एक तरफ ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के दावे किए जा रहे हैं, वहीं उदयपुर जिले के आयुर्वेद औषधालयों की जमीनी हकीकत सरकारी दावों का मखौल उड़ा रही है। जिले में संचालित 184 में से 75 यानी करीब 40 फीसदी डिस्पेंसरियों में शौचालय जैसी बुन
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नतीजतन, यहां इलाज कराने आने वाली महिला मरीजों और दिनभर ड्यूटी देने वाली महिला कर्मचारियों को हर दिन मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है। ग्राम पंचायतों से लेकर जनसुनवाई तक गुहार लगाने के बावजूद जब सुनवाई नहीं हुई तो विभाग ने लाचारी उजागर कर दी। अधिकारियों ने स्टाफ को ही फरमान जारी कर दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र के विधायकों के चक्कर काटें और ‘एमएलए फंड’ से शौचालय बनवाने की गुहार लगाएं। आयुर्वेद केंद्रों पर सुविधाओं के अभाव का सबसे ज्यादा खामियाजा महिला डॉक्टरों को हो रहा है। हाल ही भींडर ब्लॉक की सिहाड़ डिस्पेंसरी में एक महिला डॉक्टर की तैनाती हुई थी। वे पहले दिन ड्यूटी पर पहुंचीं तो वहां न टॉयलेट था, न पीने के पानी का कनेक्शन और न सुरक्षा के लिए बाउंड्रीवॉल। अव्यवस्थाएं देखकर महिला डॉक्टर ने अगले ही दिन वहां से तबादला करवा लिया।
पंचायतों में पत्र भेजे, अभियान में गुहार... समाधान शून्य
फलासिया औषधालय: डॉ. राकेश मीणा ने बताया कि टॉयलेट्स नहीं है, काफी परेशानी हो रही है। इन निर्माण का एस्टीमेट डीडी ऑफिस में दिया है। वहां से कहा गया है कि पूरा भवन ही नया बनेगा। यहां जो निरीक्षण दल कुछ दिनों पहले आया था, उसे भी इसकी जानकारी दी गई है।
सिंदु डिस्पेंसरी (मावली): स्टाफ ने बताया कि अस्पताल में शौचालय न होने से महिला स्टाफ और दूर-दराज से आने वाली महिला मरीजों को गंभीर समस्या होती है। ग्राम पंचायत को दर्जनों बार लिखित में आवेदन दिए, लेकिन नतीजा सिफर रहा।
सिहाड़ (भींडर): कंपाउंडर राधेश्याम मेघवाल के मुताबिक, सुविधाओं के लिए प्रशासन गांवों के संग अभियान से लेकर ब्लॉक स्तरीय जनसुनवाइयों तक में कई बार लिखित शिकायतें दी गईं, लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई।
कुंथवास डिस्पेंसरी (भींडर): कर्मचारियों का कहना है कि वे तीन साल से यहां पदस्थ हैं, लेकिन आज तक टॉयलेट नहीं बना। पंचायत को सूचना दी है, वे बजट आने पर काम कराने का रटा-रटाया जवाब देते हैं।
पुराने औषधालयों में टॉयलेट नहीं, बजट आने तक विधायक निधि सहारा
हमने शासन को बजट के लिए प्रस्ताव भेजा है। चूंकि ये काफी पुराने औषधालय हैं, इसलिए इनमें पहले से शौचालय नहीं बने थे। जब तक शासन से बजट मंजूर नहीं होता, तब तक सभी प्रभारियों को पत्र जारी कर निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्र के विधायकों से संपर्क करें और MLA फंड से राशि स्वीकृत कराने का प्रयास करें ताकि जल्द निर्माण हो सके। -डॉ. भानुकुमार जैन, उप निदेशक (आयुर्वेद), उदयपुर