Updated: Friday, October 2, 2026, 18:57 [IST]
Asian Games 2026 India Women Hockey Team Win Gold: भारतीय महिला हॉकी टीम ने एशियन गेम्स में इतिहास रच दिया है। नागोया में शुक्रवार (2 अक्टूबर) को खेले गए फाइनल में भारत ने चीन को 1-0 से हराकर 44 साल बाद स्वर्ण पदक अपने नाम किया। मुकाबले का इकलौता गोल लालरेमसियामी ने 10वें मिनट में किया। इसके साथ ही भारतीय टीम ने 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक के लिए सीधे क्वालिफाई भी कर लिया।
भारत ने आखिरी बार 1982 में नई दिल्ली में हुए एशियन गेम्स में महिला हॉकी का गोल्ड जीता था। उस समय एलिजा नेल्सन की कप्तानी में टीम चैंपियन बनी थी। अब चार दशक से ज्यादा के इंतजार के बाद भारतीय टीम ने फिर एशिया के शीर्ष स्थान पर वापसी की है।
फाइनल में भारत ने चीन को कैसे हराया?
मैच की शुरुआत में चीन ने भारतीय डिफेंस पर दबाव बनाया। उसके खिलाड़ी लगातार भारतीय सर्कल में घुसने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन भारत की रक्षापंक्ति ने जगह नहीं छोड़ी। इसी बीच 10वें मिनट में भारत को गोल करने का मौका मिला। सलीमा टेटे ने आक्रमण को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। इसके बाद साक्षी के पास पर लालरेमसियामी ने रिवर्स हिट लगाया। गेंद सीधे गोलपोस्ट के ऊपरी हिस्से में जा लगी और भारत को 1-0 की बढ़त मिल गई। इसके बाद चीन ने बराबरी के लिए हमले तेज किए, लेकिन भारतीय टीम ने अपनी बढ़त बचाए रखी।
Savita Punia ने पेनल्टी स्ट्रोक रोककर बचाई बढ़त
दूसरे क्वार्टर में चीन ने दबाव बढ़ाया। भारतीय गोलपोस्ट के सामने कई मौके बने और टीम को पेनल्टी कॉर्नर का सामना भी करना पड़ा। भारत की ओर से नवनीत ने गोल लाइन पर चीन के एक प्रयास को रोका। मैच का अहम मोड़ 23वें मिनट में आया। भारत की सुशीला के खिलाफ फाउल दिए जाने के बाद चीन को पेनल्टी स्ट्रोक मिला। गोल के सामने भारतीय कप्तान और गोलकीपर सविता पुनिया थीं। उन्होंने बाईं ओर डाइव लगाकर झांग यिंग का शॉट रोक दिया। इस बचाव ने भारत की 1-0 की बढ़त कायम रखी। हाफ टाइम तक स्कोर भारत के पक्ष में रहा।
तीसरे क्वार्टर में चीन का दबाव, भारत का डिफेंस मजबूत
तीसरे क्वार्टर में चीन ने गेंद पर ज्यादा नियंत्रण रखा और लगातार भारतीय सर्कल में पहुंचने की कोशिश की। भारतीय खिलाड़ियों को अधिकतर समय डिफेंस करना पड़ा। सलीमा टेटे ने रक्षापंक्ति में अहम भूमिका निभाई और चीन के हमलों को रोकने में मदद की। 43वें मिनट में चीन को एक और मौका मिला, लेकिन भारतीय डिफेंस ने खतरा टाल दिया। भारत ने इस दौरान आक्रामक मौके कम बनाए, लेकिन खिलाड़ियों ने संयम नहीं खोया। तीसरे क्वार्टर के बाद भी भारत 1-0 से आगे था।
आखिरी मिनटों में चीन ने गोलकीपर हटाया, भारत ने बढ़त बचाई
आखिरी 15 मिनट में चीन ने बराबरी के लिए पूरा जोर लगा दिया। मैच खत्म होने से कुछ मिनट पहले उसने गोलकीपर को हटाकर एक अतिरिक्त खिलाड़ी मैदान में उतारा। इस रणनीति के तहत चीन ने भारतीय गोल पर हमले तेज किए, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली। भारत को भी जवाबी हमले का मौका मिला। सलीमा टेटे तेजी से आगे बढ़ीं, लेकिन टीम दूसरा गोल नहीं कर सकी। दूसरी ओर, सविता और भारतीय डिफेंस ने चीन के आखिरी प्रयासों को नाकाम कर दिया। अंतिम सीटी बजते ही भारत ने 1-0 से मुकाबला जीतकर स्वर्ण पदक पक्का कर लिया।
1982 के बाद पहली बार महिला हॉकी में गोल्ड
एशियन गेम्स में भारतीय महिला हॉकी टीम ने इससे पहले 1982 में स्वर्ण पदक जीता था। इसके बाद टीम को लंबे समय तक इस खिताब का इंतजार करना पड़ा। 2026 में चीन को हराकर भारत ने अपना दूसरा एशियन गेम्स महिला हॉकी गोल्ड हासिल किया। यह जीत इसलिए भी अहम है क्योंकि इससे भारतीय टीम को लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक में सीधे प्रवेश मिल गया है। यानी एशियन गेम्स का गोल्ड भारत के लिए सिर्फ पदक नहीं, बल्कि ओलंपिक का टिकट भी लेकर आया।
हांगझोऊ की हार के बाद भारत की वापसी
पिछले एशियन गेम्स यानी हांगझोऊ में चीन ने सेमीफाइनल में भारत को 4-0 से हराया था। इस बार फाइनल में भारत ने उसी टीम को हराकर खिताब जीता। दोनों टीमों के बीच मुकाबला कड़ा रहा, लेकिन भारत ने शुरुआती बढ़त बनाने के बाद उसे अंत तक कायम रखा। इस जीत में लालरेमसियामी का गोल, सविता पुनिया का पेनल्टी स्ट्रोक बचाना और पूरी टीम का रक्षात्मक अनुशासन निर्णायक रहा।