हरदा जिले के सरकारी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के लिए भोजन और नाश्ता तैयार करने वाली स्वसहायता समूह की महिलाओं को पिछले तीन महीने से भुगतान नहीं मिला है। अपनी समस्याओं को लेकर महिलाएं जिला पंचायत पहुंचीं और महिला एवं बाल विकास अधिकारी स
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471 समूहों की 8600 महिलाएं कर रहीं काम
जिले में 471 स्वसहायता समूहों से जुड़ी करीब 8600 महिलाएं आंगनबाड़ी केंद्रों और प्राथमिक स्कूलों में बच्चों के लिए भोजन तैयार कर रही हैं। महिलाओं के मुताबिक उन्हें 15 जून तक का ही भुगतान मिला है। जुलाई, अगस्त और सितंबर की राशि अभी तक उनके खातों में नहीं पहुंची है।
महिलाओं का कहना है कि नियमित भुगतान नहीं होने से घर का खर्च चलाने के साथ भोजन बनाने के लिए जरूरी सामग्री खरीदना भी मुश्किल हो रहा है।

स्वसहायता-समूह की महिलाओं को 3 महीने से भुगतान नहीं।
दुकानदारों से उधार लेकर खरीदा सामान, बढ़ा कर्ज
स्वसहायता समूह अध्यक्ष सुनीता डोले ने बताया कि समूहों को हर महीने भुगतान मिलना चाहिए। जिले में कई महिलाओं को तीन से चार महीने से राशि नहीं मिली है। मध्याह्न भोजन और पोषण आहार तैयार करने के लिए दुकानदारों से सामान उधार लेना पड़ रहा है।
उन्होंने बताया कि अब दुकानदार बकाया राशि के लिए बार-बार पैसे मांग रहे हैं। कर्ज बढ़ने के कारण आगे भोजन बनाने के लिए जरूरी सामान जुटाना भी मुश्किल हो रहा है।
46 बच्चों वाली आंगनबाड़ी को 28 किलो गेहूं, 9 किलो चावल
महिलाओं ने खाद्यान्न की मात्रा को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि एक आंगनबाड़ी में 46 बच्चे दर्ज हैं, लेकिन एक महीने के लिए करीब 28 किलो गेहूं और 9 किलो चावल ही मिल रहा है।
वहीं, 30 बच्चों वाली एक आंगनबाड़ी के लिए 18 किलो गेहूं और 4 किलो चावल दिया जा रहा है। महिलाओं का कहना है कि छह दिन के मेन्यू में तीन दिन खिचड़ी और तीन दिन रोटी या पूरी दी जाती है। ऐसे में उनकी मांग है कि बच्चों की संख्या के हिसाब से कम से कम 50 किलो गेहूं और 15 किलो चावल उपलब्ध कराया जाए।
3 से 6 साल के बच्चों को नाश्ता और भोजन
स्वसहायता समूह की महिलाएं सोमवार से शनिवार तक आंगनबाड़ी केंद्रों में तीन से छह साल के बच्चों को नाश्ता और भोजन उपलब्ध कराती हैं। मंगलवार को गर्भवती महिलाओं को भी भोजन दिया जाता है।
सरकार की ओर से एक बच्चे के नाश्ते के लिए 3 रुपए और भोजन के लिए 5 रुपए दिए जाते हैं। भोजन में 20 से 25 ग्राम प्रोटीन और करीब 500 कैलोरी का पोषण देने का प्रावधान है। गर्भवती महिलाओं के लिए 9.50 रुपए में 18 से 20 ग्राम प्रोटीन और 600 कैलोरी का पोषण आहार दिया जाता है।
गैस खत्म होने पर चूल्हा जलाने पर कार्रवाई की धमकी का आरोप
महिलाओं ने गैस सिलेंडर को लेकर भी परेशानी बताई। उनका आरोप है कि सिलेंडर खत्म होने के बाद चूल्हे पर खाना बनाने पर अधिकारी उन्हें समूह से निकालने की धमकी देते हैं। महिलाओं का कहना है कि भुगतान में देरी और खाद्यान्न की कमी के बीच भोजन तैयार करने की जिम्मेदारी निभाना उनके लिए लगातार मुश्किल होता जा रहा है।
महिलाओं की मांग- जल्द खातों में जमा हो राशि
स्वसहायता समूह की महिलाओं ने प्रशासन से जुलाई, अगस्त और सितंबर की लंबित राशि जल्द से जल्द खातों में जमा कराने की मांग की है। उनका कहना है कि भुगतान मिलने से वे दुकानदारों का कर्ज चुका सकेंगी और बच्चों के लिए भोजन एवं पोषण आहार का काम सुचारु रूप से जारी रख सकेंगी।