प्रशासक गुलाबचंद कटारिया ने चंडीगढ़ स्टार्टअप पॉलिसी-2025 के तहत 8 स्टार्टअप और 4 इन्क्यूबेटर को वित्तीय सहायता प्रदान की।
चंडीगढ़ प्रशासन ने बुधवार को चंडीगढ़ स्टार्टअप पॉलिसी-2025 के तहत 8 स्टार्टअप और 4 इन्क्यूबेटर को वित्तीय सहायता प्रदान की। न्यू यूटी चंडीगढ़ सचिवालय में उद्योग विभाग की ओर से ग्रांट वितरण समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में चंडीगढ़ के प्रशासक गुला
.
समारोह में उद्योग संघों, स्टार्टअप, इन्क्यूबेटर, शिक्षण संस्थानों, सरकारी विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। उद्योग सचिव निशांत कुमार यादव ने कार्यक्रम में चंडीगढ़ स्टार्टअप पॉलिसी-2025 की प्रमुख बातों और इसके तहत आवेदन प्रक्रिया की जानकारी दी।
8 स्टार्टअप को 85.80 लाख
समारोह में 8 स्टार्टअप को कुल 85.80 लाख रुपए की वित्तीय सहायता दी गई। वहीं 4 इन्क्यूबेटर को 1.175 करोड़ रुपए की ग्रांट दी गई। दोनों को मिलाकर कुल 2.033 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता स्वीकृत की गई है। यह राशि चंडीगढ़ स्टार्टअप पॉलिसी-2025 के प्रावधानों के अनुसार संबंधित मूल इन्क्यूबेटर के माध्यम से चरणबद्ध तरीके से जारी की जाएगी।
आर्थिक मदद से स्टार्टअप बढ़ा सकेंगे अपना काम
प्रशासक गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि चंडीगढ़ में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देना जरूरी है। स्टार्टअप और इन्क्यूबेटर को समय पर आर्थिक और संस्थागत सहायता मिलने से वे अपने विचारों और तकनीक को आगे बढ़ा सकेंगे। इससे नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे और चंडीगढ़ के आर्थिक विकास में भी योगदान मिलेगा।
उन्होंने स्टार्टअप और इन्क्यूबेटर से पॉलिसी के तहत मिलने वाली सहायता का प्रभावी इस्तेमाल करने की अपील की। उन्होंने कहा कि मजबूत स्टार्टअप माहौल तैयार करने में सभी संबंधित पक्षों की भूमिका महत्वपूर्ण है।
आगे मेंटरशिप-निवेशकों से जोड़ने पर जोर
प्रशासन की ओर से आने वाले समय में स्टार्टअप व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई और पहल की जाएंगी। इनमें नए विचारों पर काम करने के लिए कार्यक्रम, मार्गदर्शन, निवेशकों से संपर्क, क्षमता बढ़ाने और बाजार से जोड़ने जैसी पहल शामिल हैं। आने वाले समय में और स्टार्टअप तथा इन्क्यूबेटर को इन योजनाओं के दायरे में लाया जाएगा।
प्रशासन का उद्देश्य स्टार्टअप, इन्क्यूबेटर, उद्योग, निवेशकों, विशेषज्ञों, विद्यार्थियों और अन्य संबंधित लोगों को एक मंच पर लाकर मजबूत और टिकाऊ उद्यमिता का माहौल तैयार करना है। इससे नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा मिलने के साथ रोजगार और आर्थिक विकास को भी गति देने की कोशिश की जाएगी।