देवरिया के गौरी बाजार थाने में चार लोगों को करीब 10 दिनों तक अवैध हिरासत में रखने और थाने का सीसीटीवी कैमरा खराब होने की दलील देने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने देवरिया पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि माफी अदालत से नहीं बल्कि हिरासत में प्रताड़ित हुए लोगों से मांगिए। साथ ही कोर्ट ने पीड़ितों को ₹65 हजार का मुआवजा संबंधित एसएचओ के वेतन से काटकर देने का आदेश दिया है।
देवरिया एसपी को हाईकोर्ट की कड़ी फटकार कहा SHO सस्पेंड क्यों नहीं हुआ (फाइल फोटो)
- Published: 09 Sep 2026, 03:54 PM IST
- Last Updated: 09 Sep 2026, 03:54 PM IST
प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने देवरिया जिले के गौरी बाजार थाने में चार नागरिकों को करीब 10 दिनों तक कथित तौर पर गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में रखने के मामले में पुलिस प्रशासन के खिलाफ बेहद सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस अतुल श्रीधरन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान देवरिया के पुलिस अधीक्षक एसपी और गौरी बाजार थाने के एसएचओ को व्यक्तिगत रूप से तलब करते हुए जमकर फटकार लगाई। पुलिस द्वारा थाने के सीसीटीवी कैमरे खराब होने की दलील दिए जाने पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जताई और तल्ख टिप्पणी करते हुए जवाबदेह अफसरों को 'झूठों का झुंड' करार दिया।
माफी कोर्ट से नहीं, प्रताड़ित याचियों से मांगिए
सुनवाई के दौरान जब देवरिया एसपी ने अदालत के समक्ष बिना शर्त माफी मांगी, तो कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा, "माफी अदालत से मत मांगिए, बल्कि उन निर्दोष नागरिकों से मांगिए जिन्हें इतने दिनों तक अवैध रूप से थाने की हिरासत में बंधक बनाकर रखा गया।"
अदालत ने एसपी से सीधा सवाल दागा कि जब थाने का सीसीटीवी सिस्टम इतने दिनों से बंद पड़ा था और इतनी घोर लापरवाही बरती जा रही थी, तो संबंधित एसएचओ को अब तक निलंबित क्यों नहीं किया गया?
एसएचओ के वेतन से कटेगा ₹65,000 का मुआवजा
अदालत ने गैर-कानूनी हिरासत को मानवाधिकारों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का खुला उल्लंघन माना। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह पीड़ित याचियों को कुल ₹65,000 की मुआवजा राशि का भुगतान करे। कोर्ट ने आदेश दिया कि तीन याचियों को 20-20 हजार रुपये और एक याची को 5 हजार रुपये दिए जाएं। सबसे अहम बात यह है कि अदालत ने इस पूरी रकम को संबंधित एसएचओ के वेतन से वसूलने का सख्त निर्देश जारी किया है।
यह था पूरा मामला
यह पूरा प्रकरण देवरिया के गौरी बाजार थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जहां याची महेंद्र गौड़ और तीन अन्य लोगों की ओर से हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण Habeas Corpus याचिका दायर की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि पुलिस ने चारों याचियों को 13 अप्रैल से 24 अप्रैल के बीच गौरी बाजार थाने में पूरी तरह अवैध रूप से बंधक बनाए रखा। इनमें से कुछ को 10 दिन तो कुछ को उससे कम अवधि के लिए थाने में रखा गया था।
सीसीटीवी फुटेज मांगने पर पुलिस ने दिया था बहाना
याचिका में लगाए गए गंभीर आरोपों की सत्यता जांचने के लिए हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई में पुलिस स्टेशन के भीतर लगे सभी सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग और फुटेज पेश करने का आदेश दिया था।
हालांकि, राज्य सरकार और पुलिस की ओर से कोर्ट को यह बताया गया कि कथित घटना से ठीक पहले के दिनों में थाने के डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर और सीसीटीवी सिस्टम में तकनीकी खराबी आ गई थी, जिसके चलते रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं है। पुलिस के इस तर्क पर अदालत बिफर पड़ी और देवरिया एसपी तथा एसएचओ को अदालत में हाजिर होने का आदेश दिया था, जिसके बाद यह कड़ी कार्रवाई देखने को मिली।