारों अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया रुक गई है।
19 नवंबर को होगी मामले की अगली सुनवाई
मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर को तय की गई है। तब तक Ayush Officer भर्ती से जुड़ी नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक बनी रहेगी। भर्ती प्रक्रियाओं में परीक्षा पैटर्न और मेरिट लिस्ट को लेकर कानूनी विवाद कोई नई बात नहीं है, हाल ही में परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर भी इसी तरह के सवाल उठते रहे हैं। फैसला आने तक 1,340 पदों पर संविदा नियुक्ति का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों को और इंतजार करना होगा।
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सांवरिया सेठ सिंह
थम्सअप भारत न्यूज पोर्टल शासन, सामाजिक, विकासात्मक और जनता की मूलभूत समस्याओं और उनकी चिंताओं के मुद्दों पर चौबीसों घंटे निष्पक्ष और विस्तृत समाचार कवरेज प्रदान करता है।