Ashadha Gupt Navratri 2026: 15 या 16 जुलाई, आषाढ़ गुप्त नवरात्रि कब से, कैसे करें घट स्थापना? जानें मुहूर्त, विधि और मंत्र

Published on 14 जुल॰ 2026

24

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 घट स्थापना मुहूर्त

Image Credit : Getty

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 घट स्थापना मुहूर्त

34

गुप्त नवरात्रि घट स्थापना और पूजा विधि

Image Credit : Getty

गुप्त नवरात्रि घट स्थापना और पूजा विधि

- गुप्त नवरात्रि में घट स्थापना सिर्फ देवी के साधक ही करते हैं। गृहस्थों को इस नवरात्रि में घट स्थापना नहीं करना चाहिए।
- घट स्थापना के लिए सबसे पहले सभी जरूर चीजें एक स्थान पर इकट्ठा कर लें। शुभ मुहूर्त से पहले पूजा स्थान को पवित्र कर लें।
- शुभ मुहूर्त में लकड़ी के पटिए पर ऊपर लाल कपड़ा बिछाएं। तांबे के कलश में शुद्ध जल भरकर पटिए पर रख दें।
- कलश पर स्वस्तिक का चिह्न बनाएं और पूजा का धागा बांधे। कलश में चंदन, रोली, हल्दी, फूल, दूर्वा आदि चीजें डालें।
- इस कलश के ऊपर नारियल रखकर इसे ढंक दें और नीचे लिखा मंत्र बोलकर कलश स्थापना करें- ऊं नमश्चण्डिकाये।
- कलश के पास देवी का एक चित्र रखें। शुद्ध घी का दीपक लगाएं और अपनी इच्छा अनुसार देवी को भोग लगाएं।
- गुप्त नवरात्रि के दौरान यानी 23 जुलाई तक रोज इस कलश और देवी प्रतिमा की विधि-विधान से पूजा करें।
- गुप्त नवरात्रि के बाद इस कलश को नदी या तालाब में प्रवाहित कर दें। साथ ही अन्य पूजन सामग्री भी।
-इस तरह गुप्त नवरात्रि में कलश स्थापना करने और देवी की पूजा करने से आपकी हर मनोकामना पूरी हो सकती है।

44

मां दुर्गा की आरती (Devi Durga Ki Aarti)

Image Credit : Getty

मां दुर्गा की आरती (Devi Durga Ki Aarti)

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशिदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिव री ॥1॥ जय अम्बे…
माँग सिंदुर विराजत टीको मृगमदको।
उज्ज्वल से दोउ नैना, चन्द्रवदन नीको ॥2॥ जय अम्बे.…
कनक समान कलेवर रक्ताम्बर राजै।
रक्त-पुष्प गल माला, कण्ठनपर साजै ॥3॥ जय अम्बे…
केहरी वाहन राजत, खड्ग खपर धारी।
सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुखहरी ॥4॥ जय अम्बे…
कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटिक चन्द्र दिवाकर, सम राजत ज्योती ॥5॥ जय अम्बे…
शुंभ निशुंभ विदारे, महिषासुर-धाती।
धूम्रविलोचन नैना निशिदिन मदमाती ॥6॥ जय अम्बे…
चण्ड मुण्ड संहारे, शोणितबीज हरे।
मधु कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे ॥7॥ जय अम्बे…
ब्रह्माणी, रूद्राणी तुम कमलारानी।
आगम-निगम-बखानी, तुम शिव पटरानी ॥8॥ जय अम्बे…
चौसठ योगिनि गावत, नृत्य करत भैरूँ।
बाजत ताल मृदंगा औ बाजत डमरू ॥9॥ जय अम्बे…
तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।
भक्तन की दुख हरता सुख सम्पति करता ॥10॥ जय अम्बे…
भुजा चार अति शोभित, वर मुद्रा धारी।
मनवाञ्छित फल पावत, सेवत नर-नारी ॥11॥ जय अम्बे…
कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
(श्री) मालकेतु में राजत कोटिरतन ज्योती ॥12॥ जय अम्बे…
(श्री) अम्बेजी की आरती जो कोई नर गावै।
कहत शिवानंद स्वामी, सुख सम्पति पावै ॥13॥ जय अम्बे...


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

धार्मिक परंपराओं, मंदिरों, त्योहारों, यात्रा स्थलों और आध्यात्मिक ज्ञान से जुड़ी खबरें पढ़ें। पूजा पद्धति, पौराणिक कथाएं और व्रत-त्योहार अपडेट्स के लिए Religion News in Hindi सेक्शन देखें — आस्था और संस्कृति पर सटीक और प्रेरक जानकारी।