चेन्नई में पुलिस ने नकली स्टांप पेपर, सरकारी मुहरें और फर्जी डिग्री सर्टिफिकेट बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है. इस मामले में छह लोग गिरफ्तार किए गए हैं. पुलिस ने 100 से ज्यादा नकली मुहरें, नकली 500 रुपये के नोट और प्रिंटिंग मशीनें बरामद कीं हैं. पढ़ें पूरी कहानी.
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इस मामले में पुलिस की जांच अभी जारी है (फोटो-ITG)
तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में नकली स्टांप पेपर, सरकारी मुहर और फर्जी सर्टिफिकेट बनाने वाले गिरोह का खुलासा हुआ है. एन्नोर पुलिस ने इस मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने आरोपियों के ठिकाने से तहसीलदारों और विभिन्न सरकारी अधिकारियों की 100 से ज्यादा नकली मुहरें बरामद की हैं. इसके अलावा 500 रुपये के नकली नोट और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मुहरों जैसी दिखने वाली नकली मुहरें भी मिली हैं.
पुलिस को सूचना मिली थी कि विम्को नगर के अंबेडकर नगर स्थित एक कार्यालय में नकली सरकारी मुहरें और स्टांप पेपर रखे गए हैं. बताया गया था कि इनका इस्तेमाल तहसीलदारों और विभिन्न सरकारी कार्यालयों से जुड़े दस्तावेजों में किया जाता था. सूचना के आधार पर पुलिस की टीम ने बताए गए कार्यालय पर छापा मारा और तलाशी ली. इस दौरान वहां से बड़ी संख्या में फर्जी मुहरें और अन्य संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए गए.
छापेमारी के दौरान पुलिस को 500 रुपये के नोटों पर इस्तेमाल होने वाली RBI की मुहरों जैसी नकली मुहरें भी मिलीं. इसके साथ ही छपे हुए नकली 500 रुपये के नोट भी बरामद किए गए. पुलिस ने मेडिकल कॉलेजों, सरकारी आर्ट्स कॉलेजों और निजी कॉलेजों की डिग्रियों के लिए इस्तेमाल होने वाले फर्जी सर्टिफिकेट के टेम्पलेट और कागज भी जब्त किए हैं. इन दस्तावेजों को तैयार करने के लिए इस्तेमाल होने वाली प्रिंटिंग मशीनें भी पुलिस ने अपने कब्जे में ले ली हैं.
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इस मामले में पुलिस ने करुणाकरन, स्टीफन उर्फ जयकुमार, जॉनसन, विक्टर, करुणानिधि और सत्यामूर्ति को गिरफ्तार किया है. जांच के दौरान कथित तौर पर सामने आया कि आरोपी सरकारी कार्यालयों से जुड़ी मुहरों की नकल करके फर्जी दस्तावेज तैयार करते थे. वे नकली सर्टिफिकेट और अन्य दस्तावेज बनाने के साथ उनकी सप्लाई भी कर रहे थे. पुलिस के मुताबिक, यह काम करीब 10 साल से किए जाने की बात सामने आई है.
फिलहाल एन्नोर पुलिस मामले की आगे की जांच कर रही है. पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह ने कितने फर्जी दस्तावेज तैयार किए और उनकी सप्लाई किन लोगों या संस्थानों तक की गई. बरामद मुहरों, नकली नोटों, सर्टिफिकेट के टेम्पलेट और प्रिंटिंग मशीनों की जांच भी मामले के अहम पहलुओं में शामिल है.
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