Updated On: Jul 26, 2026 | 06:00 PM IST
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सार
Mumbai Metro Line 3: मुंबई के महालक्ष्मी में मेट्रो लाइन-3 और मोनोरेल को जोड़ने के लिए पहला ट्रैवलर स्काईवॉक बनाया जा रहा है। इससे 700 मीटर का सफर आसान होगा।

महालक्ष्मी स्काईवॉक (सोर्सः सोशल मीडिया)
विस्तार
Mumbai Traveller Skywalk: मुंबई में सार्वजनिक परिवहन को और अधिक स्मार्ट, तेज और निर्बाध बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया जा रहा है। महालक्ष्मी में मेट्रो लाइन-3 और मोनोरेल को जोड़ने के लिए मुंबई का पहला ट्रैवलर स्काईवॉक बनाया जा रहा है। इस एलिवेटेड स्काईवॉक से दोनों स्टेशनों के बीच लगभग 700 मीटर का पैदल सफर आसान और सुविधाजनक होगा। भविष्य में इसे महालक्ष्मी उपनगरीय रेलवे स्टेशन से भी जोड़कर मेट्रो, मोनोरेल और लोकल रेल के बीच एकीकृत इंटरचेंज विकसित किया जाएगा, जिससे यात्रियों को निर्बाध मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी का लाभ मिलेगा।
मुंबई का पहला ट्रैवलर स्काईवॉक महालक्ष्मी मेट्रो स्टेशन और संत गाडगे महाराज चौक मोनोरेल स्टेशन के बीच बनाया जा रहा है। हवाई अड्डों पर दिखाई देने वाले मूविंग वॉकवे की तर्ज पर इसमें ट्रैवलर लगाया जाएगा, जिससे यात्री चलते हुए या खड़े रहकर भी आसानी से एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन तक पहुंच सकेंगे। यह सुविधा विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों, छोटे बच्चों के साथ यात्रा करने वाले लोगों तथा भारी सामान लेकर चलने वाले यात्रियों के लिए काफी उपयोगी होगी।
पहला एलिवेटेड पब्लिक ट्रैवलर स्काईवॉक
अधिकारियों के अनुसार यह मुंबई का हवाई अड्डे के बाहर बनने वाला पहला एलिवेटेड पब्लिक ट्रैवलर स्काईवॉक होगा। यह परियोजना शहर में मेट्रो, मोनोरेल और अन्य सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों के बीच निर्बाध संपर्क स्थापित करने की व्यापक योजना का हिस्सा है। भविष्य में इस स्काईवॉक को महालक्ष्मी उपनगरीय रेलवे स्टेशन से भी जोड़ा जाएगा। इसके बाद मेट्रो, मोनोरेल और उपनगरीय लोकल रेल के बीच त्रिस्तरीय इंटरचेंज विकसित होगा, जिससे यात्रियों को बिना किसी परेशानी के एक परिवहन प्रणाली से दूसरी प्रणाली में स्थानांतरण करने की सुविधा मिलेगी।
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बंद है मोनोरेल सेवाएं
संत गाडगे महाराज चौक स्टेशन लगभग 20 किलोमीटर लंबे पूरी तरह एलिवेटेड मुंबई मोनोरेल कॉरिडोर का अंतिम स्टेशन है, जो दक्षिण मुंबई को चेंबूर से जोड़ता है। हालांकि, बार-बार तकनीकी खराबी आने के कारण सितंबर 2025 से मोनोरेल सेवाएं बंद हैं। फिलहाल मोनोरेल प्रणाली का आधुनिकीकरण किया जा रहा है और इसमें नई संचार-आधारित ट्रेन नियंत्रण सिग्नलिंग प्रणाली स्थापित की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि उन्नयन कार्य पूरा होने के बाद मोनोरेल सेवाएं दोबारा शुरू की जाएंगी।
इंटरचेंज नेटवर्क का विस्तार
एमएमआरडीए शहर में लगातार बढ़ रही यात्रियों की संख्या और उपनगरीय रेलवे पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए विभिन्न मेट्रो लाइनों पर आधुनिक इंटरचेंज स्टेशन विकसित कर रहा है। इसी योजना के तहत मेट्रो लाइन-2बी के चेंबूर स्टेशन को भी पास के मोनोरेल स्टेशन से सीधे जोड़ा जा रहा है, ताकि यात्रियों को एक परिवहन प्रणाली से दूसरी प्रणाली तक आसानी से पहुंचने की सुविधा मिल सके।
मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी को नई रफ्तार
महालक्ष्मी में बन रहा ट्रैवलर स्काईवॉक भी इसी व्यापक रणनीति का अहम हिस्सा है। इसके पूरा होने के बाद मेट्रो, मोनोरेल और भविष्य में उपनगरीय लोकल रेल के बीच निर्बाध संपर्क स्थापित होगा। इससे यात्रियों का समय बचेगा, सफर अधिक तेज और सुविधाजनक होगा तथा मुंबई की मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी को नई गति मिलेगी।
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परियोजना की प्रमुख विशेषताएं
- लगभग 283 मीटर लंबा एकीकृत पैदल पुल।
- यात्रियों की सुगम आवाजाही के लिए 11 मीटर चौड़ी संरचना।
- कुल 176 मीटर लंबाई के 6 ट्रैवलेटर।
- सभी के लिए सुगम पहुंच सुनिश्चित करने के लिए 2 यात्री लिफ्ट
- प्रति घंटे लगभग 4,500 यात्रियों की क्षमता
- महालक्ष्मी मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी परियोजना का लगभग 90 प्रतिशत कार्य पूरा।
यात्रियों को लाभ
स्टेशनों के बीच इंटरचेंज का समय करीब 20 मिनट तक कम होगा। दक्षिण मुंबई और वर्ली से मोनोरेल तक पहुंचना अधिक आसान होगा। मेट्रो, मोनोरेल और उपनगरीय रेलवे के बीच निर्बाध कनेक्टिविटी से सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।
इंजीनियरिंग की मिसाल
निर्माण से पहले 1,800 मिमी व्यास की वर्षा जल निकासी पाइपलाइन को सुरक्षित रूप से स्थानांतरित किया गया। जलापूर्ति और सीवरेज लाइनों को बिना प्रभावित किए कार्य पूरा किया गया। एक भी पेड़ नहीं काटा गया और यातायात तथा गणेश विसर्जन मार्ग को बिना बाधित किए निर्माण कार्य आगे बढ़ाया गया।
