मौसम बदलने के साथ अस्थमा के मरीजों को सांस से जुड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। तापमान में बदलाव, ठंडी हवा, धूल, धुआं, परागकण और वायरल इंफेक्शन कुछ लोगों में अस्थमा के लक्षणों को ट्रिगर कर सकते हैं। ऐसे में डॉक्टर की बताई दवाओं और सावधानियों के साथ संतुलित डाइट पर ध्यान देना भी जरूरी है।
हालांकि, यह समझना जरूरी है कि कोई भी खास खाद्य पदार्थ अस्थमा को ठीक नहीं करता और न ही इनहेलर या डॉक्टर की बताई दवा का विकल्प है। पौष्टिक भोजन शरीर की सामान्य सेहत और प्रतिरोधक क्षमता को सपोर्ट कर सकता है।
फल और सब्जियों को बनाएं डाइट का हिस्सा
फल और सब्जियां विटामिन, मिनरल, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट जैसे पोषक तत्व प्रदान करती हैं। संतरा, अमरूद, पपीता, सेब जैसे फल और हरी पत्तेदार सब्जियां, गाजर, टमाटर व शिमला मिर्च जैसी सब्जियां संतुलित आहार का हिस्सा बनाई जा सकती हैं।
कोशिश करें कि रोजाना अलग-अलग रंगों के फल और सब्जियां खाएं, ताकि भोजन से विभिन्न पोषक तत्व मिल सकें।
ओमेगा-3 वाले खाद्य पदार्थ
ओमेगा-3 फैटी एसिड शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्वों में शामिल है। अगर आप मांसाहारी भोजन लेते हैं तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार मछली को डाइट में शामिल किया जा सकता है। शाकाहारी विकल्पों में अखरोट, अलसी और चिया सीड्स शामिल हैं।
इन खाद्य पदार्थों को सामान्य संतुलित डाइट के हिस्से के रूप में लिया जा सकता है, लेकिन इन्हें अस्थमा का इलाज नहीं समझना चाहिए।
साबुत अनाज और दालें
ओट्स, ब्राउन राइस, दलिया और अन्य साबुत अनाज फाइबर के अच्छे स्रोत हो सकते हैं। इसके अलावा दाल, चना, राजमा और अन्य फलियां भी प्रोटीन और फाइबर उपलब्ध कराती हैं।
एक संतुलित भोजन में पर्याप्त प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, स्वस्थ वसा, फल और सब्जियों को शामिल करना महत्वपूर्ण है।
पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी
मौसम बदलने पर शरीर को पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ मिलना जरूरी है। पानी को प्राथमिकता दें और अपनी प्यास के अनुसार पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें।
हालांकि, केवल पानी पीने से अस्थमा के अटैक को रोकने की गारंटी नहीं होती। सांस की समस्या होने पर डॉक्टर की सलाह और निर्धारित उपचार का पालन करना सबसे महत्वपूर्ण है।
किन चीजों से सावधान रहें?
अस्थमा के ट्रिगर हर व्यक्ति में अलग हो सकते हैं। किसी व्यक्ति को धूल या परागकण से परेशानी हो सकती है, जबकि किसी अन्य को धुआं, ठंडी हवा या किसी विशेष खाद्य पदार्थ से समस्या हो सकती है।
अगर किसी खाने के बाद बार-बार सांस लेने में परेशानी, खांसी या सीने में जकड़न महसूस होती है, तो उसे खुद से पूरी तरह बंद करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लें। बिना जरूरत कई खाद्य पदार्थों को डाइट से हटाने से पोषण की कमी हो सकती है।
दवाओं को न करें नजरअंदाज
अस्थमा में खान-पान सहायक भूमिका निभा सकता है, लेकिन बीमारी को नियंत्रित करने के लिए डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं और इनहेलर का सही इस्तेमाल जरूरी है। मौसम बदलने पर अगर लक्षण सामान्य से ज्यादा बढ़ रहे हैं, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
अगर सांस लेने में बहुत ज्यादा परेशानी हो, बोलने में दिक्कत हो या निर्धारित रिलीवर दवा से राहत न मिले, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
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