अमेरिका से 60 जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइल खरीदेगा भारत, फुटेज में देंखे 292 करोड़ की डील; जानें क्यों है खास

Published on 29 अग॰ 2026

अमेरिका से 60 जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइल खरीदेगा भारत, फुटेज में देंखे 292 करोड़ की डील; जानें क्यों है खास

भारतीय सेना अपनी एंटी-टैंक क्षमता को और मजबूत करने जा रही है। भारत ने अमेरिका से जैवलिन एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम खरीदने के लिए समझौता किया है। अमेरिकी दूतावास के मुताबिक, भारतीय सेना ने जैवलिन सिस्टम की खरीद के लिए Letter of Offer and Acceptance (LOA) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। यह खरीद फास्ट-ट्रैक यानी आपातकालीन खरीद प्रक्रिया के तहत की जा रही है।रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस सौदे के तहत भारतीय सेना को करीब 60 जैवलिन मिसाइल सिस्टम मिल सकते हैं। सौदे की अनुमानित कीमत करीब 292 करोड़ रुपये बताई जा रही है। डिलीवरी 2026-27 के दौरान शुरू होने की उम्मीद है।

क्या है जैवलिन मिसाइल सिस्टम?

जैवलिन अमेरिका में विकसित किया गया आधुनिक एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम है। इसे सैनिक जमीन से लॉन्च कर सकते हैं और यह मुख्य रूप से बख्तरबंद वाहनों और टैंकों जैसे लक्ष्यों के खिलाफ इस्तेमाल के लिए बनाया गया है।इस सिस्टम की खासियत इसका फायर एंड फॉरगेट सिस्टम है। मिसाइल लॉन्च होने के बाद ऑपरेटर को लगातार लक्ष्य पर निशाना बनाए रखने की जरूरत नहीं होती। इसका इमेजिंग इंफ्रारेड सीकर लक्ष्य की पहचान और ट्रैकिंग में मदद करता है। यही वजह है कि इसे कठिन युद्ध परिस्थितियों में उपयोगी माना जाता है।

पहाड़ी इलाकों में बढ़ेगी सेना की ताकत

जैवलिन सिस्टम की खरीद भारतीय सेना के लिए खास तौर पर पहाड़ी और दुर्गम सीमावर्ती इलाकों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इन क्षेत्रों में टैंक और अन्य बख्तरबंद वाहनों के खिलाफ हल्के और आसानी से तैनात किए जा सकने वाले एंटी-टैंक सिस्टम उपयोगी होते हैं।भारत की उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर लगातार बदलती सुरक्षा परिस्थितियों के बीच सेना अपनी फायरपावर और निगरानी क्षमता को मजबूत कर रही है।

भारत में उत्पादन की भी तैयारी

इस सौदे की एक महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत और अमेरिका भविष्य में जैवलिन मिसाइल सिस्टम के भारत में सह-उत्पादन की संभावनाओं पर भी काम कर रहे हैं। अमेरिकी पक्ष ने कहा है कि मौजूदा समझौता दोनों देशों के रक्षा औद्योगिक सहयोग के लिए आगे के अवसर खोल सकता है।इससे भारत की 'मेक इन इंडिया' और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की कोशिशों को भी बढ़ावा मिल सकता है। भविष्य में भारत में उत्पादन होने पर विदेशी हथियारों की आपूर्ति पर निर्भरता कम करने और घरेलू रक्षा उद्योग की क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

लॉकहीड मार्टिन और रेथियॉन ने बनाया

जैवलिन सिस्टम को अमेरिकी रक्षा कंपनियों Lockheed Martin और RTX (Raytheon) ने विकसित किया है। यह सिस्टम अमेरिकी सेना और मरीन कॉर्प्स के साथ-साथ कई अन्य देशों की सेनाओं में भी इस्तेमाल किया जाता है।भारत-अमेरिका के बीच यह समझौता दोनों देशों के बढ़ते रक्षा सहयोग को भी दर्शाता है। भारत पहले से ही अमेरिका के साथ कई प्रमुख रक्षा प्लेटफॉर्म और तकनीकों पर सहयोग कर रहा है। जैवलिन की खरीद से भारतीय सेना की एंटी-आर्मर क्षमता में एक और आधुनिक सिस्टम जुड़ जाएगा।

Share this story