Deoghar Baba: पहली बार मेले में भीड़ पर नजर रखने और उसे बेहतर तरीके से नियंत्रित करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल किया जाएगा। 30 जुलाई से शुरू होकर एक महीने तक चलने वाले इस मेले में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है।
Deoghar Baba: पहली बार मेले में भीड़ पर नजर रखने और उसे बेहतर तरीके से नियंत्रित करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल किया जाएगा। 30 जुलाई से शुरू होकर एक महीने तक चलने वाले इस मेले में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है।
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Deoghar Baba temple
Deoghar Baba: इस बार देवघर का श्रावणी मेला सिर्फ आस्था का नहीं, बल्कि हाईटेक सुरक्षा व्यवस्था का भी गवाह बनेगा। पहली बार मेले में भीड़ पर नजर रखने और उसे बेहतर तरीके से नियंत्रित करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल किया जाएगा। 30 जुलाई से शुरू होकर एक महीने तक चलने वाले इस मेले में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। इसी को देखते हुए झारखंड पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। डीजीपी और आईजी ऑपरेशन लगातार तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं, ताकि श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के बाबा बैद्यनाथ के दर्शन कर सकें और सुरक्षित अपने घर लौटें।
AI से होगी निगरानी
इस बार देवघर श्रावणी मेले में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हाईटेक तकनीक का सहारा लिया जाएगा। पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से 24 घंटे कंट्रोल रूम से मेले की निगरानी होगी। झारखंड के डीजीपी ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को 20 अहम निर्देश दिए हैं। शहर में जरूरत से ज्यादा भीड़ न हो, इसके लिए रूट प्लान तैयार किया गया है। अगर श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती है तो बिहार से आने वाले श्रद्धालुओं को प्रवेश बिंदुओं पर कुछ समय के लिए रोककर वहां जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
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रेलवे स्टेशनों पर रहेगी नजर
धनबाद, देवघर, दुमका और अन्य रेलवे स्टेशनों पर भी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए यात्रियों के ठहरने की व्यवस्था की जाएगी। वहीं, किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए वैकल्पिक रास्ते पहले से तैयार रखे जाएंगे। मंदिर परिसर में भीड़ न बढ़े, इसके लिए रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की तैनाती रहेगी, ताकि श्रद्धालुओं का आवागमन बिना रुकावट जारी रहे।
हादसों को देखते हुए अलर्ट
श्रावणी मेले के इतिहास में कई बार बड़े हादसे भी हो चुके हैं। साल 2006 में बाबा मंदिर परिसर में भीड़ नियंत्रण को लेकर पुलिस और पंडा समाज के बीच झड़प हुई थी, जिसमें 30 पुलिसकर्मी और 10 पंडे घायल हो गए थे। 2007 में उमा भवन की सीढ़ियों पर फिसलने से भगदड़ मच गई, जिसमें दम घुटने से पांच महिला श्रद्धालुओं की मौत हो गई।
2008 में मंदिर के गर्भगृह में करंट लगने से दो कांवरिये झुलस गए थे। वहीं, 10 अगस्त 2015 को बेलपत्र प्रदर्शनी के दौरान मची भगदड़ में 10 कांवरियों की जान चली गई थी और 20 से ज्यादा श्रद्धालु घायल हुए थे। इन्हीं घटनाओं से सबक लेते हुए इस बार प्रशासन सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को लेकर पहले से ज्यादा सतर्क है।
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DGP ने बताई तैयारियां
झारखंड पुलिस ने साफ कहा है कि इस बार श्रावणी मेले में आने वाले हर श्रद्धालु की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी। डीजीपी तदाशा मिश्र ने बताया कि मेले को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं। श्रद्धालुओं के सुचारु आवागमन के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं और जरूरत के मुताबिक पुलिस अधिकारियों व जवानों की तैनाती की गई है। उन्होंने कहा कि इस बार भीड़ प्रबंधन पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है, ताकि श्रद्धालुओं को बिना किसी परेशानी के बाबा बैद्यनाथ के दर्शन हो सकें।