अमेरिका के मिशिगन से काशी पहुंचा जैक्सन: चाचा की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए 8000 किमी दूर से आकर अस्सी घाट पर किया अस्थि विसर्जन और पिंडदान - Up18 News

Published on 5 अक्टू॰ 2026

​वाराणसी। धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी में पितृ पक्ष के दौरान तर्पण और पिंडदान के लिए रोजाना देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। पिशाच मोचन कुंड और गंगा घाटों पर इन दिनों भारी भीड़ उमड़ रही है। इसी बीच, अमेरिका के मिशिगन प्रांत से आए एक अमेरिकी युवक जैक्सन की कहानी ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है। जैक्सन अपने दिवंगत चाचा नेट की अस्थियां लेकर करीब 8000 किलोमीटर की दूरी तय करके काशी पहुंचा और अस्सी घाट पर वैदिक रीति-रिवाज के साथ उनका अस्थि विसर्जन व पिंडदान किया।

चाचा की थी इच्छा, निधन के बाद सपने में आए

जैक्सन अमेरिका के एक रेस्टोरेंट में काम करता है। उसने बताया कि उसका अपने चाचा नेट के साथ बेहद गहरा लगाव था, क्योंकि बचपन से ही वह उनके साथ रहा था। उसके चाचा भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं में गहरी आस्था रखते थे। उन्हें काशी और मथुरा जैसे धार्मिक शहरों से विशेष लगाव था और उनकी अंतिम इच्छा थी कि उनके निधन के बाद उनकी अस्थियां मोक्षदायिनी गंगा में विसर्जित की जाएं। करीब 3 साल पहले 50 वर्ष की आयु में उनके चाचा का निधन हो गया था। जैक्सन के मुताबिक, चाचा के जाने के बाद वह लगातार उसे सपनों में दिखाई देने लगे, जिससे वह परेशान रहने लगा।

सोशल मीडिया से मिला काशी आने का रास्ता

जब जैक्सन को समझ नहीं आया कि वह क्या करे, तब उसने इंटरनेट और सोशल मीडिया का सहारा लिया। उसने यूट्यूब पर काशी से जुड़े धार्मिक वीडियो सर्च किए, जहां उसे अस्थि विसर्जन और पिंडदान की परंपराओं के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद उसने खुद भारत आने का पक्का इरादा कर लिया। वह 2 अक्टूबर को फ्लाइट पकड़कर भारत पहुंचा और फिर वाराणसी आ गया।

अस्सी घाट पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच किया विसर्जन

शनिवार को जैक्सन ने अस्सी घाट पर तीर्थ पुरोहित राहुल पांडेय के आचार्यत्व में पूरे विधि-विधान से धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उसने अपने चाचा की अस्थियां गंगा नदी में प्रवाहित कीं और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। इस दौरान जैक्सन काफी भावुक नजर आया।

पितृ पक्ष में उमड़ रही भारी भीड़

तीर्थ पुरोहित राहुल पांडेय ने बताया कि सनातन परंपरा में काशी और गंगा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि यहां पिंडदान और अस्थि विसर्जन से दिवंगत आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है। वर्तमान में पितृ पक्ष के दौरान काशी में प्रतिदिन करीब 50 हजार श्रद्धालु गंगा घाटों और पिशाचमोचन कुंड पर तर्पण के लिए पहुंच रहे हैं। पिछले एक हफ्ते में 3 लाख से अधिक लोग अपने पूर्वजों का तर्पण कर चुके हैं, जिसमें विदेशी सैलानी और श्रद्धालु भी शामिल हैं।