Updated On: Jul 14, 2026 | 07:51 PM IST
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सार
Samay Raina Fine: 'इंडियाज गॉट लेटेंट' विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना समेत अन्य प्रतिभागियों पर 3-3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। अदालत ने कहा कि समय रैना ने कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश की।

समय रैना (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
विस्तार
Samay Raina Controversy: कॉमेडियन समय रैना और विवादित शो ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ एक बार फिर कानूनी विवादों में घिर गए हैं। दिव्यांगों का मजाक उड़ाने से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना और शो में शामिल अन्य कॉमेडियंस व मेहमानों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि समय रैना ने कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश की और गलत बयान दिए। सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना समेत संबंधित लोगों पर 3-3 लाख रुपये का जुर्माना लगाने का आदेश दिया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी संबंधित लोगों को दो सप्ताह के भीतर जुर्माने की राशि जमा करनी होगी। कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि तय समय में जुर्माना जमा नहीं किया गया तो उनके खिलाफ आगे सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना और अन्य से यह भी पूछा कि इस विवाद के बाद उन्होंने अपने व्यवहार और सोच में सुधार लाने के लिए अब तक क्या कदम उठाए हैं।
कोर्ट में उठा वादों को पूरा न करने का मुद्दा
मामले की सुनवाई के दौरान क्योर एसएमए फाउंडेशन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने अदालत को बताया कि समय रैना ने पहले दावा किया था कि उन्होंने दिव्यांगों के हित में कुछ कार्यक्रम आयोजित किए हैं। हालांकि, अदालत के निर्देश के बावजूद उन्होंने संस्था से कोई संपर्क नहीं किया। संस्था की ओर से यह भी कहा गया कि समय रैना ने अब तक इस पूरे विवाद पर सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगी है।
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क्या है पूरा मामला
क्योर एसएमए फाउंडेशन का आरोप है कि समय रैना ने अपने स्टैंडअप शो ‘दैट कॉमेडी क्लब’ के दौरान स्पाइनल मस्क्यूलर अट्रॉफी से पीड़ित एक नवजात बच्चे का मजाक उड़ाया था। कथित तौर पर उन्होंने इलाज के लिए आवश्यक महंगे इंजेक्शन और बच्चे के भविष्य को लेकर विवादित टिप्पणियां की थीं। इन बयानों को लेकर सोशल मीडिया पर भी काफी नाराजगी देखने को मिली थी, जिसके बाद मामला अदालत तक पहुंचा।
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विवाद ने बढ़ाई मुश्किलें
‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ पहले भी अपने कंटेंट और प्रतिभागियों की टिप्पणियों को लेकर विवादों में रहा है। अब सुप्रीम कोर्ट की इस सख्त टिप्पणी और जुर्माने के आदेश ने मामले को और गंभीर बना दिया है। अदालत का यह रुख साफ संकेत देता है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किसी समुदाय, दिव्यांग व्यक्ति या संवेदनशील मुद्दे का मजाक उड़ाने को न्यायपालिका गंभीरता से देख रही है।
