Updated On: Aug 04, 2026 | 06:46 PM IST
विज्ञापन
सार
Second Hand Car: भारत में नई कारों की बिक्री लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है लेकिन इसी के साथ सेकेंड हैंड कारों का बाजार भी तेज रफ्तार पकड़ रहा है। जिसमें अब लोग पहले से चली हुई कारों को चुन रहे है।

Second Hand Car (Source. Magnific)
विस्तार
Second Hand Car In Indian Market: भारत में नई कारों की बिक्री लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है लेकिन इसी के साथ सेकेंड हैंड कारों का बाजार भी तेज रफ्तार पकड़ रहा है। इसमें बढ़ती महंगाई और नई कारों की ऊंची कीमतों के बीच अब बड़ी संख्या में ग्राहक कम बजट में बेहतर विकल्प तलाश रहे हैं। यही वजह है कि यूज्ड कारों की मांग तेजी से बढ़ी रही है। वहीं क्रिसिल रेटिंग्स की ताजा रिपोर्ट में बताया गया कि वित्त वर्ष 2026-27 में भारत का यूज्ड कार बाजार 7 से 9 फीसदी की दर से बढ़ सकता है और इस दौरान 70 लाख से ज्यादा पुरानी कारों की बिक्री होने का अनुमान है।
पहली बार कार खरीदने वालों की पहली पसंद बनी यूज्ड कार
रिपोर्ट में सामने आया है कि भारत के यूज्ड कार बाजार को सबसे ज्यादा मजबूती उन ग्राहकों से मिल रही है जो पहली बार कार खरीद रहे हैं। ऐसे खरीदार कुल बिक्री का लगभग 66 फीसदी हिस्सा हैं। नई कारों की कीमतें लगातार बढ़ने से सीमित बजट वाले ग्राहक सेकेंड हैंड कार खरीदना ज्यादा फायदेमंद समझ रहे हैं। इसमें कम कीमत में बेहतर फीचर्स और अच्छी कंडीशन वाली कार मिलने से यह विकल्प पहले से ज्यादा आकर्षक बन गया है।
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ने बदली लोगों की सोच
कुछ साल पहले तक पुरानी कार खरीदना जोखिम भरा माना जाता था लेकिन अब डिजिटल प्लेटफॉर्म ने इस प्रक्रिया को काफी आसान और भरोसेमंद बना दिया है। अब ग्राहक घर बैठे कार की सर्विस हिस्ट्री, इंस्पेक्शन रिपोर्ट, ओनरशिप डिटेल्स और कीमत की जानकारी देख सकते हैं। साथ ही आसान फाइनेंस और लोन की सुविधा मिलने से खरीदारी पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक हो गई है। यही कारण है कि संगठित कंपनियों की हिस्सेदारी भी लगातार बढ़ रही है।
सम्बंधित ख़बरें
ये भी पढ़े: अब 5 चालान पड़े भारी, बार-बार ट्रैफिक नियम तोड़े तो रद्द हो सकता है Driving License, जानिए नया नियम
सस्ती कीमत और बेहतर कंडीशन वाली कारें बना रहीं आकर्षक विकल्प
क्रिसिल की रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्तमान में भारत के यूज्ड कार बाजार में संगठित कंपनियों की हिस्सेदारी बढ़कर करीब 26 फीसदी हो गई है जबकि वित्त वर्ष 2021-22 में यह आंकड़ा केवल 20-21 फीसदी था। वहीं अभी भी लगभग 74 फीसदी कारोबार असंगठित बाजार के जरिए होता है जिससे आने वाले सालों में संगठित सेक्टर के लिए बड़ा अवसर दिखाई देता है।
वहीं कीमत की बात करें तो पुरानी हैचबैक और सेडान नई कारों के मुकाबले करीब 25 फीसदी तक सस्ती मिल जाती हैं। वहीं SUV और यूटिलिटी व्हीकल खरीदने पर भी करीब 20 फीसदी तक बचत हो सकती है। इतना ही नहीं अब सेकेंड हैंड बाजार में मिलने वाली कारों की औसत उम्र घटकर करीब 4 साल रह गई है। जिसका सीधा मतलब है कि ग्राहकों को पहले की तुलना में कम चली हुई बेहतर कंडीशन और नई तकनीक वाली कारें आसानी से मिल रही हैं। जिसको लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नई कारों की कीमतों में इसी तरह बढ़ोतरी जारी रही तो आने वाले सालों में भारत का यूज्ड कार बाजार और भी तेजी से विस्तार कर सकता है।
