राजसमंद में श्रावण माह के पहले सोमवार को धनेश्वर महादेव का दूध से रूद्राभिषेक किया गया।
राजसमंद में सावन के पहले सोमवार पर 975 साल पुराने गुप्तेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धा का सैलाब उमड़ा। 135 फीट लंबी गुफा से होकर श्रद्धालु स्वयंभू शिवलिंग के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचे। जिले के चौमुखा महादेव, धनेश्वर महादेव और रामेश्वर महादेव समेत
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गुप्तेश्वर महादेव मंदिर में स्वयं भू प्राचीन शिवलिंग।
135 फीट लंबी गुफा से होकर पहुंचते हैं श्रद्धालु
कांकरोली के मुख्य बाजार में राजसमंद झील की प्राचीन पाल के नीचे भूगर्भ में स्थित 975 वर्ष पुराना स्वयंभू गुप्तेश्वर महादेव मंदिर अपनी ऐतिहासिक और धार्मिक विशेषता के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को 135 फीट लंबे गुफा मार्ग से होकर गुजरना पड़ता है।
पहले यह मंदिर बालेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता था। बाद में जब राजसमंद झील की पाल का निर्माण हुआ, तब मंदिर पाल के बीच में आ रहा था। उस समय के शासक महाराणा राजसिंह ने मंदिर को हटाने के बजाय 135 फीट लंबी गुफा बनवाकर उसे सुरक्षित रखा और उसके ऊपर पाल का निर्माण कराया। इसके बाद से यह मंदिर गुप्तेश्वर महादेव के नाम से प्रसिद्ध हो गया।

गुफा में जब प्रवेश करने पर इस तरह से गुफा मार्ग दिखाई देता है।
स्वयंभू शिवलिंग के साथ शिव परिवार और गणपति विराजमान
गुप्तेश्वर महादेव मंदिर में स्वयंभू शिवलिंग के साथ शिव परिवार और भगवान गणपति विराजमान हैं। गुफा के बाहर हनुमानजी और संतोषी माता के अलग मंदिर भी बने हुए हैं। वर्षभर प्रत्येक सोमवार और विशेष रूप से सावन माह में यहां सुबह 4 बजे से शाम तक श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहती हैं। सावन के पहले सोमवार को भी सुबह से बड़ी संख्या में भक्त दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचे।
धनेश्वर महादेव में सुबह 4 बजे से रुद्राभिषेक
शहर के धनेश्वर महादेव, चौमुखा महादेव, रामेश्वर महादेव सहित जिले के अन्य शिवालयों में भी श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बना। नो चौकी रोड स्थित धनेश्वर महादेव मंदिर में सुबह 4 बजे से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया। यहां सबसे पहले दूध से रुद्राभिषेक किया गया, जिसके बाद दिनभर जलाभिषेक और पूजा-अर्चना का क्रम चलता रहा।
रामेश्वर महादेव में विशेष झांकी ने मोहा मन
राष्ट्रीय राजमार्ग के समीप पहाड़ी पर प्राकृतिक और रमणीय वातावरण में स्थित रामेश्वर महादेव मंदिर में सावन के प्रथम सोमवार पर भगवान भोलेनाथ की विशेष झांकी सजाई गई। समिति ट्रस्ट मंडल के संयोजक सत्येंद्र बड़ोला ने बताया कि भगवान शिव का आकर्षक पुष्प श्रृंगार किया गया। साथ ही श्रीनाथजी प्रभु को चंदन के हिंडोले में विराजित कर श्रद्धालुओं को विशेष दर्शन कराए गए, जिसने सभी का मन मोह लिया।