अलीगढ़ में 9 हजार वोटर घटे: 25% की पोलिंग सेंटर मैपिंग पर सवाल; 23 अक्टूबर को मतदान - Aligarh News

Published on 17 अक्टू॰ 2026

विधान परिषद की आगरा स्नातक सीट पर 23 अक्टूबर को मतदान होना है। चुनाव प्रचार अब अंतिम दौर में है। भाजपा और सपा समेत सभी दलों ने अपनी पूरी ताकत लगा दी है। हालांकि, अलीगढ़ में प्रत्याशियों के सामने प्रचार के साथ दो बड़ी चुनौतियां हैं।

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पहली, पिछले चुनाव के मुकाबले करीब 9 हजार मतदाता कम हो गए हैं। दूसरी, करीब 25% मतदाताओं के पोलिंग सेंटर की मैपिंग में गड़बड़ी की शिकायत है। ऐसे में प्रत्याशियों और कार्यकर्ताओं को वोट मांगने के साथ मतदाताओं को उनके मतदान केंद्र की सही जानकारी भी देनी पड़ रही है।

12 जिलों में 1.92 लाख मतदाता

आगरा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में 12 जिले शामिल हैं। अंतिम मतदाता सूची के अनुसार, पूरी सीट पर करीब 1.92 लाख मतदाता हैं। इनमें अलीगढ़ करीब 38 हजार मतदाताओं के साथ सबसे आगे है। आगरा में लगभग 25 हजार और इटावा में करीब 20 हजार मतदाता हैं। अलीगढ़ में सबसे ज्यादा वोटर होने के कारण यहां के चुनावी समीकरण का असर पूरी सीट पर पड़ सकता है।

पिछले चुनाव के मुकाबले 9 हजार वोटर कम

पिछले स्नातक एमएलसी चुनाव में अलीगढ़ में करीब 47 हजार मतदाता थे। इस बार अंतिम सूची में इनकी संख्या घटकर लगभग 38 हजार रह गई है।

यानी करीब 8 से 9 हजार मतदाता कम हो गए हैं। इसे लेकर भाजपा और सपा समर्थक अलग-अलग तर्क दे रहे हैं। भाजपा का कहना है कि उसने बड़ी संख्या में मतदाता बनवाए हैं।

वहीं, सपा समर्थक प्रत्याशी की घोषणा देर से होने के कारण मतदाता बनाने के अभियान में परेशानी आने की बात कह रहे हैं। हालांकि, मतदाताओं की संख्या घटने की वास्तविक वजह स्पष्ट नहीं है।

मानवेंद्र प्रताप सिंह और शशांक यादव के बीच मुकाबला

आगरा स्नातक सीट पर भाजपा ने मौजूदा एमएलसी डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह को दोबारा मैदान में उतारा है। सपा से शशांक यादव चुनाव लड़ रहे हैं। इनके अलावा अवागढ़ राजपरिवार से जुड़े अंबरीश पाल सिंह भी मैदान में हैं। आजाद समाज पार्टी के प्रत्याशी दक्ष यादव भी चुनाव लड़ रहे हैं। राजनीतिक हलकों में इन प्रत्याशियों की मौजूदगी को सजातीय वोटों के संभावित बंटवारे से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, इसका वास्तविक असर मतदान के बाद ही पता चलेगा।

25% मतदाताओं के पोलिंग सेंटर पर शिकायत

अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद मतदान केंद्रों की मैपिंग को लेकर सवाल उठे हैं। प्रत्याशियों और उनके समर्थकों का दावा है कि करीब 25% मतदाताओं के पोलिंग सेंटर उनके निवास क्षेत्र से दूर हैं। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

मतदाताओं को मतदान केंद्र खोजने में परेशानी न हो, इसके लिए भाजपा ने मैपिंग सूची जारी की है। कार्यकर्ता घर-घर पहुंचकर मतदाताओं को उनके मतदान केंद्र की जानकारी दे रहे हैं। सपा भी जनसंपर्क के जरिए मतदाताओं तक पहुंचने में जुटी है।

मतदान से पहले बढ़ी सक्रियता

अलीगढ़ में मतदाताओं की संख्या में कमी और पोलिंग सेंटर की मैपिंग को लेकर उठे सवाल चुनावी तैयारियों के अहम मुद्दे बन गए हैं। अब प्रत्याशियों की कोशिश ज्यादा से ज्यादा मतदाताओं तक पहुंचने और उन्हें मतदान के लिए जागरूक करने की है। 23 अक्टूबर को होने वाले मतदान में इन दोनों चुनौतियों का कितना असर पड़ेगा, यह नतीजों के बाद ही स्पष्ट होगा।