हाईकोर्ट ने AMICE डिग्री को AMIE के समकक्ष मानने से किया इनकार, 3 रिट याचिकाएं खारिज

Published on 8 सित॰ 2026

Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने जूनियर इंजीनियरों की ओर से दायर तीन रिट याचिकाओं को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि Institution of Civil Engineers (India), Ludhiana से प्राप्त AMICE योग्यता को AMIE के समकक्ष घोषित नहीं किया जा सकता. मामले में राजीव कुमार एवं अन्य ने याचिका दायर की थी. 


हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रोशन कोर्ट ने मामले में आदेश सुनाते हुए कहा कि किसी शैक्षणिक योग्यता की समकक्षता तय करना विशेषज्ञ शैक्षणिक संस्थाओं और सक्षम सरकारी प्राधिकरण का विषय है, न्यायालय स्वयं किसी डिग्री को दूसरी डिग्री के बराबर घोषित नहीं कर सकता. अदालत ने कहा कि वर्तमान मामले में ऐसा कोई दस्तावेज, अधिसूचना, आदेश या सक्षम प्राधिकारी का निर्णय पेश नहीं किया गया, जिससे यह साबित हो कि AMICE को AMIE के बराबर घोषित किया गया है. 


अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता यह साबित करने में विफल रहे हैं कि AMICE योग्यता 10 प्रतिशत पदोन्नति कोटे के लिए AMIE के समकक्ष है. प्रतिवादियों की ओर से अधिवक्ता अर्पण मिश्रा ने पक्ष रखा. 

डीपीसी छह सप्ताह में बुलाने का निर्देश

कोर्ट ने कहा कि 5 मई 2026 के अंतरिम आदेश के कारण विभागीय प्रोन्नति समिति (DPC) की बैठक नहीं हो सकी थी. वहीं सरकार ने 6 जुलाई 2026 के सर्कुलर के जरिए DPC की बैठक साल में केवल एक बार जुलाई महीने में कराने का प्रावधान किया था. इस स्थिति को देखते हुए अदालत ने राज्य सरकार को छह सप्ताह के भीतर DPC की बैठक बुलाकर सभी पात्र उम्मीदवारों को पदोन्नति देने का निर्देश दिया.

 10 प्रतिशत पदोन्नति कोटा में AMIE की मांग

याचिकाकर्ता विभिन्न विभागों में कार्यरत डिप्लोमा धारक जूनियर इंजीनियर हैं. उन्होंने Institution of Civil Engineers (India), Ludhiana से AMICE डिग्री हासिल की थी. उनका दावा था कि AMICE को AMIE के समकक्ष माना जाए और उन्हें सहायक अभियंता के पद पर पदोन्नति के लिए निर्धारित 10 प्रतिशत AMIE या समकक्ष योग्यता कोटे का लाभ दिया जाए. वहीं राज्य सरकार की ओर से कहा गया था कि झारखंड में सहायक अभियंता पद पर नियुक्ति एवं पदोन्नति के लिए निर्धारित नियमों में केवल मान्यता प्राप्त संस्थान से इंजीनियरिंग डिग्री या AMIE को स्वीकार किया गया है. 

सरकार ने 20 दिसंबर 2010, 2 सितंबर 2013 और 3 मई 2019 के विभागीय आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि Institution of Civil Engineers और Institution of Mechanical Engineers (India) की ऐसी योग्यताओं को सहायक अभियंता पद के लिए मान्यता नहीं दी गई है.


AICTE ने बताया- सिर्फ 2007-08 सत्र तक थी मान्यता

मामले में AICTE की ओर से दाखिल हलफनामे को भी हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण माना. AICTE ने बताया कि केंद्र सरकार के 3 मार्च 2023 के पत्र के अनुसार Institution of Civil Engineers, Ludhiana को केवल शैक्षणिक सत्र 2007-08 के लिए मान्यता दी गई थी और उसके बाद मान्यता का विस्तार नहीं किया गया.


कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने स्वयं अपनी याचिका में बताया है कि उन्होंने इस संस्थान में वर्ष 2008 से 2013 के बीच नामांकन लिया था. ऐसे में जिस अवधि में उन्होंने योग्यता हासिल की, उस समय संस्थान को वैध मान्यता प्राप्त होने का आधार रिकॉर्ड पर नहीं है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सिर्फ पाठ्यक्रम में समानता के आधार पर दो डिग्रियों को समान नहीं माना जा सकता. किसी योग्यता को दूसरी योग्यता के समकक्ष मानने के लिए सक्षम प्राधिकरण का विशिष्ट आदेश या प्रस्ताव होना जरूरी है.

28 प्रतिशत कोटे से पदोन्नति का रास्ता खुला

कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ताओं का AMIE कोटे के तहत पदोन्नति पर कोई निरपेक्ष या अर्जित अधिकार नहीं है. हालांकि उन्हें पदोन्नति के सभी रास्तों से बाहर नहीं किया गया है. वर्ष 2009 के संकल्प में AMIE/समकक्ष योग्यता वाले 10 प्रतिशत कोटे के अलावा अन्य जूनियर इंजीनियरों के लिए 28 प्रतिशत सामान्य पदोन्नति कोटा भी है. याचिकाकर्ता उस कोटे के तहत पात्र होने पर पदोन्नति के लिए विचार किए जा सकते हैं. कोर्ट ने 5 मई 2026 को याचिकाकर्ताओं के पक्ष में पारित अंतरिम आदेश को समाप्त कर दिया.

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