एक साल में सिर्फ 8.25 फीसदी ग्रेजुएट्स को मिली नौकरी, नीति आयोग की रिपोर्ट

Published on 22 अग॰ 2026

एक साल में सिर्फ 8.25 फीसदी ग्रेजुएट्स को मिली नौकरी, नीति आयोग की रिपोर्ट

एक साल में सिर्फ 8.25 फीसदी ग्रेजुएट्स को मिली नौकरी

भारत में हर साल लाखों युवा ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी कर नौकरी की तलाश शुरू करते हैं. हालांकि, डिग्री हासिल करने के बाद भी बड़ी संख्या में युवाओं को अपनी योग्यता और पढ़ाई के मुताबिक रोजगार नहीं मिल पाता. नीति आयोग की Reimagining Skilling for Viksit Bharat@2047 रिपोर्ट ने देश की शिक्षा और रोजगार व्यवस्था के बीच मौजूद इस अंतर को उजागर किया है. रिपोर्ट के मुताबिक केवल 8.25 फीसदी ग्रेजुएट्स ही अपनी योग्यता के अनुरूप नौकरी कर रहे हैं. इसका एक बड़ा कारण पढ़ाई में जरूरी स्किल, प्रैक्टिकल अनुभव और इंडस्ट्री की जरूरतों के बीच तालमेल की कमी है.

पढ़ाई और नौकरी के बीच स्किल गैप बड़ी चुनौती

नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार देश में उच्च शिक्षा हासिल करने वाले युवाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन उनकी पढ़ाई और रोजगार बाजार की जरूरतों में पर्याप्त तालमेल नहीं है. कई शिक्षण संस्थानों के सिलेबस इंडस्ट्री में हो रहे बदलावों के हिसाब से अपडेट नहीं किए गए हैं. इसका असर यह होता है कि डिग्री या डिप्लोमा हासिल करने के बाद भी युवाओं को नौकरी के लिए अतिरिक्त ट्रेनिंग लेनी पड़ती है.

देश में करीब 3.4 करोड़ छात्र अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम में पढ़ रहे हैं. इनमें लगभग 1.3 करोड़ छात्र बीए कर रहे हैं. बीए, बीएससी और बीकॉम में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या 2 करोड़ से अधिक है. रिपोर्ट के मुताबिक इन सामान्य डिग्री कोर्स का रोजगार से सीधा संबंध कई मामलों में कमजोर है.

80% छात्रों ने प्रैक्टिकल अनुभव की कमी बताई

रिपोर्ट में छात्रों की उन समस्याओं का भी जिक्र किया गया है, जिनका सामना उन्हें नौकरी तलाशते समय करना पड़ता है. करीब 80 फीसदी छात्रों ने प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस और इंडस्ट्री एक्सपोजर की कमी को बड़ी समस्या बताया. वहीं 34 फीसदी छात्रों ने स्किल गैप और 18 फीसदी ने इंटरव्यू की तैयारी की कमी की बात कही.

बीए, बीकॉम और बीएससी जैसी डिग्रियां उपयोगी हैं, लेकिन इनके साथ डिजिटल, कम्युनिकेशन और ऑफिस से जुड़ी स्किल विकसित करना भी जरूरी है. कई एंट्री लेवल नौकरियों में केवल डिग्री के बजाय व्यावहारिक क्षमता को महत्व दिया जाता है.

सरकारी नौकरी के लिए बढ़ रहा दबाव

रिपोर्ट में सरकारी नौकरियों के प्रति युवाओं के बढ़ते रुझान का भी जिक्र है. नवंबर 2024 से जुलाई 2025 के बीच करीब 55 हजार पदों के लिए 1.86 करोड़ आवेदन मिले. यह सरकारी नौकरियों की सीमित संख्या और आवेदकों की बड़ी संख्या के बीच अंतर को दिखाता है.

सपना यादव

सपना यादव

दिल्ली में जन्मीं सपना यादव TV9 भारतवर्ष डिजिटल में बतौर असिस्‍टेंट प्रड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता जगत में 4 वर्षों से ज्‍यादा के अनुभव के साथ काम जारी है. ह्यूमन इंटरेस्ट, राजनीति, वर्ल्ड, एजुकेशन, नॉलेज, करंट अफेयर्स से जुड़ी खबरों में खास दिलचस्पी रखती हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी से BA Hons. हिस्ट्री की पढ़ाई करने के बाद उन्‍होंने पत्रकारिता को लक्ष्‍य बनाया, फिर जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी से पीजी डिप्लोमा इन टीवी जर्नलिज्म किया, जामिया से ही हिस्ट्री में मास्टर्स भी किया और फिर इसके बाद गुरु जम्बेश्वर साइंस एंड टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया. मास कम्‍यूनिकेशन में पत्रकारिता की डिग्री लेने के बाद जमीनी स्तर पर खबरों के महत्व को समझा. इसके बाद उन्‍होंने बतौर ट्रेनी TV9 भारतवर्ष डिजिटल में एक साल तक काम किया. ट्रेनी के दौरान अलग-अलग तरह की खबरों का अनुभव लेने के बाद TV9 भारतवर्ष डिजिटल में असिस्‍टेंट प्रड्यूसर के पद पर काम शुरू किया. यहां पर एंकरिंग, वॉइस ओवर, वीडियो प्रोडक्शन, न्यूज राइटिंग जैसे काम किए. इस समय वह एजुकेशन डेस्क पर कार्यरत हैं और स्टूडेंट्स के लिए करियर से जुड़े विकल्पों, बोर्ड परीक्षाओं, नौकरियों और प्रतियोगी परीक्षाओं और यूनिवर्सिटीज की महत्वपूर्ण जानकारियों को कवर कर रही हैं. सपना यादव को ट्रेवल करना, लिखना- पढ़ना पसंद है और वो प्रकृति को करीब से महसूस करना ज्यादा पसंद करती हैं. पत्रकारिता में सफर अभी जारी है.

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