विश्वविद्यालय कुलपति को मिला ‘माटी सम्मान-9’: 70 से ज्यादा गेहूं किस्में विकसित कर ‘व्हीट मैन ऑफ इंडिया’ डॉ ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह - Ayodhya News

Published on 11 अक्टू॰ 2026

विजय पाठक | अयोध्या14 घंटे पहले

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आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुमारगंज के कुलपति डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह को एक और बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार-2025 से सम्मानित होने के बाद उन्हें लखनऊ के संगीत नाटक अकादमी में आयोजित पूर्वांचल महोत्सव में प्रतिष्ठित ‘माटी सम्मान-9’ से नवाजा गया। इसकी जानकारी सोमवार को विश्वविद्यालय प्रशासन ने दी।

पूर्वांचल की कला, संस्कृति और विकास के लिए समर्पित संस्था ‘माटी’ की ओर से आयोजित समारोह में उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया।

डॉ. सिंह को यह सम्मान भारतीय शैक्षणिक क्षेत्र, उच्च शिक्षा और कृषि शिक्षा के विकास में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया गया। उनके सम्मानित होने पर विश्वविद्यालय परिवार के शिक्षकों, वैज्ञानिकों, कर्मचारियों और छात्र-छात्राओं ने प्रसन्नता व्यक्त की। महोत्सव में लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों के साथ साहित्यिक संवाद तथा पूर्वांचली संस्कृति और खान-पान की झलक भी देखने को मिली।

गाजीपुर जिले के उधरन गांव निवासी डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में देश-विदेश में अपनी पहचान बना चुके हैं। वह राष्ट्रीय पादप आनुवांशिक संसाधन ब्यूरो, नई दिल्ली और भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल के निदेशक पद पर भी कार्य कर चुके हैं। उन्होंने किसानों के लिए गेहूं की 70 से अधिक किस्में विकसित करने में योगदान दिया है। इनमें 10 जैविक किस्में भी शामिल बताई गई हैं। उनकी विकसित किस्मों के व्यापक प्रसार के कारण उन्हें ‘व्हीट मैन ऑफ इंडिया’ के नाम से जाना जाता है।

डॉ. सिंह को हाल ही में राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार-2025 से सम्मानित किया था। वह वैज्ञानिकों और शिक्षण कर्मियों की भर्ती से जुड़ी विभिन्न चयन समितियों तथा राज्य चयन बोर्डों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं।

कुलपति डॉ. सिंह ने कहा कि ‘माटी सम्मान-9’ मिलना उनके लिए गौरव और प्रसन्नता का विषय है। उनका प्रयास रहेगा कि उच्च शिक्षा और कृषि शिक्षा को गुणवत्तापूर्ण, रोजगारपरक तथा अनुसंधान आधारित बनाया जाए, जिससे कृषि में नवाचार को बढ़ावा मिले और किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आए।

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